इंदौर। लंबे समय तक कंप्यूटर के सामने बैठकर काम करने की वजह से अधिकांश युवा न सिर्फ बैकपेन, स्पाइनल पेन के शिकार हो रहे हैं बल्कि ओबेसिटी, डायबिटीज जैसी बीमारियों की भी चपेट में आ रहे हैं। बेहतर परफॉर्मेंस और टारगेट पूरा करने की दौड़ में वो शारीरिक रूप से अनफिट हो रहे हैं। बाद में यही उनके परफॉर्मेंस को प्रभावित कर रहा है। डब्लूएचओ ने भी लगातार सिटिंग को लाइफ स्टाइल डिसीसेज को जन्म देने वाला प्रमुख फेक्टर माना है।

जो कर्मचारी फिट रहने के लिए वर्कआउट करना भी चाहते हैं उनके लिए भी समय की कमी के चलते हर दिन जिम जाना, वॉक या एक्सरसाइज करना संभव नहीं होता। इसी के चलते मेट्रो सिटीज में कई कंपनियां अपने कर्मचारियों के लिए कार्पोरेट फिटनेस कार्यक्रम अपना रही हैं। यानी कंपनियों में काम के दौरान ही कर्मचारियों को एक्सरसाइज का समय दिया जाता है। इसके लिए कंपनियां अलग से मेडिकल ऑफिसर और फिटनेस ट्रेनर भी रख रही हैं। उसी तर्ज पर शहर में भी कुछ कंपनियों ने इस तरह के कार्पोरेट फिटनेस कार्यक्रमों की शुरुआत की है। इसमें वर्किंग ऑवर्स में कर्मचारियों के लिए 45 मिनट से एक घंटे की फिटनेस क्लास आयोजित की जा रही है। इसके लिए कर्मचारियों को अलग से कोई फीस नहीं देना है। कंपनी ही सारा खर्च वहन करती है।

शहर की एक बड़ी कंपनी में सुप्रिंटेडेंट मेडिकल ऑफिसर डॉ. अनिरुद्व सिरोठिया के अनुसार देश के अरबन एडल्ट जनसंख्या का एक तिहाई अनफिट हैं। कंपनियों में सीडेंट्री लाइफ स्टाइल की वजह से कर्मचारी हायपर टेंशन, ओबेसिटी, थायराइड, आर्थ्राइटिस जैसी बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। अब कंपनियां यह समझ रहीं हैं कि कर्मचारियों का फिट रहना उनके बेहतर आउटपुट के लिए भी जरूरी है। फिटनेस के साथ ही उनकी डाइट से लेकर साइकोलॉजिकल मोटिवेशन आदि पर काम किया जाता है। सबसे बड़ी समस्या वजन अधिक होना है। उसके लिए कई तरह की एक्टिविटीज करवाते हैं। बीच बीच में ब्रेक देने को भी प्रमोट किया जा रहा है।

दो महीने में दो किलो कम हुआ वजन

सॉफ्टवेयर इंजीनियर दिव्या गुप्ता कहती हैं पिछले दो महीने से कंपनी के फिटनेस कार्यक्रम में हिस्सा लेने के बाद से वजन दो किलो कम हुआ है। इसके अलावा खुद को पहले से ज्यादा फिट और हेल्दी महसूस करती हूं। फिटनेस ट्रेनर रुपाली गुप्ता शहर की 4-5 कार्पोरेट कंपनियों में 45 मिनिट की फिटनेस ट्रेनिंग दे रही हैं। वे बताती हैं बीपीओ से लेकर टेलीकॉम और सॉफ्टवेयर कंपनियों में इस तरह की ट्रेनिंग के लिए उन्हें बुलाया जा रहा है। इसमें वो सिम्पल एक्सरसाइज से शुरू करके जुम्बा, एरोबिक्स आदि सिखाती हैं। रुपाली के अनुसार हर दिन कम से कम 30 मिनट की कोई भी एक्सरसाइज एनर्जी बर्न करने और फिट रहने के लिए जरूरी है।