इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। इंदौर नगर निगम अपनी मालिकी के बोरिंग में लगी 5500 मोटरों को बिना पैसा खर्च किए बदलवाएगा। पुरानी मोटरों की जगह नई एनर्जी एफिशिएंट मोटरें लगवाएगा, जो कम बिजली में चलेंगी। ये मोटरें निगम द्वारा शहरभर में अलग-अलग जगह करवाए गए बोरिंग में लगी हैं। जो कंपनी ये मोटरें लगवाएगी, वही 10 साल तक उनका मेंटेनेंस भी करेगी। इसके बदले बिजली बचत की राशि का तय हिस्सा निगम को ठेका लेने वाली कंपनी को देना होगा। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई तो संभवतः फरवरी अंत तक मोटरें बदलने का काम शुरू होगा।

निगम ने योजना के लिए मोटर बनाने वाली कंपनियों से प्रस्ताव मांगे हैं। ये मोटरें कॉलोनियों, बगीचों और बस्तियों के बोरिंग में लगेंगी। अफसरों ने बताया कि अभी निगम का सालाना बिजली बिल 22 करोड़ रुपए आता है। जो कंपनी मोटरें बदलने का ठेका लेगी, वह उनका मेंटेनेंस भी करेगी। इस तरह निगम को मोटरों के मेंटेनेंस पर राशि खर्च नहीं करना पड़ेगी। मोटरें लगने के बाद बिजली के बिल में जितनी कटौती होगी, उसका कुछ हिस्सा कंपनी और कुछ हिस्सा निगम के खाते में जाएगा।

इस तरह दोनों पक्षों को फायदा होगा और निगम को तो तिगुना फायदा होगा। निगमायुक्त आशीष सिंह की मंजूरी के बाद निगम जलकार्य विभाग ने कंपनियों से प्रस्ताव मांगे थे और इसमें एक कंपनी ने रुचि भी ली है। जल्द ही कंपनी के ऑफर का परीक्षण कर उसे मोटरें बदलने का काम सौंपा जाएगा। फिलहाल निगम ने तकनीकी निविदाएं खोली हैं और वित्तीय निविदाएं जल्द खोली जाएंगी। तब पता चलेगा कि कंपनी ने बचत की राशि में से कितने प्रतिशत राशि लेने का ऑफर दिया है।

बोरिंग से मिलता है 20 एमएलडी पानी

अफसरों का कहना है कि न केवल शहर में बल्कि पूरे प्रदेश में अपनी तरह का यह पहला प्रयोग है। शहर के बोरिंगों में अलग-अलग क्षमता की हजारों छोटी-बड़ी मोटरें लगी हुई हैं। इनमें से कई बेहद पुरानी हो चुकी हैं जो बार-बार खराब होती हैं। कई कॉलोनियों में जलप्रदाय इन्हीं बोरिंग से होता है। यहां तक कि बोरिंग से शहर को रोज 20 एमएलडी पानी की आपूर्ति होती है। इसके अलावा बगीचों में पानी का छिड़काव भी इन्हीं बोरिंग से होता है। बार-बार मोटरें जलने या अन्य खराबी आने से न केवल जनता को जलापूर्ति प्रभावित होती है बल्कि निगम को लगातार उनके मेंटेनेंस पर तगड़ा खर्च करना पड़ता है।

बिल में 25-30 प्रतिशत तक कमी आने का अनुमान

फिलहाल निगम का बिल 22 करोड़ आता है। अनुमान है कि नई एनर्जी एफिशियंट मोटरों से इसमें 25 से 30 प्रतिशत तक की कमी आएगी। निगम को यह फायदा तो होगा ही, बिना खर्च के सारी मोटरें नई हो जाएंगी। तीसरा फायदा यह है कि 10 साल तक निगम को मोटरों का मेंटेनेंस नहीं करना होगा। जल्द ही प्रस्ताव को विधिवत रूप से स्वीकृति देंगे। - आशीष सिंह, निगमायुक्त