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    7 साड़ियों से शुरू करके आज 50 लाख हुआ टर्नओवर

    Published: Wed, 14 Mar 2018 11:16 AM (IST) | Updated: Thu, 15 Mar 2018 08:43 AM (IST)
    By: Editorial Team
    maheshwari saree chandani 2018314 112050 14 03 2018

    इंदौर, नईदुनिया रिपोर्टर। मन में इच्छा शक्ति और कुछ कर गुजरने की लगन हो तो मुश्किल राह भी आसान हो जाती है। ऐसी ही हस्ती हैं शहर की चांदनी यादव जिन्होंने चार साल पहले महेश्वर के बुनकरों की आमदनी बढ़ाने के उद्देश्य से वहां पर महेश्वरी साड़ियों की मैन्यूफेक्चरिंग यूनिट लगाई और इंदौर से उसकी मार्केटिंग शुरू की। चार साल में ही न सिर्फ उन बुनकरों की आमदनी बढ़ी, बल्कि चांदनी ने स्वयं को भी एक सफल एंटरप्रेन्योर के रूप में स्थापित कर लिया।

    नईदुनिया से बातचीत में चांदनी ने बताया कि शादी के पहले वे महेश्वर में एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में काम करती थीं। वहां साड़ी बनाने वाले बुनकरों को काम करते देखती थी तो हमेशा लगता था कि जितनी बारीकी से ये लोग काम करते हैं इन्हें उतना मुनाफा नहीं मिल पाता। तो ऐसा क्या करूं जो इन्हें इनकी मेहनत के अनुपात में पैसा मिले, लेकिन इसी बीच शादी हो गई और फिर सात साल तक कुछ नहीं कर पाई। जब बच्चा बड़ा हुआ तो मैंने अपने पुराने सपने पर काम करना शुरू किया। महेश्वर में बुनकरों से बात की और कुछ पैसा लगाकर वहीं पर एक छोटी सी मैन्यूफेक्चरिंग यूनिट लगाई।

    उसके बाद इंदौर में घर से ही उसकी मार्केटिंग शुरू की। शुरुआत में चार, पांच साड़ियां ही मुश्किल से बिक पाती थीं। एमबीए किया था तो मार्केटिंग स्किल्स का इस्तेमाल करना शुरू किया। ऑनलाइन मार्केटिंग स्टार्ट की और धीरे-धीरे लोग काम पसंद करने लगे। बस फिर तो मैंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। चांदनी कहती हैं दो बच्चों के साथ बिजनेस मैनेज करने में शुरू में कठिनाई जरूर हुई, लेकिन फैमिली सपोर्ट के चलते सब कुछ आसान हो गया। शुरू में सिर्फ पांच लूम थे, अब 40 हो गए हैं और उनमें 60 से अधिक लोग काम कर रहे हैं। आज हर महीने 400 से ज्यादा साड़ियों की डिमांड है और 50 लाख से ज्यादा का टर्नओवर है। चांदनी कहती हैं महेश्वरी साड़ियों की देशभर में डिमांड है। सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि दक्षिण भारत में जहां कांजीवरम और पट्टू साड़ियों का बोलबाला था वहां मेरी साड़ियों की सबसे ज्यादा सप्लाय है। सिंगापुर, मलेशिया, अमेरिका में भी अच्छी डिमांड है।

    साड़ियों की कीमत के हिसाब से बुनकरों को देते हैं पैसा

    चांदनी कहती हैं बुनकरों की आमदनी ज्यादा हो इसलिए साड़ी की जो कीमत होती है उसके अनुपात में उनको पैसा दिया जाता है। डिजाइनर साड़ी होने पर उन्हें ज्यादा पैसा मिलता है। इसके अलावा उनके परिवार के लोगों को भी छोटे छोटे कामों में लगाया जाता है।

    काम करने वाली अधिकांश महिलाएं

    महिलाओं को रोजगार देकर सशक्त बनाने के उद्देश्य से मैंने अपने बिजनेस में 70 फीसदी से अधिक महिलाओं को लगाया है। चांदनी महिलाओं को घर से बिजनेस करने के लिए ट्रेनिंग भी देती हैं। चांदनी कहती हैं आज की महिलाएं काफी स्मार्ट हैं। वे घर और फैमिली को अच्छे से बैलेंस करना जानती हैं।

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