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    आपके आधार कार्ड का इस्तेमाल कर खरीद रहे फर्जी मोबाइल सिम

    Published: Wed, 14 Feb 2018 03:21 PM (IST) | Updated: Thu, 15 Feb 2018 09:40 AM (IST)
    By: Editorial Team
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    इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। सावधान! आपके आधार कार्ड से फर्जी सिम बिक रही हैं। जालसाजों का नेटवर्क मप्र व जम्मू कश्मीर से लेकर 22 राज्यों में फैला हुआ है। गिरोह के सदस्यों ने वाट्सएप पर 250 ग्रुप बनाकर पांच हजार ठगों को जोड़ रखा है। इनमें सिम विक्रेता, दुकान संचालक, छात्र व व्यापारी शामिल हैं। यह खुलासा बायोटेक फाइनल के छात्र ने किया है, जिसे बुधवार को साइबर सेल ने धोखाधड़ी के आरोप में साथी के साथ गिरफ्तार किया है।

    एसपी (साइबर) जितेंद्रसिंह के मुताबिक पिछले दिनों साइबर सेल ने सोहेल नामक युवक को ऑनलाइन धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार किया था। उससे हुई पूछताछ के आधार पर बुधवार को गिरोह के सदस्य विकाससिंह परिहार निवासी घरावला मोहल्ला शहडोल और प्रिंसकुमार सिंह निवासी चिकित्सक नगर इंदौर को गिरफ्तार किया। विकास आईपीएस एकेडमी से बायोटेक कर रहा है।

    उसने पूछताछ में बताया कि देश के 22 राज्यों के ठगोरों ने वाट्सएप पर ओटीपी सेलर, ओटीपी अनलिमिटेड, ओटीपी ग्रुप, अखिल भारतीय ओटीपी संघ सहित 250 से अधिक ऐसे ग्रुप बना रखे हैं जिन पर फर्जी सिम मिलती हैं। ग्रुप पर ही ऑर्डर कर उड़ीसा और राजस्थान से केवायसी अपडेटेड सिम मंगवाई थीं। इनके जरिए उसने ई-कॉमर्स वेबसाइट अमेजॉन और ई-वॉलेट पेटीएम पर फर्जी आईडी बना ली।

    फेसबुक हुआ संपर्क और शुरू कर दी ठगी

    आरोपी फर्जी सिम से ऑनलाइन ऑर्डर कर इलेक्ट्रॉनिक सामान जैसे पेनड्राइव, कैमरे, मोबाइल, चश्मे, जूते, कपड़े आदि ऑर्डर कर देता था। डिलिवरी लेने के बाद आरोपी सामान खराब या पार्सल खाली बताकर फर्जी पेटीएम अकाउंट में रिफंड ले लेता था। इस तरह वह अभी तक लाखों रुपए की चपत लगा चुका है। एसआई आशुतोष मिठास के मुताबिक आरोपी हाईप्रोफाइल लाइफ स्टाइल का शौकीन है। वह दोस्तों में रौब झाड़ने के लिए धोखाधड़ी करता था। गिरोह में शामिल प्रिंसकुमार ने बताया उसका फेसबुक व वाट्सएप के जरिए विकास से संपर्क हुआ था। उसने भी फर्जी अकाउंट तैयार कर इसी तरह ठगी की है।

    छोटे शहर और ग्रामीण दुकानदारों ने शुरू की धोखाधड़ी

    गिरोह में ज्यादातर छोटे शहर और ग्रामीण इलाकों के दुकानदार शामिल हैं। केवायसी अपडेट करवाते वक्त दुकानदार उनका पेटीएम अकाउंट भी क्रिएट कर देता है। इस अकाउंट की जानकारी डिमांड अनुसार ठगों को मुहैया करवा दी जाती है। ठग ई-कॉमर्स वेबसाइट और अन्य जालसाजी से कमाई रकम फर्जी अकाउंट में ही जमा करवाते हैं। पुलिस ऐसे दुकानदारों की भी तलाश कर रही है। आरोपियों ने पूछताछ में ओला कैब और उबर से भी इसी तरह धोखाधड़ी करना स्वीकारा है।

    बायोमेट्रिक सिस्टम पर ध्यान दें

    सिम वेरिफिकेशन करवाते वक्त बायोमेट्रिक फिंगर ब्राउजर पर ध्यान रखें। दुकानदार दूसरे ब्राउजर ओपन कर आपका बायोमेट्रिक कई बार स्कैन कर लेते हैं।

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