इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। लोग खुद की गलती छिपाने के लिए या भय के कारण रिश्वत देते हैं। लेकिन अगर हमें भ्रष्टाचार पर नियंत्रण करना है, तो इस सोच को बदलना होगा। यह कहना है इंदौर लोकायुक्त में डीएसपी रहे बीएस परिहार का। इंदौर में 50 से अधिक रिश्वतखोरों को पकड़ने वाले परिहार बताते हैं कि कुछ डिपार्टमेंट में रिश्वत आम बात है।

कुछ मामलों में लोग खुद की गलती छिपाने के लिए तो कुछ में समय बचाने के लिए, कुछ में तात्कालिक बचाव के लिए तो कुछ में भय के कारण रिश्वत देते हैं। लेकिन हमें इस सोच को बदलना होगा, ताकि भ्रष्टाचार पर नियंत्रण हो सके। अगर ऐसा नहीं होगा तो सरकार भले ही कितनी भी एजेंसी बना ले, भ्रष्टाचार पर नियंत्रण नहीं हो सकेगा। सरकारी कर्मचारी अपने वेतन के अलावा एक रुपया भी अधिक कमाता है, तो वह गलत है।

डरे नहीं शिकायत करें

परिहार बताते हैं कि लोग जब लोकायुक्त या ईओडब्ल्यू जैसी एजेंसी के पास शिकायत लेकर जाते हैं, तो उनके मन में भय होता है कि कहीं अधिकारी बाद में उनका नुकसान न कर दें। पर वे लोग यह नहीं सोचते कि आज वह अधिकारी उनके साथ ऐसा कर रहा है, कल उसके जैसे कई लोगों से इसी प्रकार से रिश्वत लेगा। या फिर रिश्वत के लिए उन्हें परेशान करेगा।

काउंसलिंग भी करते हैं

परिहार ने बताया कि कई बार हमें आवेदक की काउंसलिंग भी करना पड़ती है। ऐसे लोगों को डर भी लगता है। क्योंकि ट्रेप के मामले में सबसे अधिक भूमिका आवेदक की ही होती है। कई बार कार्रवाई के बाद शिकायतकर्ता के काम जल्द करवाने के लिए उस विभाग को हम पत्र भी लिखते हैं।