इंदौर। प्रदेश में 16 जनवरी से ई-वे बिल लागू होगा। हालांकि विभाग ने ऐलान किया है कि अभी यह ऐच्छिक होगा। 1 फरवरी के बाद ई-वे बिल अनिवार्य होने के आसार हैं। इसके लिए शासन के नोटिफिकेशन का इंतजार किया जा रहा है।

जीएसटी के राजस्व में लगातार हो रही गिरावट के बाद काउंसिल ने देशव्यापी ई-वे बिल सिस्टम लागू करने के निर्देश सभी प्रदेशों को दिए थे कि 16 जनवरी से वे ई-वे बिल का ट्रायल शुरू कर दिया जाए। 1 फरवरी से इसे पूरी तरह से लागू करने के लिए काउंसिल की ओर से तारीख तय की गई है। इसके बाद विभाग ने भी ई-वे बिल के लिए अपना ऑनलाइन सिस्टम तैयार कर लिया है।

विभाग के इंदौर स्थित मुख्यालय ने दावा किया है कि सिस्टम पूरी तरह तैयार है। इसके लिए कारोबारियों, कर सलाहकारों और ट्रांसपोर्टर्स की प्रदेशभर में प्रशिक्षण कार्यशालाएं भी ली जा चुकी हैं।

व्यापारियों के पास मौका

विभाग के एडिशनल कमिश्नर ई-वे बिल प्रणाली के प्रभारी डॉ. धर्मपाल शर्मा ने बताया काउंसिल के आदेश के मुताबिक 16 जनवरी से लागू ई-वे बिल ऐच्छिक होगा। इसमें ई-वे बिल की जो प्रणाली निर्धारित है, उसी के मुताबिक पोर्टल से ऑनलाइन ई-वे बिल डाउनलोड होगा। अभी ट्रायल है, इसलिए इस दौरान रास्ते में जांच और चेकिंग नहीं होगी।

व्यापारियों के पास ये मौका है कि वे इस दौरान माल परिवहन के लिए ई-वे बिल डाउनलोड करें, इसका उपयोग करें। कोई परेशानी आती है तो विभाग से संपर्क करें। इसे अनिवार्य करने के बाद नियमानुसार जांच और कार्रवाई भी शुरू हो जाएगी। हालांकि अनिवार्य होने की तारीख और इसके लागू होने का स्वरूप इंटर स्टेट या इंट्रास्टेट होगा, यह शासन ही तय करेगा। इसके लिए नोटिफिकेशन का इंतजार है।

फिलहाल इंटर स्टेट परिवहन पर होगा लागू

मप्र टैक्स लॉ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अश्विन लखोटिया के मुताबिक शुरुआती दौर में इसे इंटर स्टेट यानी एक राज्य से दूसरे राज्य तक माल परिवहन पर लागू किया जाएगा। जीएसटी काउंसिल ने राज्यों को निर्णय लेने की छूट दी है कि वे चाहें तो 1 फरवरी के बाद किंतु 1 जून के पहले तक इंट्रा स्टेट यानी राज्य के अंदर माल परिवहन पर ई-वे बिल लागू करने से छूट दे सकते हैं। शुरुआत में सिस्टम उलझे नहीं और घबराहट नहीं फैले, इसलिए मप्र में फरवरी से इंट्रा-स्टेट लागू होने के आसार नहीं हैं।

ये है ई-वे बिल

जीएसटी में कर चोरी रोकने के लिए माल परिवहन परमिट की तर्ज पर ई-वे बिल व्यवस्था तैयार की गई है। किसी भी रजिस्टर्ड व्यापारी को 50 हजार से अधिक के माल का परिवहन करना है तो उसे अनिवार्य तौर पर ई-वे बिल जनरेट कर माल ले जा रहे वाहन के साथ इनवाइस सहित ई-वे बिल भी भेजना होगा। काउंसिल ने 10 किलोमीटर से ज्यादा दूरी के माल परिवहन के लिए ई-वे बिल अनिवार्य किया है। ई-वे बिल की वैता भी तय की गई है।

100 किमी के लिए ई-वे बिल 24 घंटे वै रहेगा। इसके बाद प्रत्येक 100 किमी पर 1 दिन अतिरिक्त मिल सकेगा। यदि समाि में माल परिवहन नहीं हो सका तो कारोबारी को नया ई-वे बिल जनरेट करना होगा। विभागीय अधिकारियों को ई-वे बिल जांच के अधिकार दिए गए हैं। नियमानुसार माल परिवहन नहीं होने पर कर चोरी की आशंका में कर के साथ 100 प्रतिशत तक पेनल्टी भी लगाने के अधिकार दिए गए हैं। ई-वे बिल नहीं होने पर कर मुक्त माल पर भी 25 हजार तक पेनल्टी लगाई जा सकेगी।