इंदौर। मैं 600 किलोमीटर दूर से इंसान की इंसानियत से पहचान कराने तथा ईंट-चूने के भवन को मंदिर बनाने आया हूं। आज यहां मौजूद जनमानस को देखकर साबित हो गया है कि उनका देवशास्त्र और गुरु के प्रति पूर्ण समर्पण है। इंदौर के समाज की गुरु और संत आस्था प्रशंसनीय है। युवा पीढ़ी को भटकाव से रोकने के लिए संतों के सान्निाध्य की आवश्यकता है। नववर्ष की पहली किरण के साथ युवा अपने जीवन में सद्मार्ग के लिए उमंग लेकर आएं।

यह बात मुनि पुलकसागरजी महाराज ने रविवार को नृसिंह वाटिका एरोड्रम रोड पर कही। वे मंगल प्रवेश के बाद आयोजित धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे। इससे पूर्व मंगल प्रवेश जुलूस हर्षोल्लास के साथ एरोड्रम थाने के सामने से निकाला गया। यहां 21 थालों से उनका पाद प्रक्षालन हुआ।

जुलूस मार्ग में जगह-जगह फूल बरसाकर व पाद प्रक्षालन कर मुनिश्री की अगवानी की गई। मुनिश्री द्वारा चलाए जा रहे सेवा कार्यों की झांकी भी आकर्षण का केंद्र थी। जुलूस में 20 से अधिक महिला संगठन शामिल हुए। अभा पुलक जनचेतना मंच के अध्यक्ष प्रदीप बड़जात्या, मीना झांझरी, दिलीप पाटनी, महेंद्र निगोत्या, कैलाश लुहाड़िया, अनामिका बाकलीवाल आदि मौजूद थे। -नप्र