इंदौर, गजेंद्र नागर। बॉडी बिल्डिंग का खेल यूं तो लड़कों का शौक होता है, लेकिन अब शहर की बेटियां भी इसमें नाम कमा रही हैं। इनकी उपलब्धियों के प्रति सम्मान इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इन्होंने सिर्फ विरोधी खिलाड़ियों को चुनौती देने से पहले निजी जीवन की कड़ी समस्या को हराया। 27 साल की वंदना ठाकुर ने इस साल मिस इंडिया फेडरेशन कप में रजत जीता जबकि गोवा में कुछ दिन पहले संपन्न राष्ट्रीय स्पर्धा में कांस्य पदक हासिल किया। पिछले साल पुणे में संपन्न राष्ट्रीय स्पर्धा में भी टॉप-10 में शामिल थीं। वंदना के पिता कमलचंद्र ठाकुर सेना में नायब सूबेदार थे।

कश्मीर में आतंकियों से टक्कर में शहीद हो गए। मां के ननिहाल काशी चले गए। 6 साल की उम्र में मां भी बीमारी के कारण चल बसीं... मुश्किलें यहां भी कम न हुईं। छोटे भाई के साथ इंदौर दादा-दादी के पास आई। 18 की उम्र होते दादा-दादी का साया भी उठ गया। वंदना बताती हैं, 'मैं बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती थी। छोटे-मोटे काम कर घर चलाया, अभी भी ऐसा ही कर रही हूं। पिता सेना में थे तो घर में फिटनेस को लेकर जागरुकता थी। फिटनेस के कारण लगाव के चलते इस खेल में आ गई।'

यह पूछने पर कि महिला होकर बॉडी बिल्डिंग करने पर रिश्तेदारों ने रोका या टोका तो होगा? तो जवाब मिला, 'महिला कुछ भी करे लोग टोकते ही हैं। जब वह सफल होती है तो सब तारीफ करते हैं। मैंने अभी वह सफलता हासिल नहीं की है, लेकिन मेहनत कर एक दिन वह सफलता भी हासिल करूंगी।' हमने पूछा, 'बॉडीबिल्डिंग में खुराक पर बहुत खर्च होता है, आप कैसे व्यवस्था करती हैं?’

वंदना ने कहा 'राज्य शरीर सौष्ठव संघ के सचिव अतीन तिवारी सर बहुत मदद करते हैं। उनके मूसाखेडी स्थित जिम में ही हम अभ्यास करते हैं। उनकी मदद से कुछ प्रायोजक भी मिले हैं। रोज करीब 6 घंटे अभ्यास करती हूं।' एक सहेली भी है जो मदद करती है, लेकिन दोस्ती ऐसी की वह इस नेकी की वाहवाही नहीं लेना चाहती।