जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने पूर्व सांसद एनपी चौधरी की पुत्री सरोज सोनकर द्वारा अपने पति व ससुराल वालों के खिलाफ 23 साल पूर्व दर्ज कराए गए दहेज प्रताड़ना के मामले की केस डायरी पेश न करने पर जबलपुर महिला थाना प्रभारी को सख्त ताकीद की है। सोमवार को न्यायमूर्ति राजीव कुमार दुबे की एकलपीठ ने कड़ाई बरतते हुए कहा कि तीन सप्ताह के भीतर केस डायरी पेश न करने पर टीआई को कोर्ट में उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देना होगा। सरोज के पति रहे श्रवण कुमार व उसके परिजनों ने उक्त प्रकरण को चुनौती दी है।

कानपुर निवासी श्रवण कुमार व उसके परिजनों ने 2004 में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि उत्तरप्रदेश सरकार में चीफ इंजीनियर के पद पर कार्यरत श्रवण कुमार का विवाह पूर्व सांसद एनपी चौधरी की पुत्री व विक्टोरिया अस्पताल जबलपुर में कार्यरत डॉ. आरएस चौधरी की बहन सरोज से 15 जनवरी 1993 को हुआ था। उनका दाम्पत्य जीवन ठीक चल रहा था। 27 दिसंबर 1993 को सरोज के पिता सांसद चौधरी ने उत्तरप्रदेश के राज्यपाल को पत्र लिखकर शिकायत की थी कि उनकी पुत्री को ससुराल में दहेज के लिए प्रताड़ित किया जा रहा है।

तलाक के बावजूद लगा दिया केस- राज्यपाल ने उन्नाव एसपी को मामले की जांच के निर्देश दिए। 22 मई 1995 को एडीशनल एसपी उन्नाव ने मामले की जांच कर रिपोर्ट दी कि आरोप मिथ्या हैं। सरोज अपने पति के साथ सहर्ष रह रही है। इसके बाद 15 मई 1995 को सरोज ने अदालत के जरिए श्रवण कुमार से तलाक ले लिया। इसके बावजूद सरोज ने 2 सितंबर 1996 को जबलपुर के महिला थाने में याचिकाकर्ताओं के खिलाफ भादंवि की धारा 498 ए, 406 और दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज करा दिया। जबकि वैधानिक रूप से वह उस समय याचिकाकर्ता की पत्नी ही नहीं थी। इस प्रकरण को झूठा बताते हुए उन्होंने निरस्त करने की मांग की।

कार्रवाई पर लगी है रोक- हाईकोर्ट ने पूर्व में अंतरिम राहत देते हुए उक्त प्रकरण पर आगे कार्रवाई स्थगित कर दी थी। सोमवार को याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दिलीप परिहार ने दलील दी कि 23 जनवरी 2919 को कोर्ट ने महिला थाना प्रभारी को तीन सप्ताह के अंदर केस डायरी पेश करने को कहा था। इसके बावजूद अब तक डायरी पेश नहीं हुई। इस पर कोर्ट ने अगली सुनवाई तक हर हाल में इसे पेश करने के निर्देश दिए। तब तक अंतरिम राहत बरकरार रहेगी। सरकार का पक्ष सत्येन्द्र सिंह ने रखा। सरोज की ओर से कोई वकील पक्ष रखने के लिए खड़ा नहीं हुआ।