इंदौर, नईदुनिया रिपोर्टर। अब केवल सिर पर ही हेयर ट्रांसप्लांट नहीं हो रहा बल्कि दाढ़ी और मूंछ के लिए भी हेयर ट्रांसप्लांट हो रहा है। इसे बॉडी डोनर हेयर ट्रांसप्लांट कहा जाता है। इसमें शरीर के विभिन्न अंगों से बालों को निकालकर सिर, मूंछ और दाढ़ी में ट्रांसप्लांट किया जाता है। 2014 तक इस तरह का ट्रांसप्लांट महज 2 प्रतिशत होता था जो 2016 में 4 प्रतिशत और 2018 में 8 प्रतिशत पर पहुंच गया। यह बात ब्राजील से आए डॉ. मार्सिओ क्रिसोस्टमो ने हेयरकॉन कॉन्फ्रेंस के समापन अवसर पर कही। शहर में आयोजित तीन दिनी कॉन्फ्रेंस का अंतिम दिन तकनीक के नाम रहा।

नई तकनीकों के बारे में कई दिलचस्प जानकारियों की फेहरिस्त में ही डॉ. मार्सिओ क्रिसोस्टमो ने बताया कि बॉडी डोनर हेयर ट्रांसप्लांट में छाती और बगल के बालों को निकालकर सिर, मूंछ और दाढ़ी में ट्रांसप्लांट किया जाता है। शुरुआती दौर में सिर के पिछले भाग से बालों की पट्टी निकालकर उसे आगे के हिस्से में ट्रांसप्लांट किया जाता था जबकि अब बालों के गुच्छे निकालकर ट्रांसप्लांट किया जाता है। इसे और भी बेहतर ढंग से किए जाने पर अभी और भी शोध किया जा रहा है।

कॉन्फ्रेंस में डॉ. शुकेन दशोरे ने प्लेटलेट्स रीच प्लाजा (पीआरपी) पर रिचर्स पेपर प्रेजेंटेशन दिया। इसके जरिए उन्होंने बताया कि वन एमएल ब्लड में 1.5 से 4 लाख लाख ग्रोथ प्लेटलेट्स होते हैं। इन्हें खास तरह की प्रक्रिया के बाद 6 लाख तक बढ़ाया जा सकता है। ये वही ग्रोथ प्लेटलेट्स होते हैं जिनका उपयोग लेप्रोसी या डाइबिटीज में घाव ना भरने पर किया जाता है। इन्हें अलग तरह से प्रोसेस कर बालों को बढ़ाने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है।

2020 में कॉलेजों में ले सकेंगे वर्कशॉप का ज्ञान कॉन्फ्रेंस के चेयरपर्सन डॉ. अनिल गर्ग ने कहा कि इंटरनेशनल फैकल्टी के साथ मिलकर यह निर्णय लिया गया है कि 2020 में प्लास्टिक सर्जरी और डर्मेटोलॉजी पढ़ रहे पीजी स्टूडेंट्स के लिए विशेष तौर पर कार्यशाला आयोजित की जाएगी।

इस कार्यशाला का लाइव टेलीकास्ट विभिन्न कॉलेजों में किया जाएगा। इसका लाभ यह होगा कि स्टूडेंट्स कॉलेज में ही रहकर कॉन्फ्रेंस के जरिए तकनीक और नए ज्ञान को जान सकेंगे। कॉन्फ्रेंस के ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. अनिल दशोरे ने भी विचार व्यक्त किए।