रतलाम जिले के जावरा स्थित बालिका गृह का मामला सामने आने के बाद इस तरह के आश्रमों के साथ सरकारी छात्रावासों में रह रही हजारों बालिकाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ खड़े हुए हैं। सवाल उठने की वजह भी पुख्ता है, क्योंकि मालवा निमाड़ के जिलों में ऐसे कई छात्रावास और बालिका गृह हैं जहां बालिकाओं की सुरक्षा के लिए चहारदीवारी तक सुरक्षित नहीं है। कहीं दीवारों की ऊंचाई कम है तो कहीं दीवारें क्षतिग्रस्त पड़ी हैं और उन्हें सुधारने की सुध तक नहीं ली जा रही है। हास्यास्पद बात तो खरगोन जिले के एक छात्रावास में सामने आई है।

यहां चहारदीवारी की जरूरत को ग्रीन मेटी से पूरा करने का प्रयास किया गया है। इसी छात्रावास में सुविधाघरों के पास की दीवारें भी कम ऊंचाई वाली हैं, जिससे बालिकाओं को स्नान बाद असुविधाजनक महसूस होता है। सरकारी छात्रावासों के सामने फंड की समस्या नहीं है, फिर स्थिति ऐसी क्यों है? छात्रावासों के दरवाजों पर चौकीदार तक की व्यवस्था नहीं है। सीसीटीवी कैमरों से नजर रखने की बात भी अब सोची जा रही है।

आश्रमों और छात्रावासों के सतत निरीक्षण की व्यवस्था है, लेकिन निरीक्षण हो रहा है या नहीं, निरीक्षण के दौरान मिली शिकायतों पर ध्यान दिया जा रहा है या नहीं यह देखने वाला कोई नहीं है। यह बात जावरा मामले की प्रारंभिक जांच में भी सामने आ चुकी है। जावरा की शर्मनाक घटना के बाद आश्रमों और छात्रावासों में चौकसी बढ़ाने पर ध्यान देने की कोशिशें शुरू हुई हैं, लेकिन घटना पुरानी होने पर लगता नहीं कि सतर्कता इसी तरह बरती जाती रहेगी।

रतलाम: सतत निरीक्षण नहीं होने का परिणाम-जावरा का मामला

जिले में एक बालिका और एक बालक घर संचालित है। जावरा में कुंदन वेलफेयर सोसायटी के कुंदन कुटीर बालिका गृह में बालिकाओं के यौन शोषण और प्रताड़ना की जांच के बाद विभागीय अमला सवालों के घेरे में है। प्रारंभिक जांंच में स्पष्ट हुआ है कि महिला बाल विकास विभाग के लगातार निरीक्षण नहीं करने से गड़बड़ी उजागर नहीं हो सकी और बढ़ती चली गई। सीसीटीवी कैमरे लगे हैं लेकिन उनका रेेंडम परीक्षण नहीं किया गया।

बालिका गृह की पूर्व संचालिका रचना भारतीय, पति ओमप्रकाश, सोसायटी अध्यक्ष संदेश जैन, सचिव दिलीप बरैया, पूर्व अधीक्षिका नेहा सिसौदिया, वर्तमान अधीक्षिका हंसा पाठक को जेल भेजा जा चुका है। खास बात यह है कि रचना के बालिका गृह में दखल के बावजूद बाल कल्याण समिति का अध्यक्ष बना दिया गया। कुंदन कुटीर सील होने के बाद अब बालिकाओं को उज्जैन, मंदसौर और इंदौर भेजा गया है। बालिका गृह संचालन के लिए केंद्र सरकार और राज्य सरकार से अनुदान जारी होता है। इसके अलावा रियायती दर पर अनाज भी शासकीय राशन दुकानों से आवंटित होता है। कुंदन कुटीर को 1.10 क्विंटल अनाज जारी होता था।

गंभीरता से नहीं लिया

जावरा के बालिका घर से पूर्व में भी बालिकाओं के भागने की घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन उन्हें गंभीरता से नहीं लिया गया। 24 जनवरी को पांच लड़कियों के एक साथ भागने, मंदसौर में बरामद होने के बाद उनके बयान से पूरा मामला उजागर हुआ। शासकीय छात्रावासों में भी कई बार छात्राओं ने समय पर खाना नहीं मिलने और खराब व्यवहार को लेकर शिकायतें की हैं। 1 अगस्त 2018 को जिले में सभी बालिका घर, छात्रावासों, कन्या होस्टलों की जांच कराई गई थी, लेकिन जांच में मिली कमियों को दूर करने पर किसी ने ध्यान नहीं दिया।

इधर, मिशन कंपाउड में संचालित बालक घर (अपना घर) में इस घटना के बाद सुरक्षा इंतजाम बढ़ाते हुए सुविधाओं को लेकर भी कसावट की गई है। वहां जिला प्रशासन ने निरीक्षण कर जरूरी सुधार के भी निर्देश दिए हैं।

कमियां दूर करेंगे

जिले में सभी बाल और बालिका गृह सहित कन्या छात्रावास, होस्टल आदि की जांच करवाई है। कमियां दूर करने के लिए निर्देशित किया है। जावरा कुंदन कुटीर बालिका गृह की गड़बड़ी को लेकर जांच प्रतिवेदन के आधार पर पुलिस प्रकरण दर्ज करवाया गया है।

-रुचिका चौहान, कलेक्टर

खरगोन: कन्या छात्रावास में ग्रीन मेटी से बनी सुरक्षा वॉल

जिले में 69 छात्रावास शासन संचालित कर रहा है, इनमें 4 हजार 950 छात्राएं रह रही हंैं। छात्राओं की सुरक्षा के लिए अधीक्षिकाएं भी साथ ही रहती हैं। कु छ माह पूर्व कन्या छात्रावासों में शिकायतें मिलने के बाद 33 महिला प्राचार्य और व्याख्याताओं से इन छात्रावासों का निरीक्षण भी करवाया गया था। निरीक्षण दल ने छात्राओं से अलग चर्चा कर रिपोर्ट तैयार की। रिपोर्ट में सुरक्षा को लेकर कु छ बातें सामने आई, जिसमें कन्या छात्रावासों में बाउंड्रीवाल का अधूरा निर्माण मुख्य है। जिले के आदिवासी अंचल में स्थित छात्रावासों की स्थिति ठीक नहीं है।

भगवानपुरा के प्री-मेट्रिक बालिका छात्रावास में पिछले दो वर्ष से क्षतिग्रस्त बाउंड्रीवाल अब तक सुधारी नहीं जा सकी है। बालिकाओं की सुरक्षा के लिए ग्रीन मेटी लगा दी गई है। छात्रावास परिसर के पिछले हिस्से में बने सुविधाघरों के आसपास की बाउंड्रीवाल छोटी होने से भी बालिकाओं को परेशानी होती है।

अधीक्षिका राजकु मारी सेंगर ने कई बार लिखित में अधिकारियों को बताया लेकिन कुछ नहीं हो सका है। बीईओ सुमरसिंह जाधव ने जल्द ही व्यवस्थाएं सुधारने का आश्वासन दिया है। इसी तरह क्षेत्रीय विधायक के दार डावर ने छात्रावास की क्षतिग्रस्त दीवार की जल्दी मरम्मत की बात कही है। अधिकारियों के अनुसार कन्या छात्रावासों में बिना अनुमति कि सी को प्रवेश की इजाजत नहीं है।

सुरक्षा का विशेष ध्यान

जनजातीय विभाग के प्रभारी सहायक संचालक एके श्रीवास्तव ने बताया कि कन्या छात्रावासों में अब तक कोई भी अप्रिय घटना नहीं हुई। छात्रावासों में कन्याओं की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाता है। विभाग ने छह कन्या छात्रावासों और पांच आश्रमों में बाउंड्रीवाल निर्माण के प्रस्ताव भेजे हैं। स्वीकृति मिलते ही निर्माण कि या जाएगा। सामाजिक न्याय विभाग के उपसंचालक आरके सिंह ने बताया कि विभाग जिले में तीन संस्थाएं संचालित कर रहा है। दो कन्या आश्रमों को निजी संस्थाएं संचालित करती हैं। समय-समय पर निरीक्षण और शासन के निर्देशानुसार विभाग द्वारा अनुदान दिया जाता है।

बाउंड्रीवॉल शीघ्र बनेंगी

कलेक्टर गोपालचंद्र डाड ने बताया कि जिले में कन्या छात्रावासों में बाउंड्रीवाल और भवनों की मरम्मत के लिए विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। जल्द ही अधूरी पड़ी बाउंड्रीवालों का निर्माण कराया जाएगा।

मंदसौर: अपना घर में 18 से कम आयु की 49 बालिकाएं

मंदसौर जिले में एकमात्र निराश्रित बालिका गृह 'अपना घर" मंदसौर में है। इसका संचालन स्वाध्याय मंच करता है। फिलहाल यहां 18 वर्ष से कम आयु की बालिकाओं को रखा जाता है। अपना घर में अब तक कोई बड़ी शिकायत सामने नहीं आई है। समिति के पदाधिकारी ही यहां पैनी नजर रखते हैं। 1980 से अपना घर का संचालन हो रहा है। पहले महिला मंडल संस्था इसका संचालन करती थी, बाद में स्वाध्याय मंच ने करने लगा। पूर्व में यहां बालक-बालिकाओं दोनों को रखा जाता था। 2005-06 में सिर्फ बालिकाओं को यहां रखा जा रहा है।

18 साल की होने के बाद उन्हें नारी निकेतन या अन्य सुधार गृहों में भेज दिया जाता है या शादी होने पर वे अपने घर भी चली जाती हैं। अभी यहां 49 बालिकाएं रह रही हैं। इनमें आठ बालिकाएं जावरा से हाल ही में शिफ्ट की गई हैं। अपना घर संस्था के भवन में ही संचालित है। दान राशि से भवन का रखरखाव होता है। शासन ने लगभग तीन साल पहले अपना घर को अनुदान देना शुरु किया था। तब से यहां 18 साल से कम उम्र की बालिकाएं ही रखी जा रही हैं। पहले यहां ज्यादा उम्र वाली लड़किया भी थी, उनमें से पांच की शादी भी अपना घर से की गई, सभी अपने परिवारों में खुश हैं।

ऐसे होता है संचालन

स्वाध्याय मंच के अध्यक्ष ब्रजेश जोशी ने बताया कि अपना घर संचालन के लिए हमे दो-तीन साल पहले ही लगभग 50 हजार रुपए प्रतिमाह का अनुदान मिलना शुरू हुआ है, पर यह अनियमित नहीं है। अपना घर के संचालन के लिए संस्था के संस्थापक अध्यक्ष राव विजयसिंह ने चार योजनाएं प्रारंभ की थी। इनमें भोजन के लिए अनंत आहार योजना और बालिकाओं पढ़ाई के लिए ज्ञान योजना शामिल थीं। इनमें शहर सहित आस-पास के लोगों को भी सदस्य बनाकर एकमुश्त राशि जमा कराई गई। आज उसके ब्याज से भी अपना घर का संचालन में मदद मिलती है।

निरीक्षण औपचारिक

महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों के साथ ही बाल संरक्षण आयोग के सदस्य भी समय-समय पर निरीक्षण करते रहते हैं। हाल में आयोग के दो सदस्य ब्रजेश चौहान और आशीष कपूर ने भी अपना घर का निरीक्षण किया था। लेकिन उन्होंने केवल रसोई का स्टोर अच्छा रखने निर्देश दिए थे।

गंभीर शिकायत नहीं

- जिले में 25 बालिका छात्रावासों के साथ अपना घर का निरीक्षण भीसमय-समय पर करते रहते हैं। शासन के निर्धारित मापदंडों का भी आकलन करते रहते हैं। छोटी-छोटी समस्याएं मिलती हैं पर बालिकाओं से काम कराने, योन शौषण, छेड़छाड़ जैसी शिकायत नहीं मिली है।

- रविंद्र महाजन, जिला महिला सशक्तीकरण अधिकारी

शाजापुर: बालिका छात्रावासों पर तीसरी आंख से नजर रखने की तैयारी

शाजापुर जिले के 17 छात्रावासों में रह रही कु ल 850 बालिकाओं की सुरक्षा अब तीसरी आंख (सीसीटीवी कै मरों) से भी होगी। हाल ही में रतलाम जिले में सामने आए मामले के बाद जिले के छात्रावासों की सुरक्षा को लेकर यह कवायद होने जा रही है। जिले में बालिका आवास गृह तो नही हैं पर बालिका छात्रावासों की संख्या 17 है। यहां रह रही 850 बालिकाओं की सुरक्षा के लिए छात्रावासों के चारों ओर बाउंड्रीवॉल का घेरा और कर्मचारियों की तैनाती है लेकि न सुरक्षा पुख्ता करने के लिए अब सीसीटीवी कै मरे लगाने की तैयारी है।

आदिम जाति कल्याण विभाग ने वरिष्ठ कार्यालय को इसका प्रस्ताव भेजा है। फिलहाल अधिकारी समय-समय पर निरीक्षण कर नजर रख रहे हैं। आदिम जाति कल्याण विभाग की जिला संयोजक निशा मेहरा समेत अन्य अधिकारियों को समय-समय पर निरीक्षण करने के निर्देश हैं।

गंभीर शिकायत नहीं

विभाग की संयोजक निशा मेहरा के प्रदेश के साथ ही अन्य राज्यों में सामने आए मामलों को गंभीरता से लिया है। कलेक्टर के मार्गदर्शन में पुलिस और राजस्व की टीम के साथ सभी छात्रावासों को निरीक्षण कि या जा चुका है। जिले में अब तक गंभीर शिकायत सामने नहीं आई है। छात्राओं को कहा गया है कि कि सी भी तरह की परेशानी या शिकायत होने पर सीधे मुझसे मिल सकती हैं। सभी छात्रावासों में महिला स्टाफ तैनात है।

-निशा मेहरा, जिला संयोजक, आदिम जाति कल्याण विभाग

बड़वानी: 83 बालिका छात्रावास, सुरक्षा व्यवस्था कहीं चाकचौबंद नहीं

जिले में कुल 83 कन्या छात्रावास हैं। इसमें से 65 छात्रावास जनजाति विकास कार्य विभाग द्वारा और 18 सर्व शिक्षा अभियान के अंर्तगत संचालित हैं। इनमें छह हजार से अधिक छात्राएं रह रही हैं। सभी छात्रावासों की सुरक्षा व्यवस्था चाकचौबंद नहीं कही जा सकती।

अधिकांश छात्रावासों में सीसीटीवी कै मरे नहीं हैं। कु छ में तो बाउंड्रीवाल तक नहीं हैं। जनजाति विकास कार्य विभाग द्वारा संचालित छात्रावासों के परिसर में बाउंड्रीवाल है, लेकि न सीसीटीवी कै मरे कहीं नहींहैं। वहीं सर्वशिक्षा अभियान के छात्रावासों में भी महज छह कस्तुरबा गांधी बालिका छात्रावासों में ही सीसीटीवी लगे हैं, लेकि न विभाग के अधिकांश छात्रावासों में बाउंड्रीवाल नहीं है।

शिकायत पर हटा दिया था अधीक्षिका को

कुछ समय पहले निवाली के कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास में छात्राओं की प्रताड़ना की बात सामने आई थी। प्राथमिक स्तर की करीब 80 बालिकाएं थाने पहुंच गई थी। उन्होंने छात्रावास अधीक्षिका पर घर के काम करवाने, पीटने सहित अन्य गंभीर आरोप लगाए थे। हालांकि अधीक्षिका ने आरोपों से इनकार कि या था। जांच के बाद अधीक्षिका को हटा दिया गया था।

झाबुआ: बालिका गृह नहीं, जरूरत पड़ने पर इंदौर का आसरा

जिले में बालिका गृह का संचालन नहीं हो रहा है। कई बार आपराधिक प्रकरणों या नाबालिगों के अपराध में शामिल मिलने पर उन्हें रखने की समस्या आती है। ऐसे में उन्हें इंदौर ले जाना पड़ता है। महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों का कहना है, यहां जरूरत है और हम संचालन के लिए किसी संस्था को अनुमति देने को भी तैयार हैं लेकिन कोई सामने नहीं आ रहा। जिले में एक निराश्रित आश्रम अंतरवेलिया गांव में हैं। तीन साल पहले मेघनगर रेलवे स्टेशन पर मिली नाबालिग को इसी आश्रम में रखा गया। उसने आश्रम के संचालक पर परेशान करने और दुष्कर्म का आरोप लगाया था। पुलिस ने संचालक के खिलाफ मामला दर्ज कर जेल भेज दिया था। कुछ माह बाद वह जेल से बाहर आया तो उसने आरोप लगाया कि संस्था के एक शिक्षक से मिलकर नाबालिग ने झूठी रिपोर्ट लिखाई। संचालक ने शिक्षक और नाबालिग के रिश्तों को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे। फिलहाल मामला कोर्ट में विचाराधीन है।

सुरक्षा सुनिश्चित नहीं

जिले में संचालित सरकारी बालिका छात्रावासों में शोषण जैसी कोई बड़ी घटना सामने नहीं आई। हालांकि सुरक्षा को लेकर कई बार खतरे सामने आए हैं। एकलव्य छात्रावास के परिसर में पिछले साल अजगर और सांप घुस गए थे। अगराल मॉडल स्कूल में सुविधाओं को लेकर छात्राएं प्रदर्शन कर चुकी हैं। कल्याणपुरा मॉडल स्कूल की कई छात्राएं एकसाथ कुछ महीने पहले बीमार हुई थी। हालांकि जांच में रक्त की कमी और मासिक धर्म संबंधी समस्याएं सामने आई थीं।

नीमच: 22 में से सिर्फ सात छात्रावास सुरक्षित

जिले में कुल 22 बालिका छात्रावास हैं। । इनमें से 12 छात्रावास आदिम जाति कल्याण विभाग, 7 छात्रावास जिला शिक्षा कें द्र और 3 छात्रावास जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के अधीन हैं। इनकी क्षमता 1430 बालिकाओं की है लेकि न मौजूदा समय में इनमें 1417 बालिकाएं रह रहीं हैं। सुविधाओं की किसी भी छात्रावास में कमी नहीं है, लेकिन सुरक्षा को लेकर स्थिति ठीक नहीं कही जा सकती। 12 छात्रावासों में बालिकाओं की सुरक्षा के लिए जरूरी सीसीटीवी कै मरे ही नहीं हैं जबकि तीन में बाउंड्रीवॉल नहीं है। केवल सात छात्रावास सुरक्षा की दृष्टि से सुरक्षित माने जा सकते हैं। छात्रावासों के संचालन के लिए राज्य सरकार की ओर से संचालन और सुविधाओं के लिए राशि आती है। रतलाम जिले के जावरा की घटना के बाद छात्रावासों में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सीसीटीवी कै मरे लगाने का प्रस्ताव राज्य शासन को भेजा गया है। वहीं जिला शिक्षा कें द्र की तीन छात्रावास पड़दा, कुकड़ेश्वर व नीमच नगर में बाउंड्रीवॉल का प्रस्ताव भेजा गया है। डीपीसी डॉ.पीएस गोयल का कहना है कि जिला शिक्षा कें द्र के अधीन जिले में सात छात्रावास हैं। इनमें से तीन में बाउंड्रीवॉल नहीं है। स्वीकृत क्षमता के मान से 13 स्थान रिक्त भी है।

तीन छात्रावास सुरक्षित

जिले में शिक्षा विभाग के तीन छात्रावास हैं। तीनों में बाउंड्रीवॉल बनी हुई है और सीसीटीवी कै मरे भी लगे हैं। इनमें सुरक्षा व सुविधा का पूरा ख्याल रखा जाता है।

- के सी शर्मा, डीईओ नीमच

निरीक्षण होता है

जिले के छात्रावासों में समय-समय जिम्मेदार अधिकारी निरीक्षण करते हैं। सुरक्षा और सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाता है। बालिकाओं का पक्ष और शिकायतें सुन निराकरण भी कि या जाता है।

- राजीव रंजन मीणा, कलेक्टर

देवास: सुविधाएं तो हैं पर सुरक्षा कमजोर

देवास जिले के बागली स्थित एक छात्रावास में दो साल पहले दुष्कर्म का मामला होने के बावजूद छात्रावासों की सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया जा सका है। बाउंड्रीवॉल हैं जरूर लेकिन छोटी। इससे उनका होना न होने के बराबर है। छात्रावासों के गेट पर चौकीदार तक नजर नहीं आते। जावरा की घटना के बाद भी छात्रावासों में सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा करने और बढ़ाने को लेकर कोई हलचल नजर नहीं आ रही है। शहर के बालगढ़ रोड पर आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा संचालित कन्या उत्कृष्ट शिक्षा केंद्र छात्रावास, पोस्ट मैट्रिक छात्रावास, सीनियर कन्या छात्रावास, पिछड़ा वर्ग के लिए विमुक्त जाति कन्या छात्रावास, पोस्ट मैट्रिक छात्रावास सहित आठ छात्रावास संचालित हो रहे हैं। इनमें 400 छात्राएं रह रही हैं।

छात्रावासों में वार्डन से लेकर खाना पकाने और सफाई आदि के लिए महिला कर्मचारी नियुक्त हैं।शाम छह बजे बाद यहां किसी बाहरी व्यक्ति का प्रवेश प्रतिबंधित है। बड़ी संख्या में छात्राओं के रहने बावजूद इन छात्रावासों में सुरक्षा के इंतजाम नाकाफी है। बाउड्रीवॉल छोटी हैं।

कई बार छात्रावास का गेट भी खुला रहता है। गेट पर चौकीदार नहीं होने से कोई भी अंदर आ जा सकता है। जिले के डबलचौकी, उदयनगर, टोंकखुर्द, सोनकच्छ, कन्नौद, खातेगांव में भी छात्रावास संचालित हो रहे हैं। इसके अलावा शहर में दृष्टिहीन कल्याण संघ भी कन्या केंद्र का संचालित कर रहा है। यहां पहली से नवीं तक की छात्राएं रह रही हैं। संस्था को सामाजिक न्याय विभाग की ओर से अनुदान प्राप्त होता है।

दुष्कर्म का मामला हो चुका है

जिले के बागली में जनवरी 2017 में उत्कृष्ट कन्या और जूनियर कन्या छात्रावास की नाबालिग लड़कियों ने होस्टल अधीक्षक के पति पर दुष्कर्म का आरोप लगाया था। जांच के बाद तत्कालीन छात्रावास अधीक्षक अंजना मेसीदयाल को निलंबित कर दिया गया था। उन्हें और उनके साथ रहने वाले पति प्रेम मसीह दयाल को जेल भेजा गया था।

धार: बाउंड्रीवॉल की ऊंचाई सात फीट बढ़ाकर सुरक्षा

धार जिले में 13 विकासखंडों में करीब 105 से अधिक कन्या छात्रावास संचालित हो रहे हैं। इसमें करीब 6 हजार छात्राएं रह रही हैं। इसके अलावा बालिका आवास योजना के तहत भी छात्रावासों का संचालन हो रहा है। बालिका आवासों में महिला कर्मचारियों की तैनाती के निर्देश हैं। इनके परिसरों में पुरुषों के प्रवेश की अनुमति नहीं है। पिछले सालों में जिले में कोई गंभीर शिकायत सामने नहीं आई है। छात्रावासों और बालिका आवासों का सतत निरीक्षण भी किया जाता है। बालिकाओं की सुरक्षा को लेकर बाउंड्रीवाल की समस्या प्रमुख रूप से सामने आई है।

बाउंड्रीवॉल ऊंची करवा रहे हैं

जिले के कन्या छात्रावासों को लेकर अभी तक कोई गंभीर शिकायत सामने नहीं आई है। कलेक्टर और उच्च अधिकारियों के निर्देश के चलते विशेष इंतजाम किए हैं। 99 प्रतिशत छात्रावासों में बाउंड्री स्वीकृत हो चुकी है। इनका निमार्ण कार्य चल रहा है। कई छात्रावासों में सुरक्षा की दृष्टि से बाउंड्री की ऊंचाई बढ़ाकर सात फीट तक कर दी गई है। अधिकारियों द्वारा छात्रावासों का सतत निरीक्षण भी किया जाता है।

-ब्रजेश पांडे, सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास विभाग

उज्जैन: दो बालिका गृह, दोनों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

संभाग मुख्यालय उज्जैन में दो बालिका गृह हैं। एक, शासकीय बालिका गृह लालपुर और दूसरा अंबोदिया स्थित सेवाधाम बालिका गृह। दोनों ही जगह सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं। उत्पीड़न का अब तक कोई मामला यहां सामने नहीं आया है। सक्षम स्वीकृति के बिना दोनों बालिका गृह में बाहरी पुस्र्ष प्रवेश नहीं कर सकता है। दोनों जगहों पर पर्याप्त ऊंचाई वाली बाउंड्रीवाल बनवाई गई है और 24 घंटे निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे भी लगे हैं। सप्ताह में एक बार बिना सूचना के दोनों बालिका गृह का निरीक्षण भी किया जाता है।

जावरा की घटना के बाद चौकसी और बढ़ा दी गई है। जिला महिला सशक्तिकरण अधिकारी एसए सिद्धिकी ने बताया कि लालपुर स्थित शासकीय बालिका छात्रावास अप्रैल-2016 में शुरू हुआ था। फिलहाल वहां 6 से 18 वर्ष की 72 छात्राए हैं। इनकी देखभाल एवं खान-पान की व्यवस्था के लिए भारत सरकार से 2 हजार स्र्पए प्रति बालिका प्रतिमाह के हिसाब से प्राप्त होते हैं। सेवाध्ााम आश्रम में संचालित बालिका गृह में 54 बालिकाए हैं। सभी की शिक्षा और उनकी रुचि के अनुरूप उनमें कला का विकास किया जाता है। समय-समय पर न्यायिक अधिकारी भी बिना सूचना के बालिका गृहों का निरीक्षण करते हैं। अब तक तक कोई नकारात्मक रिपोर्ट नहीं मिली है।

11 सीसीटीवी कै मरों से बालगृह पर रखी जा रही नजर

खंडवा जिले में एकमात्र बालगृह की मान्यता एकमात्र संस्था हिंदू बाल सेवा सदन को शासन की ओर से मिली हुई है। यहां वर्तमान में 176 बालक-बालिकाओं का पालन-पोषण हो रहा है। यहां की हर गतिविधि पर नजर रखने के लिए 11 सीसीटीवी कै मरे लगाए गए हैं।

हिंदू बाल सेवा सदन बालगृह 16 वर्ष तक के बालक-बालिकाओं का पालन-पोषण हो रहा है। इसमें 91 बालिकाएं और 85 बालक शामिल हैं। हिंदू बाल सेवा सदन को वर्ष 2011 में बालगृह की मान्यता मिली है। बालगृह को शासन की ओर से फंड आवंटित कि या जाता है।

इसके अलावा संस्था की स्वयं की 10 एकड़ जमीन पर खेती होती है। महिला एवं बाल विकास विभाग अधिकारी संजय भारद्वाज ने बताया कि जिले में के वल एक ही बालगृह हिंदू बाल सेवा सदन है। यहां की व्यवस्थाओं को लेकर समय-समय पर मॉनीटरिंग की जाती है। निरीक्षण में कमियां पाए जाने पर सुधार के निर्देश दिए जाते हैं। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर यहां 11 सीसीटीवी कै मरे भी लगाए गए हैं। बाउंड्रीवॉल भी है।