इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। सराफा बाजार में सोना और जेवर लेकर भागने की कई घटनाएं हो चुकी हैं, इसके बाद भी पश्चिम बंगाल से आने वाले कारीगरों की जानकारी पुलिस के पास नहीं है। तीन साल पहले बंगाली एसोसिएशन ने पुलिस को शहर आने वाले करीब 10 हजार कारीगरों की जानकारी दी थी। अब तक दो गुना से ज्यादा कारीगर और कारोबारी आ चुके हैं। डेढ़ महीने पहले पुलिस ने इनकी जानकारी एकत्र करने के लिए सराफा के व्यापारियों को पत्र लिखा है।

पिछले कुछ वर्षों में कई बार बंगाली कारीगर सोनाचांदी लेकर भाग चुके हैं। कुछ ही मामलों की शिकायत होती है। लेकिन पुलिस उनमें भी कभी ठोस कार्रवाई नहीं करती। सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष हुकुम सोनी के मुताबिक सराफा बाजार में छोटी-बड़ी मिलाकर दो हजार से ज्यादा दुकान हैं। इनमें पांच हजार से ज्यादा कर्मचारी काम कर रहे हैं।

एक हजार से ज्यादा बंगाली कारीगर बड़े व्यापारियों के लिए कारखाने में काम करते हैं। वहीं अन्य दुकानों का काम करने वाले बंगाली कारीगरों की संख्या करीब 25 हजार हैं। लेकिन पिछले तीन साल में एक बार भी इनकी जानकारी पुलिस ने इकट्ठा नहीं की। तीन दिन पहले ही गजेंद्र कॉम्प्लेक्स में काम करने वाला बंगाली कारीगर शंभु कारखाने से दो सौ ग्राम सोना लेकर भाग गया। पुलिस का दावा है कि ऐसी कोई शिकायत उसके पास नहीं पहुंची है।

बंगाली एसोसिएशन भी नहीं रखता जानकारी : सोनी के मुताबिक कारीगर कुछ दिन तक काम करते हैं फिर मौका देखकर सोना लेकर भाग जाते हैं। बंगाली कारीगरों की एक दर्जन से ज्यादा शिकायतें थाने पर की गई हैं। 50 से ज्यादा व्यापारी ऐसे भी हैं जो पुलिस कार्रवाई में नहीं पड़ना चाहते, इसलिए कभी शिकायत नहीं की। 1 साल पहले एक बंगाली कारीगर 5 किलो सोना लेकर भाग गया था। पुलिस उसे पकड़ने गांव भी गई थी। पुलिस आरोपित के जिस साढ़ू भाई को लेकर गई थी, गांव वालों ने उसकी हत्या कर दी थी।

बंगाली कारीगर संगठित गिरोह की तरह काम करते हैं। बंबई, सूरत, अहमदाबाद और इंदौर जैसे महानगरों में इनकी संख्या हजारों में है। बंगाली एसो. कारीगरों की जानकारी नहीं रखता जबकि उनके भरोसे कारोबारी उन्हें नौकरी पर रख लेते हैं। बंगाली एसोसिएशन के सचिव म्रिगेंद्र सामंत के मुताबिक 3 साल पहले उन्होंने बंगाल से आने वाले कारीगरों की सूची बनाकर पुलिस को सौंपी थी। इसके बाद कभी इनकी गिनती नहीं की गई। सोना-चांदी लेकर भागने के बाद आरोपित कभी अपने गांव नहीं जाते।

पत्र लिखकर मांगी जानकारी : टीआई सराफा अविनाश सिंह सेंगर के मुताबिक पुलिस ने सभी दुकानदारों को पत्र लिखकर कर्मचारियों और कारीगरों की जानकारी मांगी थी। कुछ ही व्यापारियों ने जानकारी दी है। व्यापारियों के सहयोग के बिना बंगाली कारीगरों की जानकारी मिल पाना कठिन है।