जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने बुधवार को राज्य शासन की पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई करते हुए निर्देश दिया कि पोषण आहार की शॉर्ट टर्म टेंडर प्रक्रिया से एमपी स्टेट एग्रो की तीनों ज्वाइंट वेंचर पार्टनर कंपनियों को बाहर रखा जाए।

मुख्य न्यायाधीश हेमंत गुप्ता व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की युगलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान राज्य की ओर से महाधिवक्ता पुरुषेन्द्र कौरव व उपमहाधिवक्ता पुष्पेन्द्र यादव खड़े हुए। उन्होंने जानकारी दी कि स्टेट कैबिनेट ने मंगलवार को निर्णय लिया है कि जब तक पोषण आहार वितरण संबंधी ठोस नीति निर्धारित नहीं हो जाती, तब तक शॉर्ट टर्म टेंडर प्रक्रिया के जरिए पोषण आहार वितरण निरंतर रखा जाएगा।

इसके लिए हाईकोर्ट की अनुमति अपेक्षित है। हाईकोर्ट ने इस निवेदन को मंजूर करते हुए एमपी स्टेट एग्रो की तीनों ज्वाइंट वेंचर पार्टनर कंपनियों को बाहर रखते हुए शॉर्ट टर्म टेंडर प्रोसेस सम्पन्न् करने की व्यवस्था दे दी।

इंदौर बेंच का अंतरिम आदेश निरस्त

हाईकोर्ट ने एमपी स्टेट एग्रो की तीनों ज्वाइंट वेंचर पार्टनर कंपनियों को शॉर्ट टर्म टेंडर प्रक्रिया में प्रतिबंधित करने के साथ ही इंदौर बेंच का जस्टिस पीके जायसवाल की डीबी का पूर्व अंतरिम आदेश निरस्त कर दिया।

इसी के साथ मामले की अगली सुनवाई 27 मार्च को निर्धारित कर दी। मामले की सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से महाधिवक्ता पुरुषेन्द्र कौरव व उपमहाधिवक्ता पुष्पेन्द्र यादव ने साफ किया कि स्वसहायता समूहों के जरिए पोषण आहार प्रक्रिया को गति दी जाएगी।

इस सिलसिले में सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का समुचित पालन करने सरकार प्रतिबद्ध है। यह भी निर्धारित किया गया है कि इस प्रक्रिया से निजी कंपनियों को बाहर रखा जाए। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की मुख्य जनहित याचिकाकर्ता पीयूसीएल की तरफ से अधिवक्ता सिद्धार्थ सेठ ने पक्ष रखा।

हाई कोर्ट ने इन तर्कों पर लिया संज्ञान

हाई कोर्ट ने जिन तर्कों पर संज्ञान लिया, उनमें सुप्रीम कोर्ट द्वारा 7 अक्टूबर 2004 को दिया गया दिशा-निर्देश शामिल था। सुको ने साफ किया था कि आईसीडीएस में ठेकेदार उपयोग में नहीं लाए जाएं। आईसीडीएस की राशि का उपयोग ग्राम समितियों, स्वयं सहायता समूहों और महिला मंडलों के जरिए क्रियान्वित किया जाए।

13 दिसंबर 2006 के निर्देश

हाई कोर्ट ने पाया कि सुप्रीम कोर्ट ने 13 दिसंबर 2006 को दिशा-निर्देश जारी किया था कि सभी राज्यों के मुख्य सचिव यह शपथपत्र प्रस्तुत करें कि आंगनवाड़ी पोषण आहार की आपूर्ति में ठेकेदारों को शामिल न करने संबंधी निर्देश का किस हद तक पालन किया गया। इस दिशा में कौन से कदम उठाए गए?

विकेंद्रीकरण आवश्यक

सुनवाई के दौरान 31 मार्च 2017 को ठेकेदार व्यवस्था खत्म हो चुकने का तर्क भी रखा गया। अधिवक्ता सिद्धार्थ सेठ ने दलील दी कि मध्यप्रदेश शासन एमपी एग्रो के साथ अनुबंध बनाए रखने बाध्य नहीं है। लिहाजा, उसे ठोस नीतिगत निर्णय लेना चाहिए। ऐसा इसलिए भी क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने पोषण आहार व्यवस्था विकेंद्रीकृत करने निर्देश दिए थे।