जबलपुर। मध्यप्रदेश के अधिकांश एटीएम की सुरक्षा के लिए सिक्योरिटी गार्ड नहीं रहते, इसलिए यहां के एटीएम कार्डधारकों को टारगेट करना सबसे आसान है। एटीएम का क्लोन बनाकर बैंक खातों से पैसे निकालने वाले गिरोह के तीन सदस्यों ने यह खुलासा कर पुलिस को हैरत में डाल दिया। प्रतापगढ़ यूपी निवासी तीनों आरोपितों को ओमती पुलिस ने बुधवार को दबोचा था। न्यायालय से तीन दिन की पुलिस रिमांड स्वीकृत होने पर पुलिस कड़ी पूछताछ कर रही है।

गार्ड विहीन एटीएम में आसान रहता है डिवाइस लगाना

आरोपितों ने बताया कि सिक्योरिटी गार्ड विहीन एटीएम में आधुनिक डिवाइस लगाना आसान रहता है। वहां कोई रोकटोक करने वाला नहीं रहता, जिसके चलते आसानी से डिवाइस लगाया जा सकता है। वे सिक्योरिटी गार्ड विहीन एटीएम की रेकी कर उसमें डिवाइस लगा देते थे। पैसे निकालने पहुंचे खाता धारक के एटीएम का नंबर व पासवर्ड डिवाइस में कैद हो जाता है।

गिरोह में 5 हजार से ज्यादा सक्रिय सदस्य

एटीएम धारक से ओटीपी व कार्ड नंबर पूछे बगैर क्लोन तैयार करने वाले गिरोह में 5 हजार से ज्यादा सदस्य सक्रिय हैं। आरोपितों ने बताया कि समूचे देश में उनका नेटवर्क फैला हुआ है। जिस शहर के एटीएम का क्लोन तैयार होता था, वहां से रकम न निकालकर दूसरे शहर के एटीएम से रकम निकाली जाती थी, ताकि पुलिस यह संदेह न कर पाए कि गिरोह के सदस्य उस शहर में भी घूम रहे हैं।

बिहार का युवक 1 लाख में बेचता है सॉफ्टवेयर

एटीएम का क्लोन तैयार करने वाला सॉफ्टवेयर बिहार का युवक 1 लाख रुपए में बेचता है। वह कौन है पुलिस पता लगा रही है। आरोपितों ने बताया कि वे प्रताप से साफ्टवेयर खरीदते हैं जो ऑफलाइन काम करता है। हर 25 दिन में साफ्टवेयर का पासवर्ड प्रताप बदल देता है जिसे पुनः सक्रिय करने नया पासवर्ड देने के लिए वह 20 से 25 हजार रुपए लेता है। आरोपितों का दावा है कि प्रताप हजारों लोगों को साफ्टवेयर बेच चुका है।

एसबीआई के एटीएम पर ज्यादा फोकस

आरोपितों की गैंग का फोकस एसबीआई के एटीएम पर ही क्यों रहता था, पुलिस यह पता लगा रही है। पूछताछ में आई जानकारी के आधार पर पुलिस को आशंका है कि आरोपितों को साफ्टवेयर उपलब्ध कराने वाला युवक कहीं एसबीआई को साफ्टवेयर बनाकर देने वाली कंपनी के संपर्क में तो नहीं है। जिस साफ्टवेयर के आधार पर मैग्नेटिक चिप सहित एसबीआई के एटीएम का क्लोन आसानी से तैयार किया जा रहा है।

दर्जनभर जिलों की पुलिस ने किया संपर्क

आरोपितों की गिरफ्तारी की खबर फैलते ही प्रदेश के दर्जनभर जिलों की पुलिस ने जबलपुर पुलिस से संपर्क करना शुरू कर दिया है। इंदौर, भोपाल, देवास, छतरपुर, दमोह, पन्ना, सागर समेत अन्य जिलों की पुलिस ने अपने जिलों में हुई इस तरह की घटनाओं की टोह लेने जबलपुर पहुंचने वाली है। ओमती पुलिस आरोपितों से पूछताछ कर पता लगा रही है कि उन्होंने जबलपुर के अलावा प्रदेश में और कहां-कहां इस तरह की वारदातों को अंजाम दिया है।

वीडियो क्लिप भेजते थे कानपुर

आरोपितों से पूछताछ में यह जानकारी सामने आई कि वे एटीएम में डिवाइस लगाते थे। पैसे निकालने के लिए पहुंचने वाले कार्डधारकों का ब्योरा डिवाइस में कैद हो जाता था। कार्डधारक के एटीएम से निकलने के बाद वे डिवाइस की क्लिपिंग कानपुर में बैठे गिरोह के अन्य सदस्यों के पास भेज देते थे। उस आधार पर एटीएम का क्लोन तैयार करने के बाद वहां से तय होता था कि किस शहर या राज्य के एटीएम से रकम निकालना है।

यह है मामला

ओमती पुलिस व क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने प्रतापगढ़ यूपी निवासी बजरंग बहादुर उर्फ सावन सिंह, संदीप सिंह व कुलदीप सिंह को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि एटीएम का क्लोन बनाकर वास्तविक कार्ड धारकों के बैंक खातों से तीनों रकम निकालते हैं। आरोपितों ने ओमती, गढ़ा व अधारताल स्थित एटीएम में इस तरह की वारदातों को स्वीकार किया है।

एटीएम का क्लोन बनाने के लिए आरोपित जिससे सॉफ्टवेयर खरीदते थे उसका पता लगाया जा रहा है। आरोपितों ने बताया है कि मप्र के एटीएम की सुरक्षा के लिए सिक्योरिटी गार्ड नहीं रहते जिसके चलते उन्होंने यहां टारगेट किया।

शिवेश सिंह बघेल, एएसपी क्राइम