इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। शहर में कुत्तों की बढ़ती संख्या और इनके से लोग परेशान हैं। कुछ क्षेत्रों में इनका इतना आतंक है कि लोग रात के समय गली-मोहल्लों से निकलने में डर रहे हैं। नगर निगम इनकी संख्या को नियंत्रित करने के लिए नसबंदी कार्यक्रम चला रहा है, लेकिन इसकी धीमी गति के कारण यह प्रभावी नहीं हो रहा है। देवगुराडिया रोड पर बने डॉग हाउस में रोजाना आठ-दस कुत्तों की ही नसबंदी हो पाती है, जबकि इनकी बढ़ने की रफ्तार करीब पांच गुना है।

शहर के 85 वार्डों में कुत्तों की संख्या में लगातार इजाफा हुआ है। नगर निगम के अनुसार शहर में इस समय करीब 80 हजार आवारा कुत्ते हैं। पिछले वर्ष यह संख्या करीब 65 हजार थी। इनकी संख्या रोकने के लिए नगर निगम कोई व्यापक अभियान नहीं चला रहा है। रात के समय शहर के अधिकांश चौराहों, कॉलोनियों के चौराहों व गलियों में कुत्ते समूह बनाकर बैठे रहते हैं। इस दौरान सड़क पर बाइक, साइकिल या पैदल निकलने वाले लोगों पर ये कभी भी हमला कर देते हैं। ऐसे में लोगों में डर बना रहता है। जिन क्षेत्रों में आवारा कुत्तों की संख्या ज्यादा है, वहां के रहवासी रात में बच्चों को भी अकेला नहीं खेलने देते। रात दस बजे के बाद आने वाले लोगों को इनका खतरा रहता है। वाहन आने पर ये अचानक ही हमला कर रहे हैं। इनके हमले में घायल होकर रोजाना 30 से ज्यादा लोग सरकारी अस्पताल पहुंच रहे हैं।

जुलाई-अगस्त में इसलिए बढ़ती है घटनाएं

पशु चिकित्कसकों के मुताबिक जुलाई व अगस्त इनकी ब्रिडिंग का सीजन होता है। ऐसे में इन दो माह में इनके पास से गुजरने पर इन्हें खतरे का आभास हो तो ये हमला कर देते हैं। इसलिए इस सीजन में कुत्तों के हमले से घायल लोगों की संख्या बढ़ रही है।

- 80 हजार कुत्ते हैं वर्तमान में शहर में

- 65 हजार थे पिछले वर्ष

- 929 रुपए प्रति कुत्ते की नसबंदी पर खर्च करता है नगर निगम

इन क्षेत्रों में सबसे अधिक समस्या

भमोरी

मालवा मिल

जेल रोड

पलासिया

एयरपोर्ट रोड

भंवरकुआं क्षेत्र

बायपास की कालोनियां

(इनके अलावा शहर के बाहरी इलाकों में भी कुत्तों की संख्या अधिक है।)