जबलपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

अब राज्य के उन प्राइवेट स्कूलों की खैर नहीं जो नए शिक्षण सत्र में 10 फीसदी से अधिक की फीस वृद्घि करेंगे। ऐसा करने वाले प्राइवेट स्कूलों को नियमानुसार प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। इस संबंध में राज्य शासन ने मध्यप्रदेश स्कूल फीस विनियमन अधिनियम की धारा-18 को विधिवत अधिसूचित कर दिया है। इसके तहत कोई भी निजी स्कूल अपने पिछले शिक्षण-सत्र के शुल्क में अधिकतम 10 प्रतिशत ही इजाफा कर सकेगा। इससे अधिक की बढ़ोतरी किए जाने पर उस स्कूल के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की जाएगी। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश हेमंत गुप्ता व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की युगलपीठ ने उक्त जानकारी को रिकॉर्ड पर लेते हुए नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के प्रांताध्यक्ष डॉ. पीजी नाजपांडे की जनहित याचिका का निराकरण कर दिया।

अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने बताया कि जनहित याचिका में जो मांग की गई थी, वह पूरी हो जाने के कारण सोमवार को याचिका वापस किए जाने का निवेदन किया। हाईकोर्ट ने इसे मंजूर करते हुए याचिका का पटाक्षेप कर दिया।

अधिनियम बना पर नहीं बने थे नियम

- याचिकाकर्ता डॉ. नाजपांडे ने बताया कि लंबे समय से प्रदेश के निजी स्कूलों की मनमानी फीस वसूली के खिलाफ आंदोलन चलाया जा रहा था। समय-समय पर जनहित याचिका के जरिए हाईकोर्ट की शरण ली भी ली गई। इसका नतीजा यह हुआ कि राज्य शासन ने मध्यप्रदेश स्कूल फीस विनियमन अधिनियम बना दिया। लेकिन नियम नदारद थे। बिना अधिसूचना और नियम के अधिनियम महज खाना पूर्ति की श्रेणी में रखे जाने योग्य था। इसी रवैये के खिलाफ याचिका लगाई गई थी।

कलेक्टर की अनुमति से ही बढ़ा सकेंगे 10 फीसदी से अधिक फीस

- मध्यप्रदेश स्कूल फीस विनियमन अधिनियम की धारा-18 के अधिसूचित होने के साथ ही अब प्रदेश के निजी स्कूल अपने पिछले 3 वर्षों की फीस के आधार पर स्कूल के संचालन में पेश आ रही कठिनाई के संबंध में विधिवत कलेक्टर को आवेदन करेंगे। जिसके बाद दस्तावेज और निरीक्षण के बाद यदि कलेक्टर की लिखित अनुमति मिलती है, तो 10 प्रतिशत से अधिक फीस बढ़ाई जा सकेगी।

नईदुनिया की पहल रंग लाई

- नईदुनिया ने प्रदेश के निजी स्कूलों की मनमानी फीस वसूली के खिलाफ निरंतर खबरों के जरिए अभिभावकों व छात्र-छात्राओं का पक्ष रखा था। जनहित याचिका में भी नईदुनिया की खबरों को संलग्न कर इंसाफ की आवाज बुलंद की गई थी।