उदय प्रताप सिंह, इंदौर। मां की कोख से जब वो मासूम दुनिया में आई तो उसे ये रंग-बिरंगी दुनिया नहीं, अलमारी का अंधेरा और बंद कमरा देखने को मिला। जन्म के बाद से अब तक दूसरों की गोद में ही खेली उस नन्हीं सी जान को मां के दूध और उसकी गोद का इंतजार है। इस धरती पर आए उसे 40 दिन हो गए हैं लेकिन अब तक उसे पहचान नहीं मिल पाई और न ही कोई नाम। अस्पताल के कागजों में भी उसकी पहचान है अनाथ नंबर 2/19। मासूम की पहचान के लिए अब उसका डीएनए टेस्ट होना है। इसके बाद ही शायद उसे अपनी मां के आंचल की छांव मिल पाए।

चंदन नगर स्थित पन्नी कारखाने की अलमारी से जब दो दिन की मासूम पुलिस को मिली थी तो न तो इसकी मां का पता था और न ही पिता। इसके बाद जब पुलिस ने जांच की तो यह बात सामने आई कि कारखाने के चौकीदार की नाबालिग बेटी के उसके मामा के नाबालिग लड़के से संबंध थे। इसके कारण ही 1 फरवरी को इस मासूम का जन्म हुआ। बच्ची के जन्म के बाद नाबालिग मां ने मासूम को अलमारी में छिपा दिया। इसके बाद चंदन नगर पुलिस के संज्ञान में यह बच्ची आई।

एमवायएच की नर्स व आया ने रखा ख्याल, नाम दिया- पिंकी : 4 फरवरी को जब इस नन्हीं मासूम को एमवायएच की नर्सरी में लाया गया था, तो यह महज तीन दिन की थी। उस समय इस मासूम को हॉस्पिटल के रिकॉर्ड में अनाथ नंबर 2/19 के नाम से दर्ज किया गया। तब से लेकर 33 दिन तक एमवायएच में इस मासूम को यहां की नर्स हिमाली शर्मा, राखी साल्वे व आया ममता चंद्रावत ने ही मां की तरह प्यार व दुलार दिया। नर्स हिमाली शर्मा बताती हैं कि मैं उसे प्यार से पिंकी नाम से बुलाती थी। कुछ साथी उसे बिट्टी भी पुकारते थे। हम सुबह आठ बजे उसे नहलाते थे। मासूम पिंकी को गर्म व मीठा दूध ही पसंद था। रात को दूध पीने के बाद भी जब तक उसे गोद में लेकर नहीं घुमाते थे, उसे नींद नहीं आती थी। 8 मार्च को एमवायएच की नर्सरी से यह मातृछाया आश्रयगृह में पहुंची। हॉस्पिटल के डॉ. पुष्पेंद्र चौकीकर बताते हैं कि जब वो मासूम आई थी, तब उसका वजन 1 किलो 800 ग्राम था लेकिन जब वो यहां से गई, तब उसका वजन 2 किलो 700 ग्राम था।

चार दिन से मातृछाया में मिला नवजात बिटिया को आसरा : पिछले चार दिन से यह मासूम निराश्रित बच्चों के आश्रय स्थल 'मातृ छाया' में है। फिलहाल आया बाई इस मासूम का ख्याल रख रही है और उसकी देखरेख कर रही है। संस्था में स्वयंसेविका के तौर पर काम कर रही सुमित्रा मिश्रा के अनुसार वे मासूस का विशेष ख्याल रख रही हैं। इसके आसपास एक आया जरूर रहती है। दिन में यह दूध पीकर सोती है और रात में रोती है। ऐसे में एक आया उसे गोद में लेकर सुलाती है।

मां-बाप की पहचान के लिए मासूम का होगा डीएनए टेस्ट

बच्ची घर की अलमारी में मिली। उसके मां-बाप की प्रथम दृष्ट्या पहचान हो पाई है लेकिन वास्तव में दोनों नाबालिग उसके मां-बाप है या नहीं, इसकी पुष्टि करने के लिए उसके साथ बच्ची का भी डीएनए टेस्ट होना है। इसी कारण 40 दिन में नन्हीं बच्ची को उसकी नाबालिग मां से मिलने भी नहीं दिया गया। अब डीएनए टेस्ट से उसकी मां व पिता डीएनए से मिलान होगा। उसके बाद ही बच्ची को मां को सौंपा जाएगा। एमवायएच में इस मासूम का 6 मार्च को डीएनए सैम्पल लिया गया था।

नाबलिग के पिता ने मासूम को मांगा

5 मार्च को नाबालिग बालिका के माता-पिता ने नवजात को लेने के लिए हमारे पास आवेदन दिया है। इस मामले में विधिक राय ले रहे हैं कि डीएनए का उसके माता-पिता से मिलान हो जाए तो उसे किस परिस्थिति में दिया जाए? - माया पांडे, अध्यक्ष,बाल कल्याण समिति

डीएनए सैम्पल भेजा

नाबालिग मां के अलावा आरोपी नाबालिग पिता का डीएनए कराने का ड्राफ्ट बनाकर भेज दिया है। बच्ची के डीएनए मिलान के लिए ब्लड सैम्पल भेजा था लेकिन ड्राफ्ट में कमी के कारण सैम्पल पहुंचाने में समय लग गया। यदि डीएनए की जांच के लिए पुन: बच्ची का सैम्पल मांगेंगे तो फिर से सैम्पल पहुंचाया जाएगा। -राहुल शर्मा थाना प्रभारी चंदन नगर