इंदौर, नईदुनिया रिपोर्टर। चाहे मंजिल कितनी भी मुश्किल क्यों न हो, लेकिन मजबूत इरादों और दृढ़ इच्छाशक्ति के चलते सब कुछ आसान हो जाता है। यह साबित किया है शहर के मधुसूदन पाटीदार ने। जिन्होंने मई में एवरेस्ट पर फतह करने के बाद एक बार फिर भारत का नाम रोशन किया है। इस बार मधुसूदन ने अफ्रीका महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलमिंजारो पर फतह की है। इस तरह वे वेस्टर्न साइड से 5895 मीटर ऊंची चोटी पर फतह करने वाले विश्व के सबसे कम उम्र के पर्वतारोही बन गए हैं।

मधुसूदन ने 15 दिसंबर को माउंट किलमिंजारो पर चढ़ाई शुरू की थी और अपनी यात्रा 70 घंटों में पूरी कर वे 18 दिसंबर को सुबह 10 बजे किलमिंजारो पर पहुंचने में सफल हुए। मधुसूदन ने बताया कि वेस्टर्न साइड से जाने की रिस्क बहुत कम लोग लेते हैं, लेकिन मैं हमेशा से ही कुछ अलग करना पसंद करता हूं। इसलिए मैंने यह रास्ता चुना। यह रास्ता छोटा लेकिन मुश्किल है। मधुसूदन पहले पर्वतारोही हैं जो किलमिंजारो पर टेंट लगाकर 22 घंटे तक रुके। साथ ही वे सबसे जल्दी किलमिंजारो पर चढ़ाई करने वाले पर्वतारोही बन गए हैं।

एवरेस्ट पर जाने से आसान है किलमिंजारो पहुंचना

मधुसूदन अपने अनुभव शेयर करते हुए कहते हैं एवरेस्ट पर चढ़ाई करने से काफी आसान है माउंट किलमिंजारो पर जाना। यहां एवरेस्ट जितनी ठंड नहीं है, लेकिन अचानक मौसम बदल जाने से हवा चलने लगी और हमें कुछ समय के लिए चढ़ाई रोकनी पड़ी। इस दौरान टेंट लगाने में भी काफी परेशानी आई। एक समय ऐसा भी आया जब कोहरे की वजह से कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। एवरेस्ट पर पहुंचने में मुझे दो महीने से अधिक का समय लगा था, लेकिन माउंट किलमिंजारो की यात्रा मैंने तीन दिन में ही पूरी कर ली।

फंड जुटाने में हुई परेशानी

मई में एवरेस्ट पर फतह करने के बाद से ही मधुसूदन लगातार किलमिंजारो पर जाने के प्रयास कर रहे थे, लेकिन उसमें आने वाले खर्च के चलते उन्हें कई बार अपनी यात्रा को टालना पड़ा। मधुसूदन ने कहा कि निम्न मध्यमवर्गीय परिवार से होने की वजह से इस चढ़ाई के लिए पैसों का इंतजाम करना बहुत मुश्किल था। हालांकि माता-पिता, रिश्तेदारों और दोस्तों ने इसमें पूरा सहयोग दिया।

अगला टारगेट ऑस्ट्रेलिया

मधुसूदन एक साल के भीतर विश्व के हर महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी पर फतह करना चाहते हैं। एवरेस्ट और माउंट किलमिंजारो के बाद अब ऑस्ट्रेलिया की सबसे ऊंची चोटी पुंकाक जया पर जाने की तैयारी में हैं। मधुसूदन ने छह साल का बेसिक माउंटेनियरिंग इंजीनियरिंग कोर्स कश्मीर के जेआईएम से भारतीय आर्मी ट्रेनर्स के साथ और एडवांस माउंटेनियरिंग कोर्स दार्जिलिंग से किया है। कई माउंटेनियरिंग कैंप्स में कोच के रुप में काम कर चुके हैं और कई रेस्क्यू कार्यक्रमों में भी हिस्सा ले चुके हैं। भारत, नेपाल और भूटान में कई नेचर स्टडी कैंप्स आयोजित कर चुके हैं।