इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। लैपटॉप चोरी की रिपोर्ट दर्ज करने के बजाय पुलिस व क्राइम ब्रांच ने फरियादी इंजीनियरिंग छात्र से आवेदन लेकर उसे रवाना कर दिया। छात्र ने तकनीक का उपयोग कर चोर का पता ढूंढ निकाला। बुधवार को छात्र डीआईजी के पास पहुंचा और चोर की जानकारी मुहैया कराई। उसने यह भी बताया कि ऐसे चोरों के ठिकाने तक कैसे पहुंचा जा सकता है।

गणराज नगर में रहने वाले इंजीनियरिंग छात्र अनमोल चौबे बुधवार को डीआईजी हरिनारायणाचारी मिश्र के पास पहुंचा और लैपटॉप चोरी की शिकायत दर्ज कराई। छात्र ने बताया कि उसने 31 दिसंबर को एक प्रोजेक्ट तैयार किया था। सुबह पिता काम पर जाने के लिए निकले तो एक बदमाश ने घर में घुस कर लैपटॉप चुरा लिया। जब खजराना थाना पहुंचे तो पुलिस ने लिखित आवेदन लेकर रवाना कर दिया।

दो दिन बाद क्राइम ब्रांच में शिकायत की, लेकिन वहां से भी रवानगी दे दी गई। 5 जनवरी को छात्र को पता चला उसका लैपटॉप ओएलएक्स पर बिकने आया है। छात्र ने उसके फिचर चेक किए और लैपटॉप की पूरी जानकारी जुटा ली और चोर को ढूंढने की कोशिश की और उसके ठिकाने की जानकारी जुटा ली।

ऐसे मिला चोर का ठिकाना

छात्र ने बताया वह लैपटॉप पर जी-मेल आईडी यूज करता था। उसने मोबाइल (एंड्रोइड) पर ईमेल चेक किया। यहां व डैश बोर्ड ऑप्शन में गया और माई एक्टिविटी पर फाइंड माय डिवाइस को सर्च किया। इसमें लैपटॉप की आखिरी लोकेशन तिलक पथ की निकली। छात्र तिलक पथ पहुंचा। वहां एक इमरात में एटीएम और डॉक्टर का क्लिनिक था। छात्र का शक गहरा गया। जिस घर में वह रहता था वहां एक डॉक्टर भी रहता था। छात्र ने पूरी घटना के बारे में माता-पिता को बताई और डॉक्टर पर शक किया।

फिर ओएलएक्स से जानकारी हटा ली। फिर उसने कॉलोनी में रहने वाले कुछ लोगों से डॉक्टर की जानकारी जुटाई। एक महिला ने बताया 31 दिसंबर को डॉक्टर के साथ निखिल नामक युवक भी आया था। छात्र ने फेसबुक पर निखिल को सर्च किया और महिला को निखिल नामक 20 लोगों के फोटो दिखाए। महिला ने एक युवक की पहचान कर ली। छात्र ने डीआईजी को बताया डॉक्टर और निखिल दोस्त है। शक है लैपटॉप चोरी में उन्हीं का हाथ है। डीआईजी ने क्राइम ब्रांच को जांच सौंपी है।