इंदौर( ब्यूरो)। टॉन्सिल्स, थायराइड, गले की खराश, सर्दी-जुकाम और उससे संबंधित एलर्जी, खर्राटे आदि समस्याओं का उपचार योगासन के जरिए किया जा सकता है। यदि सही तरीके से सांस ली और छोड़ी जाए तो कई परेशानियों से बचा जा सकता है। योग के ज्ञान में यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि शामिल हैं। ये अष्टांगासन कहलाते हैं। इनमें आसन तीसरे क्रम पर आता है। इसका साफ तौर पर यही अर्थ है कि आसन से पहले हमें यम-नियम को समझना होगा। जीवन को बेहतर बनाने के लिए पांच-पांच यम-नियम हैं। जिनका हमें पालन करना चाहिए। योग से संबंधित ये और ऐसी ही कई दिलचस्प जानकारियों का खजाना लिए नईदुनिया सेहत शाला जारी है। लोगों को सेहत के प्रति जागरूक और सेहतमंद बनाने के लिए की जा रही नईदुनिया की इस पहल का लाभ इन दिनों प्रशिक्षणार्थी शिक्षक नगर के बगीचे में ले रहे हैं।
नईदुनिया सेहत शाला में मंगलवार को योग विशेषज्ञ डॉ. हेमंत शर्मा ने श्वसन क्रिया से संबंधित कई आसन कराए। अनुलोम विलोम से लेकर भ्रामरी तक का अभ्यास कराया। सूर्य नमस्कार, मकरासन, शशांकासन, मार्जरी, धनुरासन, सर्पासन, गतिशील धनुरासन, उत्तानपादासन आदि का अभ्यास यहां कराया गया। सुबह 5.30 बजे से लगने वाली इस सेहत शाला के तीसरे दिन बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। योग का प्रशिक्षण पाने वालों में युवा से लेकर उम्रदराज लोग तक शामिल हुए। सांसों पर नियंत्रण, सांस लेने-छोड़ने की प्रक्रिया और उसके वैज्ञानिक कारणों को यहां बताया गया।
एक नजर आसन और उनके फायदों पर
* मकरासन- पेट के बल लेटकर एक हाथ की हथेली दूसरे हाथ की हथेली पर रखी जाती है और चेहरा हाथ पर रखते हैं। इससे फेफड़ों की स्ट्रेचिंग होती है और सांस लेने में आसानी हो जाती है। यह पेट की चर्बी व पीठ का दर्द कम करने में भी सहायक है।
* उत्तानपादासन- पीठ के बल लेटकर पैरों को 30 डिग्री तक उठाया जाता है। इससे मोटापा और मधुमेह कम होता है। इसके अलावा इसमें लोअर लंग्स के फंक्शन बढ़ जाते हैं।
* मार्जरी- इससे गर्दन व मांसपेशियों की स्ट्रेचिंग होती है। गले में खराश, टॉन्सिल्स, बार-बार सर्दी-जुकाम होने की समस्या, खर्राटे और कमर व गर्दन दर्द में कमी हो जाती है।
*शशांकासन- रक्त संचार फेफड़े और मस्तिष्क की तरफ बढ़ता है। इससे मन शांत होता है और फेफड़ों को शक्ति मिलती है। दमा और अस्थमा के निदान में यह लाभकारी है।
* गतिशील धनुरासन- धनुरासन में आकर पेट के बल ही दाएं-बाएं लुढ़का जाता है। इसमें नाभि के आसपास की चर्बी, पेट और हिप्स का एक्स्ट्रा फेट कम होता है। फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है और मांसपेशियों को भी फायदा होता है।