इंदौर। पौने तीन साल पहले हुए कविता रैना हत्याकांड में आरोपी महेश बैरागी को सेशन कोर्ट ने शुक्रवार को बरी कर दिया। बताया जाता कि सबूतों के अभाव में बैरागी को बरी किया गया है। यह फैसला सुनते ही कोर्ट परिसर में मौजूद कविता के परिजनों में खासा आक्रोश देखा गया। अब इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की जा सकेगी। फैसला सुनने के बाद कविता के पति और मां सहित अन्‍य परिजन खासे दुखी नजर आए।

अभियोजन ने इस प्रकरण में 41 गवाहों के बयान कराए। करीब एक महीने तक सेशन कोर्ट ने प्रकरण में रोजाना अंतिम बहस सुनी। शुक्रवार को सेशन जज बीके द्विवेदी ने प्रकरण में फैसला सुनाया। कोर्ट ने माना कि अभियोजन आरोप सिद्ध करने में पूरी तरह से नाकामयाब रहा। पुलिस की जांच में कई खामियां हैं।

कविता रैना हत्‍याकांड : 6 टुकड़ों में पत्‍नी का शव देखकर बेहोश गया था पति

बैरागी पर आरोप था कि उसने कविता को मौत के घाट उतारने के बाद शव के 6 अलग-अलग टुकड़े कर दिए थे। मृतका के गायब होने के दो दिन बाद ये टुकड़े नवलखा क्षेत्र में नाले में मिले थे। इस चर्चित हत्याकांड के करीब ढाई महीने बाद पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार किया था। इसके बाद से वह जेल में है।

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मित्रबंधु नगर में रहने वाली कविता रैना 24 अगस्त 2015 को स्कूल से लौट रही बेटी को लेने के लिए बस स्टैंड पर जा रही थी। तभी वह गायब हो गई। बाद में उसका शव नौलखा क्षेत्र के नाले में पड़ा मिला था, जो 6 टुकड़ों में बोरे में बंद था। पुलिस ने कॉलोनी में ही रहने वाले महेश बैरागी को हत्या के मामले में आरोपित बनाया है।

अभियोजन की तरफ से एजीपी एनए मंडलोई और राकेश पालीवाल ने पैरवी की जबकि आरोपित की तरफ से सीनियर एडवोकेट चंपालाल यादव ने पक्ष रखा। अभियोजन की तरफ से 41 गवाहों के बयान कराए गए। इधर, आरोपित ने भी बचाव साक्ष्य के रूप में एक गवाह को बुलाया। सप्ताहभर पहले दोनों पक्षों की अंतिम बहस सुनने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था, जो शुक्रवार को जारी किया गया।

हाई कोर्ट भी पहुंचा था मामला

सुनवाई की सुस्त गति को लेकर यह प्रकरण हाई कोर्ट भी पहुंचा था। आरोपित ने आरोप लगाया था कि अभियोजन जानबूझकर प्रकरण को धीमी गति से चला रहा है। इस पर हाई कोर्ट ने सेशन कोर्ट को 6 माह में प्रकरण की सुनवाई पूरी करने के आदेश दिए थे। इसके बावजूद सुनवाई करीब ढाई साल चली।

फैसला सुनते ही बिलख पड़े परिजन

करीब एक सप्ताह कोर्ट ने प्रकरण की सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। शुक्रवार सुबह से ही सेशन जज बीके द्विवेदी के कोर्ट रूम में कविता और आरोपित के परिजन आ गए थे। दोपहर करीब साढ़े तीन बजे जैसे ही कोर्ट ने आरोपित को बरी किया तो कविता के परिजन की रुलाई फूट पड़ी। वे बिलख-बिलख कर रोने लगे। कविता के पति संजय ने कहा कि वे सेशन कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देंगे। इधर, आरोपित के परिजन की आंखों से भी आंसू बह निकले। आरोपित की पत्नी मीना ने कोर्ट के हाथ जोड़कर इतना ही कहा कि उसे पति की बेगुनाही का भरोसा था। कोर्ट के फैसले से इस पर मुहर लग गई।

अब क्‍या

अभियोजन की तरफ से पैरवी कर रहे एजीपी एनए मंडलोई और राकेश पालीवाल ने बताया कि अभियोजन सेशन कोर्ट के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देगा। अभियोजन ने प्रकरण में 41 गवाह पेश किए थे। इनमें से एक भी पक्षद्रोही नहीं हुआ। इसके बावजूद कोर्ट ने अभियोजन की बात को सिद्ध नहीं माना। इधर आरोपित की तरफ से पैरवी करने वाले सीनियर एडवोकेट चंपालाल यादव ने भी कहा कि वे सीबीआई की मांग को लेकर हाई कोर्ट में गुहार लगाएंगे।

यह था मामला

24 अगस्‍त 2015 को कविता रैना हर दिन की तरह अपने घर से अपने बेटी को बस स्टॉप पर लेने गई थी परंतु इसके बाद कविता का पता नहीं चला। तीन दिन बाद शहर के तीन इमली पुलिया क्षेत्र के पास एक बोरे में कविता की लाश छह टुकड़ों में मिली थी। इसके बाद 30 अगस्त को कविता की एक्टिवा गाड़ी शहर के नौलखा बस स्टैंड पार्किंग परिसर में मिली थी, वाहन पर खून लगा था। बाद में 9 दिसंबर को पुलिस ने मामले का खुलासा करते हुए एक बुटिक सेंटर चलाने वाले महेश बैरागी निवासी मूसाखेड़ी को कविता की हत्या के जुर्म में गिरफ्तार किया था।