इंदौर। भाजपा और कांग्रेस ने 'पहले आप' के चक्कर में अभी तक इंदौर लोकसभा क्षेत्र में प्रत्याशी घोषित नहीं किए हैं। आठ बार चुनाव जीत चुकीं सुमित्रा महाजन की नौवीं बार उम्मीदवारी घोषित करने के बजाय संगठन ने टिकट होल्ड पर रखा है। 33 दिन बाद शहर में मतदान होना है। अगले सप्ताह तक दोनों दलों को उम्मीदवार घोषित करना होंगे क्योंकि पर्चा दाखिल करने की अंतिम तारीख 29 अप्रैल है। दोनों ही दलों के नेता तीन-चार दिन में उम्मीदवार तय होने की उम्मीद जता रहे हैं।

ताई के चुनाव नहीं लड़ने के फैसले के बाद कांग्रेस ने नए सिरे से मंथन शुरू कर दिया है। पहले ताई को भाजपा का उम्मीदवार मानकर कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार तय करने की योजना बनाई थी, लेकिन बदले समीकरणों के चलते अब कांग्रेस भाजपा का उम्मीदवार उतारने के बाद अपना उम्मीदवार तय करने के मूड में है। इस देरी से दोनों ही दलों के उम्मीदवारों को चुनाव प्रचार के लिए कम समय मिलेगा।

भाजपा से भी खुलकर नहीं हो रही दावेदारी

ताई को अब तक टिकट नहीं मिलने के बाद भाजपा में कोई दूसरा नेता खुलकर दावेदारी नहीं कर रहा। कैलाश विजयवर्गीय पश्चिम बंगाल की व्यवस्था का हवाला देकर चुनाव नहीं लड़ने के बारे में कह चुके हैं। महापौर मालिनी गौड़ ने भी कभी खुलकर चुनाव लड़ने के बारे में नहीं कहा। चुनाव को लेकर उनका रटारटाया जवाब रहता है कि संगठन जो भी जिम्मेदारी देगा, उसे माना जाएगा।

फैसले पर अडिग रहने के लिए समर्थन करें

दिल्ली से लौटने के बाद रविवार को सिंधी समाज के एक कार्यक्रम में शामिल हुईं लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने कहा कि चुनाव नहीं लड़ने के फैसले के बाद कई लोग उनके पास आए और कहा कि फैसला वापस लो, लेकिन ऐसा नहीं होना चाहिए। आप लोग मेरा समर्थन फैसले पर अडिग रहने के लिए करें।