इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। लोकायुक्त पुलिस ने आईडीए के पूर्व अध्यक्ष मधु वर्मा और तत्कालीन सीईओ सीबी सिंह के खिलाफ पद के दुरुपयोग और षड्यंत्र की धाराओं में केस दर्ज किया है। एसपी दिलीप सोनी ने बताया कि 15 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है, जिनमें एक दंपती, निगम और आईडीए के तीन अधिकारी और निजी संस्था के 8 लोग शामिल हैं।

एसपी ने बताया कि आईडीए की स्कीम 114 पार्ट 2 के पास छत्रपति गृह निर्माण सहकारी संस्था की जमीन थी। संस्था के कर्ताधर्ताओं ने वर्ष 2005 में इस जमीन में से तीन प्लॉट (4000 वर्गफीट) गलत तरीके से सोसायटी के सदस्य फैजल इब्राहिम को आवंटित कर दिए थे। जब आईडीए की स्कीम की घोषणा हुई तो फैजल के प्लॉट इसमें आ गए। नियमानुसार फैजल के प्लॉट का समन्वय आईडीए को करना था। फैजल ने सीधे आईडीए में आवेदन किया और तत्कालीन पदाधिकारियों ने नियम विरुद्ध फैजल को चार प्लॉट आवंटित कर दिए।

2009 में फैजल की पत्नी अमीरा ने आवासीय और वाणिज्यिक मिश्रित निर्माण कर नगर निगम के बिल्डिंग ऑफिसर से अनुमति ले ली। इस तरह सबने मिलकर षड्यंत्र रचकर अपराध किया जिससे शासन को हानि हुई। एसपी के मुताबिक मंगलवार को एक टीम ने संस्था के राजमोहल्ला स्थित कार्यालय से दस्तावेज एकत्रित किए हैं। इसके अलावा तत्कालीन प्रबंधक लक्ष्मण सुर्वे के घर भी तलाशी ली गई।

ये हैं आरोपी

मधु वर्मा (तत्कालीन आईडीए अध्यक्ष), सीबी सिंह (तत्कालीन आईडीए सीईओ), सीएल रखया व पीसी जैन (दोनों तत्कालीन संपदा अधिकारी आईडीए), अशोक शर्मा (तत्कालीन भवन अधिकारी नगर निगम), पवन कुमार (तत्कालीन अध्यक्ष, छत्रपति नगर गृह निर्माण सहकारी संस्था), मंगेश जैन, राजेंद्र जैन, शीला मोहन कुमार, किशनलाल कलोता, कैलाशचंद्र गुप्ता व अब्दुल करीम (सभी तत्कालीन संचालक, छत्रपति नगर गृह निर्माण सहकारी संस्था), लक्ष्मण सुर्वे (तत्कालीन प्रबंधक, छत्रपति नगर गृह निर्माण सहकारी संस्था), प्लॉट मालिक फैजल इब्राहिम और उसकी पत्नी अमीरा।

अपना पक्ष रखेंगे

मामला काफी पुराना है। मुझे तो प्रकरण भी याद नहीं है। प्लॉट नियम विरुद्ध नहीं दिए जा सकते हैं। प्रकरण की जानकारी निकालवाई जा रही है। संबंधित विभाग के समक्ष पक्ष रखा जाएगा। - मधु वर्मा, तत्कालीन आईडीए अध्यक्ष

बढ़ सकती हैं मुश्किलें

वर्षों पुराने केस की फाइल खोलकर वर्मा के खिलाफ दर्ज हुए प्रकरण के मामले में अलग-अलग राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। वर्मा राऊ विधानसभा क्षेत्र से टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। इसके लिए उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक विकास निगम का पद भी ठुकरा दिया है। पहले उनका नाम आईडीए अध्यक्ष पद के लिए भी तेजी से चला था। चुनावी साल में लोकायुक्त केस उनकी मुश्किलें बढ़ा सकता है।