इंदौर। रात 10 बजे बाद गरबा पंडालों में ध्वनि विस्तार यंत्र (डीजे) बजेंगे या नहीं। कोर्ट ने यह निर्णय कलेक्टर पर छोड़ दिया है। मामले में दायर जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि पंडाल संचालक कलेक्टर को इस संबंध में आवेदन दें। वे उसी दिन तय करेंगे कि आवेदन देने वाले पंडाल में रात 10 बजे बाद डीजे बजेगा या नहीं।

जनहित याचिका भाजपा प्रवक्‍ता उमेश शर्मा ने दायर की थी। इसमें कहा था कि गरबा राजनीतिक नहीं बल्कि धार्मिक आयोजन हैं। परंपरागत तरीके से गरबों में डीजे का इस्तेमाल हो रहा है। जिला प्रशासन ने रात 10 बजे बाद गरबा पंडालों में डीजे का इस्तेमाल प्रतिबंधित कर दिया है, जबकि कई जगह गरबे रात 10 बजे बाद ही शुरू होते हैं। डीजे प्रतिबंधित करने से गरबे की परंपरा खतरे में पड़ गई है।

याचिकाकर्ता की तरफ से सीनियर एडवोकेट पीयूष माथुर, एडवोकेट राघवेंद्रसिंह बैस ने पैरवी की। शुक्रवार को बहस के दौरान उन्होंने तर्क रखा कि मप्र कोलाहल नियंत्रण अधिनियम के नियम 7 और 12 के तहत कलेक्टर और संभागायुक्त को अधिकार है कि वे धार्मिक आयोजनों के मामले में अधिकतम 15 दिनों के लिए डीजे के इस्तेमाल की अवधि में दो घंटे की शिथिलता दे सकते हैं। गरबे धार्मिक आयोजन हैं इसलिए रात 10 के बजाय 12 बजे तक डीजे इस्तेमाल करने की अनुमति दी जा सकती है।

कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आदेश दिया कि गरबा पंडाल संचालक कलेक्टर के समक्ष इस संबंध में आवेदन दें। कलेक्टर कोलाहल नियंत्रण अधिनियम के प्रावधानों के तहत इन आवेदनों पर तत्काल निर्णय लें।

इधर शासन की तरफ से तर्क रखा गया कि आचार संहिता लागू है। रात 10 बजे तक ही ध्वनि विस्तार यंत्रों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इंंदौर में हर चौराहे पर गरबा होता है। डीजे के इस्तेमाल से कई बार विवाद की स्थिति भी बन जाती है। जिला प्रशासन ने रात 10 बजे बाद डीजे के इस्तेमाल पर रोक नियमों के अंतर्गत लगाई है।