जबलपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने भोपाल के एसपी व टीआई को सख्त निर्देश दिया है कि वे या तो आदेश का पालन सुनिश्चित करें या फिर चले आएं। मामला नाबालिग को जबरन बंधक बनाए जाने के आरोप से संबंधित है।

सोमवार को न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी की समर वेकेशन बेंच के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान बंदीप्रत्यक्षीकरण याचिकाकर्ता भोपाल निवासी का पक्ष अधिवक्ता केके पाण्डेय व नीलम गोयल ने रखा। उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ता की नाबालिग बेटी को पड़ोस में रहने वाले एक युवक ने जबरन बंधक बना लिया है। 24 मार्च 2019 को जब बंधक बनाया गया, तक तक वह 18 वर्ष से कम आयु की थी। अब उसकी आयु 18 वर्ष हो चुकी है।

मोबाइल नंबर ट्रेक किए या नहीं- हाईकोर्ट के पूर्व निर्देश के पालन में जांच अधिकारी कोर्ट में हाजिर हुए। कोर्ट ने उनसे सवाल किया कि नियमानुसार किसी नाबालिग के गायब होने पर जिन पर संदेह होता है, उनके मोबाइल नंबर ट्रैक करने का विधान है। इस मामले में यह किया गया या नहीं? इस पर जांच अधिकारी की ओर से ऐसा न किए जाने की मौखिक जानकारी दी गई। इसे लेकर कोर्ट ने नाराजगी जताई। साथ ही निर्देश दे दिया कि टीआई एक सप्ताह के भीतर बाकायदा शपथपत्र पर इस बारे में जानकारी प्रस्तुत करें। यही नहीं एसपी यह स्पष्ट करें कि यदि जांच अधिकारी या टीआई की ओर से ठीक से जांच नहीं की गई तो उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई? यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो एसपी और टीआई दोनों को हाजिर होना पड़ेगा।