जबलपुर। तिलवारा थाने के सामने बनाई जा रही होटल ग्रैंड कौशल्या का जिम्मा इंजीनियर शैलेष नेमा को सौंपा गया था। लेकिन घायल मजदूरों का आरोप है कि इंजीनियर ने मौके पर होटल बनवाने का जिम्मा नौसिखिए इंजीनियरों को सौंप दिया था। इसी वजह से 40 फीट की ऊंचाई पर डाला जा रहा स्लैब बीम सहित धराशायी हो गया।

होटल के मालिक महेश केमतानी हैं। बड़े इंजीनियर अपने नाम के आधार पर कई कांट्रेक्ट हासिल करते हैं और फिर उन्हें पेटी कांट्रेक्ट (छोटे-छोटे टुकड़ों में) पर दे देते हैं। इससे उनके एक साथ कई प्रोजेक्ट पूरे हो जाते हैं। कई बार बिल्डिंग निर्माता बड़े इंजीनियर के नाम के उपयोग के बदले उन्हें रायल्टी फीस देते हैं और स्वयं ही जूनियर इंजीनियरों से बिल्डिंग का निर्माण करा लेते हैं। ऐसे में उनकी लागत कम हो जाती है। इस मामले में क्या हुआ, यह तो एडीएम छोटे सिंह की मजिस्ट्रियल जांच में सामने आएगा, जो कि उन्हें 15 दिनों में पूरी कर कलेक्टर को सौंपना है।

बल्ली टूटते ही पिलर की सेंटिंग निकली, भराभरा गया स्लैब-

घायल कमल सिंह, गनेश पटेल ने बताया कि नए इंजीनियरों ने ठेकेदारों के साथ 40 फीट की ऊंचाई पर 25 फीट लंबा 40 फीट लंबा स्लैब डालने की तैयारी की। यह स्लैब डालने से पहले लकड़ी की बल्लियां व लोहे की प्लेट की 3 सेंटिंग एक के ऊपर एक लगाईं गईं। इस तरह 15-15 फीट की 2 और 10 फीट की एक सेंटिंग लगाकर साइट बना दी। इसके ऊपर ढाई बाई 3 फीट लंबी-चौड़ी 3 खड़ी 2 आड़ी बीमों का लोहा बांधा गया।

इन सभी बीमों को सेंटिंग लगाकर मोटे कांक्रीट पिलर से जोड़ दिया गया। सुबह 11 बजे से इस साइट पर 12-15 मजदूर स्लैब डालने लगे। तभी इसके नीचे की दो सेंटिंगों में ठेकेदार संतोष शिवहरे व गुड्डू राव के कहने पर 7-7 मजदूर बल्लियां देखने को पहुंच गए। इस बिल्डिंग की 2 बीम भरने के बाद तीसरी का काम चल रहा था। दो बीमों की भराई के बाद तीसरी बीम डाली जा रही थी, तभी अचानक कोई बल्ली टूट गई या कांक्रीट पिलर से सेंटिंग निकल गई और भरभराकर पूरा स्लैब बीमों सहित बैठ गया।

मजदूरों की चीखें सुनीं-

प्रत्यक्षदर्शी मनोज दुबे, बबलू बर्मन ने बताया कि दोपहर 3.10 बजे बिल्डिंग का स्लैब गिरते ही चीख-पुकार मच गई। इस बिल्डिंग के सामने-पीछे काम करते मजदूर दौड़कर हताहतों को बचाने के लिए पहुंचे। तब मलबे में दबे मजदूरों की चीखें सुनाई दे रही थीं।

40 फीट नीचे गिरे मजदूर-

मजदूरों को दौड़ते-भागते देखकर सड़क से गुजरते कुछ लोग घटनास्थल पर पहुंच गए। वहीं तिलवारा थाना से पुलिस भी मौके पर पहुंची और घायलों को बाहर निकालना शुरू कर दिया। कुछ देर में करीब 40 फीट से गिरे 13 मजदूर मलबे से बाहर निकाल लिए गए।

रात तक चला बचाव कार्य-

पुलिस ने घटना की सूचना कंट्रोल रूम को देकर 108 एम्बुलेंस बुलाई और मलबे से निकले घायलों को मेडिकल अस्पताल भेजा। इसके बाद घटनास्थल पर रात 8 बजे तक आपदा प्रबंधन और होमगार्ड के जवानों का दल बचाव कार्य करने में जुटा रहा। क्रेडाई एसोसिएशन अध्यक्ष गिरीश खरे, बिल्डर सरबजीत सिंह मोखा, शरद बरसैंया आदि भी मौके पर पहुंचे।

ये 22 मजदूर घायल-

. बसंतीबाई गौड़ (40) पड़रिया, कुंडम

. प्रतिमा देवी यादव (34) नयागांव, रामपुर

. शिवकुमार झारिया (29) चेरीताल

. लक्ष्मीबाई गौंड (26) बड़ैयाखेड़ा, बरगी

. जुगलकिशोर मरावी (35) तिलवाराघाट

. रूपेश कंजर (42) कंजड़ मोहल्ला

. नरेश नेताम (35) ग्राम बम्हनी, बरगी

. फूलझर बाई गौंड (30) संगम कालोनी, बल्देवबाग

. शांतिबाई गौंड (20) दीनदयाल चौक

. पुनियाबाई गौंड (34) ग्राम गुड़गुड़ी, कुंडम

. भागवती बाई गौंड (35) ग्राम खुख्खम, कुंडम

. मिथिलेष समुन्द्रे (26) कंजड़ मोहल्ला

. कालू पटेल (32) ग्राम लोहारी, माढ़ोताल

. बिहारीलाल गौंड (37) साईंनगर, रामपुर

. गणेश पटेल (29) कंजड़ मोहल्ला

. कु. क्रांति ठाकुर (17) बढ़ैयाखेड़ा, बरगी

. कमल सिंह मरावी (19) नयागांव, घंसौर, सिवनी

. भूरीबाई गौंड (25) चुंगी, संजीवनी नगर

. कु. रंजना कुशराम (20) साईंनगर, रामपुर

. लक्ष्मीबाई ठाकुर (25) जम्होरी, कुंडम

. भोला गिरियाम (33) नयागांव, घंसौर, सिवनी

. कु. कविता (20) निवासी जानकारी अप्राप्त।

मेडिकल में मिला इलाज-

तिलवारा थाने के सामने निर्माणाधीन बिल्डिंग का स्लैब गिरने और 30 मजदूरों के घायल होने की खबर पाकर मेडिकल अधीक्षक डॉ. राजेश तिवारी, डीन डॉ. नवनीत सक्सेना ने कैजुअल्टी में अतिरिक्त डॉक्टरों की टीम तैनात कर दी। इससे घायलों को मेडिकल में पहुंचते ही इलाज मिला। हालांकि इस घटना में घायल 22 मजदूरों में से 5 की हालत गंभीर है।