जबलपुर। 14 साल के दिव्यांग बालक की जान मेडिकल कॉलेज अस्पताल में फैली अव्यवस्था की भेंट चढ़ गई। विक्टोरिया अस्पताल से रेफर किए जाने के बाद परिजन उसे लेकर मेडिकल कॉलेज पहुंचे जहां कैजुअल्टी कॉम्पलेक्स के बाहर उन्हें करीब 2 घंटे तक स्ट्रेचर के लिए इंतजार करना पड़ा।

इस दौरान एम्बुलेंस में रखे सिलेंडर का ऑक्सीजन भी खत्म होने से बालक तड़पने लगा। काफी जद्दोजहद के बाद उसे इलाज मिल पाया लेकिन कुछ घंटे बाद ही उसकी सांस टूट गई। बच्चे की मौत के लिए परिजन ने इलाज मिलने में देरी और अस्पताल की बदइंतजामी को जिम्मेदार ठहराया है।

पसली में चला गया था पानी

ग्रीन सिटी माढ़ोताल गली नंबर 16 निवासी राजाराम सैनी ने बताया कि उनका इकलौता बेटा अंकुर सैनी दिव्यांग था। रविवार सुबह करीब 11 बजे घर में पानी पीने के दौरान न जाने क्या हुआ उसकी तबीयत बिगड़ गई। उसकी नाक से पानी जैसा तरल पदार्थ बहने लगा। 108 एम्बुलेंस से विक्टोरिया पहुंचाया गया जहां डॉक्टरों ने बताया कि पानी पीने के दौरान हुई असावधानी के कारण वह पसली में चला गया है। उसे मेडिकल रेफर कर दिया गया।

तीन स्ट्रेचर, सभी पर लेटे थे मरीज

राजाराम ने बताया कि अंकुर को लेकर वे जब मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचे तो कैजुअल्टी कॉम्पलेक्स के बाहर तीन स्ट्रेचर थे, जिन पर मरीज लेटे हुए थे। अंकुर को कैजुअल्टी तक ले जाने के लिए स्ट्रेचर की मांग करते रहे। कैजुअल्टी के डॉक्टरों व कर्मचारियों से मिन्नतें की गईं परंतु किसी ने ध्यान नहीं दिया। इस बीच ऑक्सीजन खत्म हो गई, जिससे अंकुर की हालत बिगड़ने लगी।

वार्ड में भर्ती होने के कुछ घंटे बाद हुई मौत

परिजन ने बताया कि अंकुर बमुश्किल कैजुअल्टी कॉम्पलेक्स तक पहुंच पाया। वहां प्राथमिक उपचार देकर आईसीयू में भर्ती कराया गया लेकिन शाम 5 बजे डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

इनका कहना है

कैजुअल्टी कॉम्लेक्स में मरीजों की सुविधा के लिए पर्याप्त संख्या में स्ट्रेचर सहित अन्य संसाधन मौजूद हैं। संबंधित बालक को समय रहते संसाधन व उपचार क्यों नहीं मिल पाया, इसकी जांच कराई जाएगी। लापरवाही सामने आने पर कार्रवाई की जाएगी।

डॉ. राजेश तिवारी, अधीक्षक मेडिकल कॉलेज अस्पताल