इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। हैदराबाद की मक्का मस्जिद में 18 मई 2007 को हुए बम विस्फोट मामले में बरी किए गए पांच में से चार आरोपित इंदौर और आसपास के क्षेत्र के हैं। इंदौर के रामजी कालसांगरा और संदीप डांगे का तो विस्फोट के बाद से अब तक पता नहीं चला है। वहीं महू के संघ प्रचारक सुनील जोशी की हत्या हो चुकी है।

रामजी कालसांगरा : इंदौर के बंगाली चौराहा क्षेत्र में रहने वाले रामजी कालसांगरा का नाम सबसे पहले मालेगांव बम ब्लास्ट में आया था। इसके अलावा मक्का मस्जिद ब्लास्ट और समझौता एक्सप्रेस धमाके में भी उसे आरोपित बनाया गया है, लेकिन एनआईए, एटीएस सहित अन्य जांच एजेंसियां अब तक उसका पता नहीं लगा सकी है।

रामजी का परिवार आज भी बंगाली चौराहा क्षेत्र में रहता है। संदीप डांगे- इंदौर के लोकमान्य नगर में रहने वाले संदीप डांगे का नाम भी समझौता ब्लास्ट और हैदराबाद की मक्का मस्जिद धमाकों में आया था। उस पर 10 लाख रुपए का इनाम घोषित है। वह भी आज तक फरार है। पेशे से इंजीनियर डांगे को एटीएस और एनआईए धमाकों का मास्टर माइंड बताती रही है।

राजेंद्र चौधरी : देपालपुर के धाकरसेरी में रहने वाला चौधरी पेशे से किसान है। सबसे पहले मालेगांव धमाकों में नाम आया था। धमाके मामले में जांच की कड़ियां जोड़ने में जुटी एनआईए ने अन्य मामलों में भी चौधरी की भूमिका बताते हुए इसे बड़नगर तहसील के एक गांव से गिरफ्तार किया। तब से वह जेल में था।

लोकेश शर्मा : महू के लोकेश शर्मा को हैदराबाद ब्लास्ट मामले में बरी कर दिया गया। शर्मा के परिवार ने मिठाइयां खिलाकर एक-दूसरे को बधाई दी। शर्मा फिलहाल समझौता ब्लास्ट के मामले में अंबाला जेल में बंद है।