जबलपुर। पब्लिक शेयरिंग के लिए हेक्सी स्टेशन में खड़ी साइकिलों को घर ले जाकर लॉक के ऊपर लगे क्यूआरकोड को तोड़ा या साइकिल की पहचान छिपाने सूरत बदली तो भी साइकिल खोज ली जाएगी, क्योंकि साइकिल में लगे जीपीएस (ग्लोबल इंफरमेंशन सिस्टम) में तोड़फोड़ संभव नहीं।

साइकिलें कहां-कहां खड़ी हैं? जीपीएस से उनकी लोकेशन लगातार मिल रही है। भले ही उनका क्यूआर कोड तोड़ दिया गया है। यदि किसी के घर पर साइकिल की लोकेशन मिली तो संबंधित को जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है।

अब तक खोजी 50 से ज्यादा साइकिलें

- पिछले 2 महीने में 50 से ज्यादा साइकिलों में तोड़फोड़ कर छेड़छाड़ की गई।

- यह साइकिलें स्टैंड की जगह निवाड़गंज, ओमती क्षेत्र, हनुमानताल, गोरखपुर के पास मिली थी।

- कंपनी कर्मचारियों ने जीपीएस की मदद से खोज निकाली।

एक पर एफआईआर

हैक्सी साइकिल के साथ तोड़फोड़ करने और चुराने के आरोप में अब तक सिर्फ एक व्यक्ति पर ही एफआईआर कराई गई है। बता दें कि गोरखपुर निवासी मनोज पांडे साइकिल का क्यूआर कोड तोड़कर रिक्शे में लाद कर साइकिल घर ले जा रहा था।

पचास से ज्यादा साइकिलों से हुई छेड़छाड़

- पिछले एक महीने में 50 से ज्यादा साइकिलों में तोड़फोड़ के मामले सामने आए।

- ऑटोमेटिक लॉक खोलने 10 से 12 साइकिलों के क्यूआर कोड दिए गए।

- जीपीएस निकालने 30 से ज्यादा साइकिलों की सीट को नुकसान पहुंचाया गया।

- इन साइकिलों को जीपीएस से ट्रेस कर खोज निकाला और सुधार कर वापस स्टैण्ड में छोड़ दिया।

46 हजार कर चुके राइड

- 40 हैक्सी स्टेशन में खड़ी की 350 साइकिलें।

- 36 हजार लोगों ने पिछले 2 माह में हेक्सी ऐप डाउनलोड किया।

- 46 हजार लोग साइकिल की सवारी का लुत्फ उठा चुके।

- कॉलेज छात्र व युवा कर रहे साइकिल का इस्तेमाल।

इनका कहना है

अब तक 50 से ज्यादा साइकिलों से छेड़छाड़ की गई है। जिसमें कुछ के क्यूआर कोड और कुछ की सीटें निकाल ली गईं थी, लेकिन साइकिलों में लगे जीपीएस से छेड़छाड़ संभव नहीं। साइकिलों को जीपीएस से खोजा गया और सुधार कार्य कर वापस स्टैंड में छोड़ दिया गया है। अब छेड़छाड़ के मामले कम आ रहे।

-गजेन्द्र वैद्य, प्रभारी साइकिल शेयरिंग, स्मार्ट सिटी