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    पढ़ाई नहीं करने पर डांटा तो बेटी ने परिवार के सामने लगा ली फांसी

    Published: Tue, 13 Mar 2018 04:41 PM (IST) | Updated: Wed, 14 Mar 2018 08:26 AM (IST)
    By: Editorial Team
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    इंदौर। ग्रेटर वैशाली नगर में पढ़ाई नहीं करने पर बड़ी बहन ने डांटा तो गुस्साई इंजीनियरिंग की छात्रा ने फांसी लगा ली। छात्रा जब खुद को कमरे में बंद कर फांसी लगा रही थी तब कमरे के बाहर खड़े परिजन खिड़की से उससे ऐसा न करने की मिन्नतें कर रहे थे। पड़ोसियों की मदद से दरवाजा तोड़कर पिता जब तक अंदर पहुंचे, वह फांसी लगा चुकी थी। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया जहां मृत घोषित कर दिया गया।

    द्वारकापुरी पुलिस के मुताबिक घटना मंगलवार की है। मृतका का नाम भानुप्रिया (22) पिता रतनसिंह डाबर है। वह निजी कॉलेज में इंजीनियरिंग द्वितीय वर्ष की छात्रा थी। पिता खरगोन में उद्योग विभाग में मैनेजर हैं। भानु की दो बड़ी बहन और एक छोटा भाई है। बहन नम्रता बीएएमएस की पढ़ाई कर रही है, मनीषा भोपाल में इंजीनियरिंग की छात्रा है। जबकि छोटा भाई सृजय सातवीं में पढ़ता है। सुबह मनीषा को छोड़कर बाकी सभी लोग घर पर थे।

    भागकर कमरे का दरवाजा बंद कर दिया

    जांच अधिकारी एमएस रघुवंशी को पिता ने बताया कि बेटी सुबह 10 बजे सोकर उठी थी। पढ़ाई में ध्यान नहीं देने और देरी से सोकर उठने को लेकर बड़ी बहन नम्रता ने उसे डांट दिया था। इससे नाराज होकर वह कमरे की तरफ भागी। पीछा करते हुए बड़ी बहन भी गई। छोटी बेटी दरवाजा बंद करने लगी तो बड़ी ने रोक दिया। इसके बाद वह दूसरे कमरे में चली गई। अंदर से दरवाजा बंद कर फांसी लगाने का प्रयास करने लगी।

    पिता के मुताबिक कमरे की खिड़की से पूरा परिवार उसे मना करता रहा, लेकिन वह नहीं मानी। इसी दौरान पिता ने दरवाजा तोड़ने की कोशिश की। बेटे सृजय को भेजकर तीसरी मंजिल पर किराए से रहने वाले दो छात्र ओंकार जामरा और ओमप्रकाश देसाई को बुलाया। सभी ने मिलकर दरवाजा तोड़ा और बेटी को फंदे से उतारकर निजी अस्पातल ले गए, लेकिन उसकी मौत हो चुकी थी।

    पढ़ाई में कमजोर थी, मिर्गी की बीमारी भी थी

    पिता ने बताया कि बेटी पढ़ाई में कमजोर थी। कुछ दिन पहले ही सेकंड सेमेस्टर का रिजल्ट आया था। उसे दो विषय में एटीकेटी आई थी। इसे लेकर उसे अकसर डांटते रहते थे। कुछ दिन से वह कॉलेज भी नहीं जा रही थी। पिता के मुताबिक बेटी को मिर्गी की भी बीमारी थी। उसे छोटी-छोटी बातों में गुस्सा आ जाता था। अकसर नाराज होकर कमरे का दरवाजा बंद कर घंटों अकेले रहती थी। रिजल्ट बिगड़ने से भी डिप्रेशन में थी।

    आंखें दान की

    परिजन पोस्टमार्टम कराने जिला अस्पताल पहुंचे। वहां मां शीला, बहन नम्रता का रो-रोकर बुरा हाल था। अंतिम संस्कार के लिए शव मूल निवास आलीराजपुर जिले के सालखेड़ा गांव ले जाया जाएगा। परिजन ने एमके इंटरनेशनल आईबैंक को भानु की आंखें दान कर दी। पिता का कहना था कि बेटी तो दूर चली गई लेकिन उसकी आंखें तो किसी के काम आएंगी।

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