जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने बर्खास्त आईएएस टीनू जोशी की जमानत अर्जी खारिज कर दी। मामला आय से अधिक संपत्ति पाए जाने पर लोकायुक्त द्वारा केस दर्ज किए जाने से संबंधित है। न्यायमूर्ति शांतनु केमकर की एकलपीठ के समक्ष मामला सुनवाई के लिए लगा। इस दौरान लोकायुक्त की ओर से अधिवक्ता पंकज दुबे ने जमानत अर्जी का विरोध किया।

अंतरिम जमानत का दुरुपयोग किया-

उन्होंने दलील दी कि टीनू को पूर्व में 3 माह की अंतरिम जमानत का लाभ दिया गया था। इसके बावजूद इलाज के लिए उस अवधि का इलाज के लिए सदुपयोग नहीं किया गया। इससे साफ है कि मूल मंशा किसी तरह जेल से बाहर आने की है, जिसके जरिए साक्ष्यों को प्रभावित किया जा सके या फरार हुआ जा सके। इसके अलावा आपत्ति का एक बिन्दु यह भी है कि पिछली बार टीनू ने अपनी मां के निधन की सूचना अखबारों में प्रकाशित कराई थी, जिसके संबंध में विधिवत शपथपत्र नदारद था। वह बेटी की शादी में ऑनलाइन शिरकत आदि के नाम पर येन-केन-प्रकारेण जमानत की कोशिश करती आई है।

अरविन्द जोशी की पत्नी- टीनू जोशी बर्खास्त आईएएस अरविन्द जोशी की पत्नी है। अरविन्द जोशी के खिलाफ भी आय से अधिक सपंत्ति अर्जित करने का आरोप है। वह लोकायुक्त द्वारा केस दर्ज किए जाने के बाद से फरार है। जबकि उसकी पत्नी टीनू जोशी पुलिस के हत्थे चढ़ गई। यदि उसे जमानत का लाभ दिया गया तो वह भी फरार हो सकती है। ऐसा इसलिए भी क्योंकि अरविन्द व टीनू जोशी के बारे में जानकारियां जुटाने में लोकायुक्त पुलिस को परमानेंट एड्रेस के अभाव में भारी दिक्कत हो रही है। ससुर हरिवल्लभ जोशी हर बार यही जवाब देकर किनार कर जाते हैं कि बेटे-बहू के बारे में कोई जानकारी नहीं है। सवाल उठता है कि जब कोई स्थायी पता-ठिकाना नहीं है, तो जमानत आखिर किस आधार पर दी जाए?