अभिलाषा सक्सेना, इंदौर। मजबूत इरादों और दृढ़ इच्छाशक्ति से जीवन में आने वाली हर कठिनाई का सामना किया जा सकता है। यह साबित किया है अंतरराष्ट्रीय ताइक्वांडो चैंपियन वीना अरोरा ने। गुरुवार को इंदौर आईं वीना ने नईदुनिया से खास बातचीत में बताया कि किस तरह से 17 साल पहले हुए एक हादसे ने उनकी जिंदगी को पूरी तरह बदल दिया, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।

वे न सिर्फ स्वयं बल्कि दूसरों के लिए भी प्रेरणा स्रोत बनीं। वीना ने बताया कि वर्ष 2000 तक मैं भी अपने पति और तीन साल के बच्चे के साथ खुशहाल जिंदगी जी रही थी, लेकिन डॉक्टर की थोड़ी सी लापरवाही से सबकुछ बदल गया। मेरा दाहिना हाथ काटना पड़ा। इसके बाद मैं पूरी तरह से टूट गई। समझ में नहीं आ रहा था कि जिंदगी कैसे चलेगी। कुछ सोच पाती उसके पहले पति ने साथ छोड़ दिया।

मैं अपने बेटे को लेकर पिता के घर आ गई। मैं दिनभर उदास रहती थी, सब ने समझाया फिर खुद को संभाला। धीरे-धीरे दूसरे हाथ से काम करना शुरू किया, फिर ऐसा समय आया कि हर काम बखूबी करने लगी। इसके बाद यह अहसास होना खत्म हो गया कि मेरा एक हाथ नहीं है। वीना ने बताया कि मैंने ब्लॉक प्रिंटिंग का छोटा सा व्यवसाय शुरू किया, साथ ही पढ़ाई फिर से शुरू की, क्योंकि मां की जल्दी मृत्यु के बाद पढ़ाई छोड़ना पड़ी थी।

शौक के तौर पर शुरू किया खेल जिंदगी बन गया

2010 में मुझे एक मित्र ने स्पेशल स्पोर्ट्स के क्षेत्र में जाने की सलाह दी। शौक के लिए जानकारी एकत्रित करने के बाद अमृतसर के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में दो साल की ट्रेनिंग ली। इसके बाद 2013 में पहली बार दिल्ली स्टेट पैराओलिंपिक टूर्नामेंट में गोल्ड मेडल प्राप्त किया, फिर 2014 में नेशनल सीनियर एथलेटिक चैंपियनशिप में शॉट पुट और डिस्क थ्रो में गोल्ड और सिल्वर मेडल प्राप्त किया। 2016 में वीना ने ऊंचाइयों को छूते हुए पैरा ताइक्वांडो एशियन चैंपियनशिप में ब्रांज मेडल प्राप्त किया। वीना कहती हैं शौक के रूप में शुरू किया गया खेल ही अब मेरी जिंदगी बन गया है।

2020 ओलिंपिक टारगेट

एशियन गेम्स के बाद अब वीना का लक्ष्य 2010 मे टोक्यो ओलिंपिक में हिस्सा लेना है। इसके अलावा वे अगले सप्ताह होने वाली यूएस ओपन ताइक्वांडो चैंपियनशिप और मई में होने वाले एशियन चैंपियनशिप के लिए भी खुद को तैयार कर रही हैं।

बेटा सबसे बड़ी ताकत

मेरे बेटे ने मुझे खेलने के लिए मॉटिवेट किया। वह कहता था मम्मा आप खेलो और मेरे लिए मेडल लेकर आओ। जब मैं खेलने जाती तो यही मेरे दिमाग में रहता था। आज जब मैं अपनी सफलता को देखती हूं तो जिन परेशानियों से मैं गुजरी हूं वो सब उसके आगे छोटी लगती हैं।