इंदौर। सरकारी स्कूल में 28 साल तक हिंदी की शिक्षिका रहीं सूरज कुमारी यादव ने हजारों बच्चों को जीने का तरीका सिखाया और उनके निधन के बाद उनके बेटे ने श्रमिक क्षेत्र के सात सरकारी स्कूलों में बच्चों के व्यवस्थित रूप से बैठने का इंतजाम भी कर दिया। उन्होंने 10 प्रतिभावान विद्यार्थियों की शिक्षा का खर्च भी उठाने की घोषणा की है। श्रमिक क्षेत्र निवासी यादव महासभा के राष्ट्रीय प्रतिनिधि मुकेश यादव ने मां की याद में बीते 4 माह में क्षेत्र के 7 सरकारी स्कूलों में 10 लाख रु. की लागत से 750 विद्यार्थियों के लिए बेंच प्रदान की। उनका लक्ष्य इस माह के अंत तक इन्हीं स्कूलों में 250 फर्नीचर उपलब्ध कराना है। मार्च के अंत तक वे 3 अन्य सरकारी स्कूलों में 500 बेंच देना चाहते हैं।

चयनित इन 10 सरकारी स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर परंतु प्रतिभावान 10 बच्चों को गोद लेकर उनके कॉलेज तक की शिक्षा का खर्च उठाने का भी निर्णय लिया है। इन बच्चों का चयन कक्षा 8वीं के बाद किया जाएगा। जिन भी सरकारी स्कूलों के टेबल कुर्सी खराब हो, उन्हें रिपेयर का कार्य भी निशुल्क करा रहे हैं।

अनुभवों से मिली प्रेरणा

मुकेश यादव बताते हैं कि मां ने सरकारी स्कूल में बच्चों को वर्षों तक पढ़ाया। इनके लिए उनके मन में बहुत मोह था और स्कूलों की दुर्दशा और आवश्यक संसाधनों का अभाव उन्हें परेशान करता था। टाट-पट्टी पर बच्चों को पढ़ने में खासी दिक्कत का सामना करना पड़ता था। इसकी चर्चा वे घर पर करती थीं। इसी बात से प्रेरित होकर उन्होंने फर्नीचर देने की शुरुआत चार माह पहले ही की थी। माताजी यादव महासभा की महिला विंग की राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहीं और समाजिक सक्रियता और सेवा कार्यों के लिए उन्हें यादव महासभा से भारत यादव रत्न भी दिया गया था।

स्कूलों में बेंच प्रदान की

आज क्षेत्र में स्कूलों के भवन तो बन गए हैं, लेकिन संसाधनों का अभाव है। यादव ने जिन स्कूलों में बेंच प्रदान की, वहां के शिक्षकों का कहना है कि इनके आने से स्कूल में छात्रों की उपस्थिति बढ़ गई है।