इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। फिल्म 'स्पेशल-26’ की तर्ज पर दबिश देने वाले फर्जी आयकर अधिकारी ने काला धन पकड़ने के लिए विशेष मॉड्यूल तैयार कर लिया था। उसने ज्वेलर, बिल्डर, सूदखोर और कुछ नेताओं का सर्वे करवा लिया था। वह उनके घर और ठिकानों पर छापे मारने की तैयारी में था। ठग इसके लिए भर्ती किए युवकों को होटल, धर्मशाला और जंगलों में गुप्त ट्रेनिंग देता था। इसके लिए वह भारत सरकार के नाम से गोपनीय आदेश तक जारी करता था। सूचना लीक न हो, इसलिए उन युवाओं को पद एवं गोपनीयता की शपथ तक दिलवाई जाती थी।

एएसपी (क्राइम) अमरेंद्र सिंह के मुताबिक आरोपित देवेंद्र डाबर के फ्लैट और घर से भारी मात्रा में रजिस्टर, फाइलें और सीलें मिली हैं। वह करीब पांच साल से फर्जी आयकर कार्यालय खोलकर धोखाधड़ी कर रहा था। शुरुआत में उसने परिचित और रिश्तेदारों को ठगा। फरियादी शुभम साहू ने पुलिस को बताया कि वह बीकॉम की पढ़ाई के साथ नौकरी की तलाश कर रहा था। दोस्त पवनसिंह सोलंकी के जरिए देवेंद्र से मुलाकात हुई। उसने चीफ इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर बताया और 50 हजार मांगे। भर्ती होने आए पवन सोलंकी, मोहित जाधव, अरुण सोलंकी, माधव चौहान, मोईन खान, सुरेश देवके, अशोक साहनी, संदीप परमार, रंजीत यादव, कुलदीप, संजय चौहान सहित करीब 80 युवकों से 10वीं और 12वीं की मार्कशीट, जाति प्रमाण पत्र, स्थाई निवासी प्रमाण पत्र, फोटो, आईडी कार्ड के साथ आवेदन लिया।

उनकी लिखित व मौखिक परीक्षा ली और रुपए लेकर विभिन्ना पदों पर नियुक्ति कर दी। आरोपित ने कुछ दिनों तक आयकर विभाग की कार्रवाई और छापा मारने के संबंध में पढ़ाया और प्रशिक्षण दिया। फिर भारत सरकार के आईटीएस ऑफिसर के नाम से गोपनीय पत्र जारी किया और गुप्त स्थान पर पहुंचने के आदेश जारी किए। आदेश में लिखा गया कि प्रशिक्षण स्थल पर तय समय पर पहुंचें। साथ में पेन, नोटबुक, मौसम के अनुसार आवश्यक सामान लेकर आएं। विभाग की बैठक और प्रशिक्षण के बारे में सूचना लीक न हो, इसलिए सभी से शपथ पत्र लिया गया। पत्र में यह भी लिखा कि गोपनीयता भंग करने पर आयकर अधिनियम के तहत 50 हजार अर्थदंड और और एक वर्ष की सजा सुनाई जा सकती है।

पान-चाय वालों को बनाया खबरी, कालेधन का रिकॉर्ड मांगा

आरोपित देवेंद्र ने ग्रामीण क्षेत्रों में सौ युवाओं की खबरी के रूप में भर्ती कर ली थी। उनसे कालेध्ान की जानकारी जुटा रहा था। आरोपित ऐसा मॉड्यूल तैयार कर रहा था जो कालेधन, सूदखोरी और हवाला पर विशेष नजर रखे और सूचना मिलते ही छापा मार सके। उसने चाय-पान की दुकान चलाने वाले युवकों को भी गिरोह में जोड़ लिया था। दफ्तर में उपस्थिति व आवक, जावक रजिस्टर भी होते थे। प्रत्येक पत्र की एंट्री होती थी। पहले वह अस्थाई भर्ती करता था, लेकिन उनका कामकाज व रुपए मिलने पर स्थाई कर देता था। देवेंद्र अधिकारी की तरह ही बर्ताव करता था। कार में बैठने के पहले ड्राइवर-गनमैन दरवाजा खोलते थे। जिस सफारी कार (एमपी 09 सीएफ 9700) में सफर करता था, उस पर भारत का मोनो और 'इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर इंटेलिजेंस एंड क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट नई दिल्ली द्वारा प्रदत्त" लिखा हुआ था। आगेपीछे भारत सरकार लिखा था। वह इंदौर, कुक्षी, मनावर, खंडवा, देवास, खरगोन, आलीराजपुर, धार, झाबुआ आदि इलाकों में रसूखदारों की चल व अचल संपत्ति की जानकारी जुटाता था। उसने पिछले वर्ष विधानसभा चुनाव में भी 20 फर्जी अफसरों की 'चुनाव ड्यूटी" के आदेश निकाले थे।

ये हैं गिरोह के बाकी सदस्य, कर रखी थी इनकी नियुक्ति

सुनील मंडलोई : आरोपित मूलत: आजाद कॉलोनी कुक्षी का रहने वाला है। मुख्य आरोपित देवेंद्र का मददगार है। 12वीं तक पढ़ा है। देवेंद्र ने इसकी सीनियर फील्ड ऑफिसर (एसएफओ) के पद पर नियुक्ति कर दी थी। भर्ती युवाओं को किताबों से आयकर के बारे में पढ़ाता था।

रवि सोलंकी : देवेंद्र का रिश्तेदार और शांतिनगर (मूसाखेड़ी) में रहता है। इसे सीनियर इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर के पद पर नियुक्त किया गया था। युवाओं द्वारा तैयार की गई सर्वे की फाइलों की जांच कर उन पर साइन करता था।

दुर्गेश गेहलोत : आरोपित इंदिरा एकता नगर (मूसाखेड़ी) में रहता है। यह सरगना के निजी सहायक के रूप में काम करता था। रिकॉर्ड का रखरखाव और भर्ती युवाओं पर इसका कंट्रोल था।

सतीश गावड़े : यह भील कॉलोनी (मूसाखेड़ी) में रहता है। देवेंद्र का गनमैन और ड्राइवर बनकर चलता था। साथ में एयरगन रखता था। वह मासिक वेतन भी लेता था। खाकी वर्दी पहनता था जिस पर भारत सरकार, अशोक का मोनो लगा हुआ था।

दो माह पहले दी थी सूचना

फर्जी आयकर अफसर थाने के करीब पांच वर्षों से गिरोह चला रहे थे। पीड़ित छात्र शुभम ने दो महीने पूर्व ही पुलिस को इसकी सूचना दे दी थी। छात्र के मुताबिक उसकी सीनियर फील्ड ऑफिसर के पद पर भर्ती की थी लेकिन तनख्वाह नहीं मिलने पर उसका विवाद हुआ। शुभम ने राजेंद्र नगर टीआई, एसपी, डीआईजी, एडीजी और आयकर अफसरों को भी शिकायत की थी। एसएसपी रुचिवर्धन मिश्र के मुताबिक सूचना मिलने पर पुलिस तस्दीक में जुट गई और पुष्टि होते ही पकड़ लिया।