उदय प्रताप सिंह, इंदौर। इंदौर सहित प्रदेशभर में कहीं शीतलहर, कहीं कोहरे का कहर है तो कहीं इससे राहत है। तीन-चार दिन में हो रहे मौसम में बदलाव का हाल जानने के लिए लोग जब भोपाल मौसम केंद्र की वेबसाइट पर सर्च कर रहे हैं तो लगता है उस पर 'कोहरा' छाया हुआ है। वेबसाइट छह-सात माह से बंद है। मौसम केंद्र के अफसरों के मुताबिक वेबसाइट को अपडेट और इसकी सिक्युरिटी ऑडिट के लिए इसे 'पब्लिक डोमेन' से हटा दिया गया है। सवाल यह खड़ा हो रहा है कि उक्त काम में इतना समय क्यों लग रहा है।

मौसम विभाग हर दो साल में अपनी वेबसाइट का सिक्युरिटी ऑडिट करवाता है। इसका जिम्मा चेन्नई की प्राइवेट एजेंसी को दिया गया है। छह माह में वेबसाइट पर दो बदलाव किए गए हैं। उसके बाद अभी तक पहले स्तर पर इसकी मंजूरी मिली है। अभी एजेंसी की ओर से दूसरे स्तर से मंजूरी बाकी है। जानकारों के मुताबिक मौसम केंद्र भोपाल के पास तकनीकी स्टाफ और सर्वर नहीं है। इसी कारण वेबसाइट शुरू नहीं की जा सकी।

किसानों के लिए जरूरी

प्रदेश में आज भी मौसम केंद्र की भविष्यवाणी के आधार पर कृषि विभाग किसानों को फसलों के संबंध में सूचना देता है। इसके अलावा ट्रेन, बस व हवाई यात्रा करने वाले यात्री भी सफर से पहले मौसम का हाल जानते हैं। ऐसे में जानकारी न मिलने से वे परेशान हैं। मौसम विभाग केंद्र के अफसरों के मुताबिक वेबसाइट का संचालन अभी भोपाल केंद्र के कर्मचारी ही करते थे। नई व्यवस्था के तहत शासन की सभी वेबसाइट को एनआईसी के सर्वर पर शिफ्ट किया जाना है।

नागपुर के वेबसाइट पर देख सकते हैं

वेबसाइट को सितंबर से पब्लिक डोमेन से हटाया है। अभी आम लोगों के लिए मौसम का पूर्वानुमान, अपडेशन संबंधी डेटा और मप्र के मौसम से जुड़ी सारी जानकारी अभी क्षेत्रीय मेट्रोलॉजी सेंटर नागुपर की वेबसाइट पर डाली जा रही है। किसी को प्रदेश के मौसम का हाल जानना है तो उस पर देख सकता है। ममता यादव, प्रभारी डायरेक्टर, मौसम केंद्र भोपाल

एक माह में शुरू होगी

साइबर अटैक संबंधी खतरों को देखते हुए ऐसा करना जरूरी होता है। वेबसाइट के पेज पर कई बदलाव भी किए जा रहे हैं। एक माह में यह वेबसाइट शुरू हो जाएगी। जेआर प्रसाद, डिप्टी डायरेक्टर जनरल ऑफ मेट्रोलॉजी, रीजनल मेट्रोलॉजी सेंटर नागपुर