जबलपुर। ट्रेन में भीड़ बढ़ते ही चोरी और लूटपाट की घटनाएं भी बढ़ी हैं। जुलाई से लेकर अब तक हुई चोरियों में चोर-बदमाशों को तरीका देखकर जीआरपी और आरपीएफ भी हैरान हैं। ट्रेनों में लूटपाट करने वाले अब सस्ते इंटरनेट सेवा का फायदा ले रहे हैं।

वे यूट्यूब की मदद से ट्रेन में चोरी और पैसेंजर को ठगने के नए तरीके जान रहे हैं। यही वजह है कि पहली बार चोरों ने ट्रेन रोकने के लिए सिग्नल के ऊपर लाल पन्नी बांध दी। चोरों के गिरोह के लिए अब ट्रेन में सोते हुए पैसेंजर का सामान चुराना और दो कोच के बीच में लगे होज पाइप को काटकर ट्रेन रोकने का तरीका पुराना हो गया है।

जिन ट्रेनों में चोरी, उनमें एक नाम के कई पैसेंजर

दरअसल ट्रेन में लूटपाट की जांच करने वाली आरपीएफ और जीआरपी को कई ऐसे सबूत हाथ लगे हैं, जिससे इनके पीछे किसी बड़ी गैंग, जो न सिर्फ ट्रेन से जुड़ी अच्छी जानकारी रखती है, बल्कि इंटरनेट सेवा का उपयोग चोरी के नए तरीके सीख रही है। जुलाई और अगस्त में हुई चोरियों में एक बात मेल खा रही है कि जिन दिन भी ट्रेनों में चोरियां हुई, उसमें एक ही नाम के अधिकांश पैसेंजर सफर करते मिले। इतना ही नहीं गिरोह ने चालाकी से अपना मोबाइल नंबर और पता गलत दर्ज कराया।

जांच एजेंसी को समय पर मिलेगी हर जानकारी

आरपीएफ ने ट्रेनों में चोरियों को रोकने और जांच एजेंसियों को मदद करने के लिए अपने काम का सिस्टम पूरी तरह बदल दिया है। जीआरपी, आरपीएफ और राज्य पुलिस के सदस्यों को रेलवे और पैसेंजर से जुड़ी हर जानकारी देने के लिए एक अलग अधिकारी का पद नियुक्ति कर दिया है। सहायक सुरक्षा आयुक्त थेफ्ट ऑफ पैसेंजर बिलॉन्गिंग(यात्री सामान की चोरी) के पद पर आरपीएफ के एएससी जयमल श्रीवास्तव को नियुक्त किया है, जो जबलपुर, भोपाल और कोटा मंडल की चोरियों की जांच एजेंसी को मदद करेंगे।

यहां होती हैं ज्यादा चोरियां

- इटारसी में

- जबलपुर के कटनी आउटर में

- कटनी साउथ, मुडवारा, न्यूकटनी जंग्शन

- मानिकपुर आउटर

- इलाहाबाद

- पिपरियां

ये गैंग हैं सक्रिय

- पारधि गैंग

- कंजड़ गैंग

- कुचबंधिया गैंग

- बंगाली गैंग

- घुमाक्कड़ गैंग

सिग्नल ने छेड़छाड़ रोकने सेंसर

ट्रैक पर लगे सिग्नल में इंटरनल छेड़छाड़ करना संभव नहीं है, लेकिन सिग्नल के बाहर गड़बड़ी की जा सकती है। यही वजह है कि अब रेलवे का सिग्नल विभाग ऐसे सेंसर लगाने का मन बना रहा है, बाहरी हिस्से में भी छेड़छाड़ की जाती है तो इसकी जानकारी रेल अधिकारियों को मिल जाएगा। वहीं सिग्नल से निकलने वाली रोशनी में भी यदि बदलाव किया जाता है तो इसका पता समय रहते मिलेगा।

हर सिग्नल में लगी सीढ़ियां

आउटर से लेकर जंगल तक में लगे रेल सिग्नल के खंबों में सीढ़िया लगीं हैं, जिससे उन पर पहुंचाना आसान है। इन सीढ़ियों को अलग नहीं किया जा सकता। सिग्नल एक्सपर्ट के मुताबिक मेंटनेंस के दौरान सिग्नल एक्सपर्ट अपने साथ टूल्स किट लेकर चलेगा या फिर सीढ़िया। सिग्नल लाइट तक पहुंचने के लिए सीढ़ियां जरूरी है और यही सीढ़ियां चोरों के लिए भी फायदेमंद है।

इनका कहना है

ट्रेनों में लूटपाट की घटनाओं को रोकने के लिए जांच एजेंसियों को हर संभव जानकारी दी जाएगी, इसके लिए आरपीएफ ने विशेष टीम बनाई है। हाल ही में हुईं ट्रेन में चोरियों में यह देखा गया है कि जिस दिन वारदात हुई, उस वक्त एक ही नाम के कई पैसेंजर ट्रेन में सफर कर रहे थे। इसकी जांच की जा रही है।

डॉ. आरके मलिक, आईजी, आरपीएफ

ट्रेनों में गश्त बढ़ा दी गई हैं। अभी यह देखा गया है, जिन्हें गश्त में लगाया गया है, काम आने पर वे ट्रेन में नहीं आते। अब ट्रेनों में गश्त अनिवार्य कर दी है।

विनित जैन, एसपी, जीआरपी, जबलपुर