जबलपुर। घाटे में चल रही ट्रेनों को यात्रियों की जरूरत के मुताबिक समय और कोचों की संख्या में बदलाव कर रेलवे उन्हें मुनाफे में लाने की तैयारी कर रहा है। रीवा-इंदौर एक्सप्रेस में किया गया प्रयोग सफल रहा। इस ट्रेन की बदली टाइमिंग पैसेंजर के लिए इतनी सुविधाजनक रही कि एक माह के भीतर ही 35 लाख पैसेंजरों (एसी और स्लीपर) ने इसमें सफर किया और 35 फीसदी घाटे में दौड़ रही ट्रेन 86 फीसदी मुनाफे में आ गई। इसी को ध्यान में रखते हुए रेलवे अब जबलपुर-इंदौर इंटरसिटी (वाया कटनी-सागर-गुना) का समय भी बदलने जा रहा है। इसके अलावा दिल्ली जाने वाले यात्रियों के लिए गोंडवाना एक्सप्रेस का भी समय भी और ज्यादा सुविधाजनक करने का प्रस्ताव है।

गोंडवाना एक्सप्रेस को 2 घंटे लेट चलाने की प्लानिंग

जबलपुर से दिल्ली जाने वाले यात्रियों की पसंदीदा ट्रेन गोंडवाना एक्सप्रेस है, क्योंकि यह सबसे कम समय में दोपहर 3 बजे जबलपुर से चलकर सुबह 5 बजे दिल्ली पहुंच जाती है। हालांकि इसके जबलपुर से जाने के समय को लेकर यात्रियों को आपत्ति है। जबलपुर से जाने का समय दोपहर 3 बजे होने से यात्रियों का आधा दिन ट्रेन में खराब हो जाता है वहीं दिल्ली भी सुबह-सुबह पहुंच जाते हैं। इसलिए अब इस ट्रेन को 2 घंटे लेट चलाने की प्लानिंग है। इसका समय दोपहर 3 बजे के स्थान पर शाम 5 बजे हो जाएगा तो सर्विस क्लास और व्यापारियों को दो घंटे की बचत होगी। वहीं दिल्ली भी सुबह 7 बजे पहुंचने से कोई परेशानी नहीं होगी।

जबलपुर-इंदौर इंटरसिटी को रात में दौड़ाने की तैयारी

जबलपुर-इंदौर इंटरसिटी (वाया कटनी-सागर-गुना) अपनी टाइमिंग के कारण यात्रियों को पसंद नहीं है। यह ट्रेन सुबह 5 बजे चलकर रात 9 बजे के बाद इंदौर पहुंचती है। इससे यात्रियों का पूरा दिन ट्रेन में बर्बाद हो जाता है। रेलवे के सर्वे में भी यही बात सामने आई है क्योंकिरेलवे को इस ट्रेन में 100 से भी कम पैसेंजर मिले। दूसरी तरफ जबलपुर-इंदौर ओवरनाइट एक्सप्रेस (वाया भोपाल) में लगातार वेटिंग बढ़ रही है क्योंकि वह रात को चलकर सुबह इंदौर पहुंच जाती है। इससे यात्रियों का दिन खराब नहीं होता है। इसलिए रेलवे इंटरसिटी का समय बदलकर रात 9 से 10 बजे के बीच करना चाहता है, ताकि यात्रियों का दिन खराब न हो और रेलवे को पैसेंजर भी मिल सकें।

सर्वे में ये बातें आइर् सामने

-ट्रेन का समय ज्यादातर रात का हो, ताकि यात्रियों का दिन खराब न हो।

-स्लीपर के साथ एसी कोच की भी संख्या बढ़ाई जाए।

-ट्रेन का समय ऐसा हो, ताकि गंतव्य तक ट्रेन सुबह या दोपहर तक पहुंचे।

-जनरल कोच की संख्या बढ़ाया जाए।

-किराया अतिरिक्त न हो, वेटिंग जल्दी क्लियर हो।

वर्जन

जोन ट्रेनों का समय बदलना चाहता है, लेकिन अक्सर दूसरे जोन इस पर ऐतराज करते हैं। हम इसके दूसरे विकल्प भी तलाश रहे हैं। इस पर तैयारी शुरू हो गई है। समय बदलने से रीवा-इंदौर ओवरनाइट के परिणाम बेहतर आए हैं।

-सुुरेन्द्र यादव, सीपीआरओ, पश्चिम मध्य रेलवे