इंदौर। नाबालिग छात्र नकली पेटीएम( Spoof Paytm) के जरिए बिल चुकाकर रेस्टोरेंट संचालक को धोखा दे रहे थे। विजय नगर और स्कीम 74 के कुछ रेस्टोरेंट में ऐसी धोखाधड़ी हुई है। कई बार ठगे जाने पर एक रेस्टोरेंट संचालक ने सायबर सेल में शिकायत की। इसके बाद टीम ने छात्रों को पकड़ लिया। हालांकि उनके भविष्य को देखते हुए संचालक ने उन्हें माफ कर दिया।

सेल ने परिजन को हिदायत देकर बच्चों को छोड़ दिया। हालांकि सायबर सेल ने इसे लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को पत्र लिखा है। पेटीएम के नकली वर्जन केस की जांच करने वाले साइबर सेल के एसआई आशुतोष मिठास ने बताया कि यह शहर का पहला केस है, जहां ऐसी तकनीक का उपयोग कर घटना को अंजाम दिया है। रेस्टोरेंट व बेकरी संचालकों के साथ ज्यादा धोखाधड़ी हुई है।

सत्यसाईं चौराहा स्थित रेस्टोरेंट संचालक ने शिकायत की थी। उन्होंने बताया था कि आठवीं से दसवीं तक पढ़ने वाले 10-11 बच्चे उसके रेस्टोरेंट में नाश्ता करने आते थे। नाश्ता करने के बाद वे बोलते थे कि उनके पास पैसे नहीं है, पेटीएम से पेमेंट करेंगे। कई बार रेस्टोरेंट संचालक ने कहा कि पैसे खाते में नहीं आए तो वे बोलते कि सर्वर में प्रॉब्लम होगी, कुछ देर बाद आ जाएंगे। आठ से दस बार जब यह घटना हुई तो बच्चों को पहचानकर उन्होंने पुलिस को सूचना दी। सायबर सेल ने बच्चों को पकड़ा। परिजन को खबर की तो वे थाने पहुंचे।

स्क्रीन शॉट बताकर चले जाते हैं

व्यापारियों के मुताबिक, यह फर्जीवाड़ा खासकर छात्रों द्वारा किया जाता है, जो बाहर से आते हैं। वे 100-500 से लेकर 1000-1500 तक का खाने-पीने का सामान मंगवाते हैं। पेटीएम से भुगतान करते वक्त अपने मोबाइल का स्क्रीन शॉट बताते हैं, जिसमें ग्रीन लाइन के जरिए यह नजर आता है कि खाते में रुपए ट्रांसफर हो गए हैं। संचालक भी संतुष्ट हो जाते हैं, लेकिन वास्तव में भुगतान होता ही नहीं है। कुछ रेस्टोरेंट में तो छात्रों ने पार्टी दी और फर्जी पेमेंट कर चलते बने।

पेटीएम वॉलेट चेक कर बरतें सावधानी

सायबर एसपी सिंह ने बताया कि इस फेक पेटीएम का नाम स्पूफ पेटीएम ( Paytm) है। यह गूगल प्ले स्टोर पर नहीं मिलेगा। इस ऐप की फाइल कई वेबसाइट पर मौजूद है। जहां से लोग इसे डाउनलोड कर रहे हैं। इससे बचने का यही तरीका यही है कि सबसे पहले अपना पेटीएम वॉलेट की जांच करें कि उसमें पैसा आया है या नहीं। वरना आपके साथ फ्रॉड हो सकता है।

असली पेटीएम जैसी है प्रक्रिया

डमी पेटीएम हूबहू असली पेटीएम( Paytm) की तरह होता है। उसकी पेमेंट की प्रक्रिया भी एक जैसी है। दुकान संचालक का नंबर डालते ही उसका नाम भी शो होने लगता है। उसके बाद राइट टिक ब्लू रंग का भी हो जाता है।

पुलिस को दें सूचना

पेटीएम का कोई नकली वर्जन आया है तो यह खतरा है। यह पेटीएम की छवि को खराब कर सकता है। हम कानूनी सलाहकारों से परामर्श कर एक्शन लेंगे। दुकान संचालक भी अलर्ट रहें। कहीं कोई गड़बड़ होती है तो पुलिस को सूचना दें। हम जनता से जुड़ी समस्या और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बेहतर प्रयास करेंगे।

- शुभम सिंह नेगी, पेटीएम के नोडल अधिकारी, मध्यप्रदेश

पत्र लिखकर दी सूचना

मौज मस्ती में छात्रों द्वारा किया जा रहा यह मामला किसी संगठित सायबर अपराध में तब्दील न हो जाए, इसलिए हमने इसकी सूचना इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को पत्र लिखकर दे दी है। इसमें नकली वर्जन को बंद करने की मांग की गई है।

- जितेंद्र सिंह, एएसपी, सायबर सेल