इंदौर। राज्य साइबर सेल ने जिस फर्जी कॉल सेंटर पर छापा मारा, वहां 10 लाख अमेरिकी नागरिकों का डेटा था। इस गिरोह के सरगना को अमेरिकी खुफिया एजेंसी एफबीआई दो साल से तलाश रही थी। एजेंसी उसे पकड़ती, इसके पूर्व वह ठिकाने और कॉल सेंटर बदल लेता था। उसके तार अंतरराष्ट्रीय जालसाजों से जुड़े हैं। पुलिस को कॉल सेंटर की आड़ में देशद्रोही गतिविधियां संचालित करने का भी शक है। उसने थेट्स देम ट्रू पिपुल्स सर्च और यलो पेजेस वेबसाइट से भी यूएस नागरिकों का डेटा जुटाना कबूला है। एसपी (साइबर) जितेंद्रसिंह के मुताबिक आरोपित जावेद व उसके साथी भाविल प्रजापति व शाहरुख मंसूरी को कोर्ट पेश कर रिमांड पर लिया है। शेष युवक व युवतियों को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया है।

जावेद ने कबूला कि वह लंबे समय से इस काम में लिप्त था। उसने पहले दिल्ली, गोवा, मुंबई और नोएडा में भी ठगी की है। सूत्रों के मुताबिक एफबीआई को भी इसकी भनक लग गई थी। एजेंट ने भारतीय एजेंसी को इस संबंध में इनपुट दिया, लेकिन आरोपित बार-बार ठिकाने बदल चकमा दे देते थे।

एसपी के मुताबिक इस बार पुलिस को सूचना मिली और सभी को रंगे हाथों पकड़ लिया। जावेद ने इंदौर में एक वर्ष पूर्व शाहरुख के साथ कॉल सेंटर खोलने की योजना बनाई। शाहरुख ने राहिल व सनी चौहान (फरार) की मदद से दो इमारत किराए से ली और कॉल सेंटर खोल लिया।

शाम 7 बजे शुरू होता था ठगी का कारोबार

एसपी के मुताबिक छापे के पूर्व पुलिस ने कई दिनों तक ठगों की रेकी की। ठग शाम 7 बजे ऑफिस आते थे। एक व्यक्ति उन्हें ऑफिस में बंद कर बाहर निगरानी करता था। युवक-युवतियों के अंदर जाते ही बाहर व सीढ़ियों की लाइट बंद हो जाती थी।

पुलिस छापे के दौरान मोबाइल टॉर्च की रोशनी में घुसी और सभी को घेर लिया। यहां से 60 कम्प्यूटर, 70 मोबाइल, सर्वर और अन्य डिवाइस बरामद किए। पुलिस को शक है कि आरोपित इंटरनेट प्रॉटोकॉल का भी गलत इस्तेमाल कर रहे थे।

इस बात की जांच की जा रही है कि उनके पास इंटरनेट गेट वे को पास करने वाले उपकरण व टेलीफोन एक्चेंज और टर्मिनेटर तो नहीं है। मामले की जांच के लिए एफबीआई की मदद ली जाएगी। उन लोगों की सूची तैयार की जा रही है, जिनका डेटा खरीदा और धमका कर रुपए वसूले गए।

एफबीआई की मदद से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए बयान भी लिए जाऐंगे। पुलिस को सभी आरोपितों के कम्प्यूटर से एक स्क्रिप्ट मिली है। जिसमें उन सवालों के जवाब हैं जो ठगी के शिकार नागरिकों द्वारा मैसेज मिलने पर किए जाते थे। एसपी के मुताबिक आरोपित प्रशिक्षित हैं।

वे अमेरिकन इंग्लिश में बातें करते हैं। कईं युवतियां नामी कंपनियों में भी काम कर चुकी हैं। एसपी के मुताबिक ठग जावेद के बैंक खातों की जानकारी निकाली जा रही है। अभी तक की पूछताछ में यह बात भी सामने आई कि जावेद जिस अमेरिकी खातों में रुपए जमा करवाता था या बिट क्वाइन से रुपए लेता था वह चाइना के रास्ते भारत पहुंचता था।

अहमदाबाद के हवाला एजेंट उसे रुपए मुहैया करवाते थे। एसपी के मुताबिक गिरफ्तार आरोपितों से जानकारी मिली कि ठग जावेद और सनी चौहान ने युवक युवतियों को एमआर-10 स्थित एक बड़ी इमारत और पिनेकल ड्रीम में ठहरने की व्यवस्था की थी।

वह उन्हें 22 हजार रुपए महीना वेतन देता था। एक डॉलर ठगने पर एक रुपया इन्सेंटिव के रूप में अलग मिलता था। इस तरह एक कर्मचारी को 6 हजार रुपए ऊपर की कमाई होती थी। जांच में यह भी जानकारी मिली कि एक ठग ने करोड़ों रुपए एक पब में निवेश किए हैं।