जबलपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

परीक्षाओं को लेकर राजभवन सख्ती करने के निर्देश दे रहा है। केन्द्रों में नकल न हो इसके लिए कैमरे लगाए जा रहे हैं, लेकिन लगता है कि कैमरे के भरोसे ही पूरी परीक्षाएं होंगी। फ्लाइंग स्क्वॉड केन्द्रों में नजर ही नहीं रख पा रहे हैं। आठ जिलों में स्नातक परीक्षाओं के लिए महज तीन फ्लाइंग स्क्वॉड बना है। वो भी जबलपुर और आसपास ही दौड़ रहा है। यही वजह है कि केन्द्रों के भरोसे परीक्षाओं का संचालन हो रहा है। उच्च शिक्षा विभाग भी परीक्षाओं के लिए फ्लाइंग स्क्वॉड का गठन नहीं कर रहा है।

क्या है वजह -

फ्लाइंग स्क्वॉड गठन के लिए हर जिले में अग्रणी कॉलेज को दिशा-निर्देश जारी करना है। यूनिवर्सिटी और क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक स्तर पर ये समन्वय होता है। जबलपुर समेत 8 जिलों में परीक्षाएं हो रही हैं। कायदे से सभी जिलों में अलग फ्लाइंग स्क्वॉड बनाया जाना था ताकि ज्यादा से ज्यादा संवेदनशील केन्द्रों पर निगरानी की जा सके, लेकिन कॉलेज में इसमें रुचि ही नहीं ले रहे हैं। बताया जाता है कि यूनिवर्सिटी फ्लाइंग स्क्वॉड में शामिल सदस्यों को न वाहन उपलब्ध करवाती है और न ही उन्हे मानदेय दिया जाता है। सुरक्षा की भी कोई गारंटी नहीं होती है। इस वजह से शिक्षक भी परेशान होना नहीं चाहते।

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गर्मी में नहीं करना चाहते ड्यूटी-

सरकारी और अनुदान प्राप्त कॉलेजों के प्रोफेसरों की इस कार्य में तैनाती होती है। गर्मियों के दिन में कोई भी प्रोफेसर कॉलेज छोड़कर जाने तैयार नहीं है। परीक्षाएं तीन पालियों में होती हैं। सुबह से शाम तक परीक्षाओं की निगरानी करनी होती है। ऐसे में प्रोफेसर बिना वजह इस काम को करना नहीं पसंद कर रहे हैं।

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21 अप्रैल से शुरू हो रहीं सेमेस्टर परीक्षाएं

फिलहाल स्नातक प्रथम सालाना पैटर्न की परीक्षाएं चल रही है। इनके लिए भी जिलों में फ्लाइंग स्क्वॉड नहीं बनाया गया है। 21 अप्रैल से बीकॉम 6वें सेमेस्टर की परीक्षाएं प्रारंभ हो रही हैं। इसके अलावा 26 अप्रैल से बीए और बीएससी की आखिरी सेमेस्टर की परीक्षाएं प्रारंभ होगी। परीक्षाएं जल्दी होने से सबसे ज्यादा फायदा करीब 25 हजार छात्रों को होगा जिन्हें जून के अंत तक नतीजे मिल पाएंगे।

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वर्जन....

यूनिवर्सिटी की ओर से कोई आदेश नहीं आया है। जिलों के अग्रणी कॉलेज को फ्लाइंग स्क्वॉड बनाने के लिए वाहन और मानदेय का भुगतान यूनिवर्सिटी से नहीं किया जाता है। इस वजह से फ्लाइंग स्क्वॉड नहीं बना।

-डॉ.केएल जैन, क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक, उच्च शिक्षा जबलपुर संभाग