इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। स्वच्छता तन, मन और विचार में होगी तो हमारा शरीर भी स्वस्थ होगा। ठीक इसी तरह जब हमारा घर, मोहल्ला और शहर स्वच्छ होगा तो अपना शहर स्वस्थ भी होगा। अब स्वच्छता को सफाई से आगे इस सोच के साथ बढ़ाना चाहिए कि यह हमारे शहर के स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। यह सोच बदलेगी तो स्वच्छता का स्तर और भी ऊंचा होगा।

स्वच्छता के प्रति बदलती यह सोच की तस्वीर बुधवार को नईदुनिया के अभियान 'सोच बदलो' के तहत आयोजित संवाद कार्यक्रम में उभरकर सामने आई। संवाद में शहर के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले अलग-अलग क्षेत्रों के नागरिक शामिल हुए और स्वच्छता पर अपने विचार रखे। संवाद में यह बात भी सामने निकलकर आई कि स्वच्छता का संस्कार हमारे मन में होना चाहिए।

यदि सरकार पॉलिथीन पर बैन लगाती है तो हमें भी किसी से पॉलिथीन में सामान लेने की अपनी सोच बदलनी होगी। जब हम मना करेंगे तो देखते-देखते यह आदत में शामिल होगा। लोगों ने कहा कि एक बड़े तबके ने स्वच्छता को आदत बना लिया है और अब जरूरत है कि हम ऐसे लोगों को रोकना-टोकना शुरू करें, जो अभी भी इसके प्रति गंभीर नहीं हैं।

सीनियर सिटीजन अदा कर सकते हैं महत्वपूर्ण रोल

खाली प्लॉट पर कचरा जलाने से लोगों को रोका जाना चाहिए। कार से थूकने वालों को भी सोचना चाहिए कि वे इस तरह की हरकत से समाज को क्या संदेश दे रहे हैं। सीनियर सिटीजन के प्रयास से हम लोगों को जागरूक कर सकते हैं। स्वच्छता पर लगातार काम करते रहने के लिए हमने कई फार्मा और नर्सिंग वालों को जोड़ रखा है। -डॉ. संजय लोंढे, पूर्व अध्यक्ष, आईएमए

कॉलोनी के गार्डन को साफ रखने के लिए 15-20 डस्टबिन रखवाए गए हैं। सुबह से शाम तक हजारों लोग गार्डन में आते हैं। इससे थोड़ा बहुत कचरा एकत्रित हो जाता है। इसकी निगरानी के लिए दो कर्मचारी नियुक्त किए हैं। कॉलोनी में 528 घर हैं। सभी को समझाइश देते रहते हैं कि कॉलोनी और गार्डन को स्वच्छ बनाए रखना हमारा काम है। अगर निगम कर्मचारी भी कभी-कभार ध्यान नहीं देते हैं तो हमें मिलकर व्यवस्था बनाए रखनी होगी। -जगदीश शाह, साकेत रहवासी संघ

सेना में पांच साल सेवा कर चुका हूं। वहां पहले से साफ-सफाई पर ध्यान दिया जाता रहा है। सेना में जिस तरह स्वच्छता को लेकर अनुशासन रहता है, उसकी झलक देश में सिर्फ इंदौर शहर में दिखाई देती है। हम नगर निगम के साथ मिलकर शहर को साफ-सुथरा बनाने के लिए काम कर रहे हैं। 311 एप पर आने वाली शिकायतों का जब तक निराकरण नहीं हो जाता, तब तक हम कार्यकर्ताओं के साथ काम करते रहते हैं। शहर आगे भी स्वच्छता में नंबर वन बना रहे, इसके लिए 311 एप को हर व्यक्ति को डाउनलोड करना चाहिए और जहां भी कचरा दिखे, इसकी जानकारी निगम को देना चाहिए। - सनप्रीत सिंह, डायरेक्टर, ह्यूमन मेट्रिक्स एनजीओ

मेरी कार में डस्टबिन रखा है। कार में बच्चे कुछ खाते हैं तो डस्टबिन में ही कचरा डालते हैं। एक बार रोड पर बच्चे ने चिप्स का पैकेट फेंक दिया। उसे उठाने के लिए कार से निकला तो पता लगा पीछे से आ रहे बाइक सवारों ने पहले ही उसे उठा लिया। यह देखकर अच्छा लगता है कि हमारा शहर जागरूक है। जो भी कचरा खाली जगह पर डालता है, उसे रोकना चाहिए। - राकेश उपाध्याय, आईटी एक्सपर्ट

जब तक सेल्फ अनुशासन नहीं रहेगा, तब तक शहर को स्वच्छ रखना मुश्किल है। मेरा मानना है कि इंदौर को अगर दो बार स्वच्छता में नंबर वन का दर्जा मिला है तो वह सभी के प्रयासों से हुआ है। जो भी काम हमारे स्वभाव में नहीं आता, उसे करना मुश्किल होता है। शिक्षण संस्थानों और कॉलोनियों में जगह-जगह पर साफ-सफाई के क्या फायदे हैं, इससे नागरिकों को परिचित कराते रहना चाहिए। - कमल साबू, अध्यक्ष, सांई प्रचार मिशन

स्वच्छ और स्वास्थ्य दोनों का आपस में तालमेल है। अगर स्वच्छता नहीं रहेगी तो हम स्वास्थ्य नहीं रह सकते। हमें पता होना चाहिए कि गंदगी से कौन-कौन सी बीमारियां होती हैं। एक बार हांगकांग जाना हुआ। वहां कुछ खाने का सामान रोड पर गिर गया। लोग स्वच्छता के लिए कितने जागरूक हैं, इसका उदाहरण उनकी प्रतिक्रिया से पता चला। सभी साफ-सफाई के लिए जागरूक हैं। ऐसे में कहीं भी कचरा दिखाई नहीं दे सकता। - डॉ. विशाल जैन, लेप्रोस्कोपिक सर्जन

एक समय था जब 56 बाजार में कचोरी खाने के बाद कागज की प्लेट कोने में फेंक देते थे, लेकिन अब कहीं भी कचरा देखने को नहीं मिलता। स्वच्छता की भावना बनाए रखने के लिए हमें इंटरनेशनल क्लिनिंग डे और 2 अक्टूबर के दिनों को अच्छे से सेलिब्रेट करना चाहिए। इस दिन स्कूल और कॉलोनियों में स्वच्छता बनाए रखने के लिए बड़े आायोजन रखे जा सकते हैं। - विकास गुप्ता, सामाजिक कार्यकर्ता

शहर के फुटपाथ पर अतिक्रमण होने से भी कुछ जगहों पर कचरा देखने को मिलता है। शाम को लगने वाले ठेलों का कचरा कई बार फुटपाथ पर ही रह जाता है। शहर की हर गली स्वच्छ बनी रहे, इसके लिए अतिक्रमण हटाना होगा। जो दुकान संचालक कचरे को फेंकने की व्यवस्था नहीं करते हैं, उन पर सख्त कार्रवाई करनी होगी। -जितेंद्र परवानी, इंदौर पैरेंट्स एसोसिएशन

हर कॉलोनी में स्वच्छता पर निगरानी रखने के लिए एक व्यक्ति तय किया जाना चाहिए। इसका चयन रहवासी संघ के ही किसी जिम्मेदार को व्यक्ति किया जा सकता है। सिंगापुर और अन्य देशों में जिस तरह 80 से 90 फीसदी घरों में कचरे का निपटान हो जाता है, वैसी व्यवस्था शहर में भी होना चाहिए। निगम की 311 एप पर आने वाली कचरे और स्ट्रीट लाइट की शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई होना चाहिए। - राहुल गुप्ता, रहवासी, महालक्ष्मी नगर

नगर निगम को उन कॉलोनी के लोगों को सम्मान देना चाहिए या किसी तरह का फायदा दिया जाना चाहिए, जहां लगातार स्वच्छता बनाए रखने के लिए रहवासी जागरूक रहते हैं। इससे दूसरों को भी प्रेरणा मिलेगी। जीरो टॉलरेंस के तहत किसी भी जगह कचरा पाए जाने पर सख्त कार्रवाई करने की जरूरत है। - सागर वेंगुरलेकर, रहवासी, सिंगापुर ग्रीन व्यू टाउनशिप

शहर में कई आयोजन होते हैं। इसमें पानी की बोतल, चाय के कप और फूलों की माला का उपयोग किया जाता है। इससे रोड पर कचरा फैलता है और वातावरण भी प्रभावित होता है। हम जब भी आयोजन करते हैं, उसमें ध्यान रखते हैं कि प्लास्टिक का सामान और फूलों की माला का उपयोग न हो। - निर्मल वर्मा, सराफा व्यवसायी

साफ-सफाई और यातायात दोनों एक-दूसरे से जुड़े हैं। अकसर देखने में आता है कि जहां यातायात की खराब स्थिति होती है, वहां कचरा ज्यादा दिखाई देता है। मेरा मानना है कि भविष्य में भी शहर स्वच्छ रहे, इसके लिए यातायात की स्थिति बेहतर करनी होगी। - मनीष बिसानी, अध्यक्ष, सियागंज किराना बोकर्स एसोसिएशन

कोर्ट के 150 एडवोकेट ने मिलकर तय किया है कि जो भी क्लाइंट आते हैं, उनके केस की जानकारी लेने के बाद समझाइश दें कि अपने आसपास के क्षेत्र में साफ-सफाई बनाकर रखें। इसके लिए उनसे शपथ पत्र भरवाए जाते हैं। -पंकज वाधवानी, एडवोकेट, राधानगर कॉलोनी