इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। पाकिस्तान से आई मूक-बधिर गीता से शादी करने की इच्छा रखने वाले लड़कों की फेहरिस्त लंबी होती जा रही है। रविवार को सांवेर तहसील के पास स्थित गांव से एक पंडितजी गीता से शादी का प्रस्ताव लेकर पहुंचे। वे गीता से मिलना चाह रहे थे लेकिन शासन की सुरक्षा नीति का हवाला देकर उन्हें रोक दिया गया।

ग्राम खाकरोड़ के महेशदास वैष्णव अपना बायोडेटा लेकर विजय नगर स्थित आनंद मूक-बधिर सोसायटी पहुंचे। धोती-कुर्ता, गले में पीतांबर, माथे पर तिलक। हर कोई उन्हें आश्चर्य से देख रहा था। उन्होंने इशारों में गीता से शादी करने की बात कही। महेशदास गांव के सात मंदिरों के पुजारी हैं और 10 हजार रुपए महीना कमाते हैं। वे अपने भाई के साथ आए थे।

उन्होंने कहा कि मीडिया में गीता के बारे में इतना देख सुनकर उससे मिलने और विवाह करने की इच्छा जाग गई। उन्हें मूक-बधिर लड़की से ही शादी करना है। वे गीता से मिलने के लिए जिद करने लगे तो समझाया गया कि विदेश मंत्रालय की अनुमति के बिना मिलना संभव नहीं है। उनसे पूछा गया कि गीता ने पसंद नहीं किया तो क्या करेंगे। इस पर उन्होंने कहा कि पसंद नहीं किया तो कोई बात नहीं। किसी और मूक-बधिर लड़की से शादी कर लेंगे।

एक दर्जन से ज्यादा आ चुके प्रस्ताव

गीता दो साल से स्कीम-71 स्थित मूक-बधिर संगठन में रह रही है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के आदेश पर गीता की शादी के लिए दूल्हा तलाशने का सिलसिला शुरू हुआ है। अब तक एक दर्जन से ज्यादा लड़कों के प्रस्ताव आ चुके हैं। यह पहला मामला है जिसमें कोई उम्मीदवार खुद बायोडेटा लेकर मिलने पहुंचा।