इंदौर। अपनी आध्यात्मिक विचारधारा से देश-दुनिया में लोगों को शांति और सुकूनभरी जिंदगी का संदेश देने वाले भय्यू महाराज को अंतिम विदाई दे दी गई। उनको अंतिम विदाई देने के लिए देश के कई हिस्सों से भक्त इंदौर आए थे। मध्य प्रदेश से ज्यादा उनके अनुयायियों की संख्या महाराष्ट्र में है। महाराष्ट्र की राजनीति में उनका खासा दखल भी था और सभी दलों के नेता उनका आदर करते थे। विवादित मुद्दों पर उनकी सलाह ली जाती थी और उनकी बात को खास तवज्जो भी दी जाती थी।

एक बार जब महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल आया था और बाल ठाकरे के वक्त कांग्रेस सरकार के तख्तापलट की पुरजोर कोशिश हुई तो उस वक्त के महाराष्ट्र के सीएम विलासराव देशमुख अपने मंत्रियों और विधायकों को लेकर भय्यू महाराज के आश्रम में डेरा डालने आ गए थे। भय्यू महाराज की छत्रछाया में विलासराव देशमुख अपने दल-बल के साथ कुछ समय तक रहे और अपनी सत्ता बचाने में कामयाब रहे।

मंगलवार को जैसे ही उनके देहवसान की खबर आश्रम से निकलकर देश- विदेश में पहुंची। उनके अनुयायियों ने इंदौर प्रस्थान करना शुरू कर दिया।

पंकजा मुंडे व रामदास आठवले पहुंचे

आज केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले भय्यू महाराज को श्रद्धांजलि देने के लिए आए और उन्होने कहा कि ' बाबा साहब आम्बेडकर के प्रति भय्यू महाराज की अगाध श्रद्धा थी उनके असामयिक निधन से देश को क्षति हुई है।' सांसद पंकजा मुंडे ने आश्रम पहुंचकर भय्यू महाराज को श्रद्धांजलि अर्पित की। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भय्यू महाराज को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि ' भैय्यू जी महाराज के द्वारा आत्म हत्या करने के समाचार सुन कर विश्वास नहीं हुआ। वे नेक धार्मिक इंसान थे। मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि उन जैसा व्यक्ति आत्म हत्या कर सकता है।

इसके अलावा भय्यू महाराज को श्रद्धांजलि देने वालों में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनिस के ओएसडी श्रीकांत, विधायक रमेश मेंदोला, महेन्द्र हार्डिया, कांग्रेस नेत्री शोभा ओझा, कलेक्टर निशांत वरवड़े, डीआईजी हरिनारायण चारी मिश्र सहित कई गणमान्य नागरिक शामिल थे।