जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जस्टिस अंजुलि पालो की एकलपीठ ने फेसबुक और व्‍हाट्सअप के जरिए मैसेज कर एक युवती की 5 बार शादी तुड़वाने वाले युवक की प्रकरण निरस्त करने की याचिका निरस्त कर दी। एकलपीठ ने कहा कि युवक को इसलिए राहत नहीं दी जा सकती है क्योंकि उसने अलग-अलग नंबरों से शादी तुड़वाने के लिए मैसेज भेजे हैं जिसके सबूत भी हैं।

बिलासपुर राजेन्द्र नगर निवासी कार्तिक दुबे ने वर्ष 2014 से 2017 तक जबलपुर निवासी एक युवती की 5 बार शादी तुड़वाई। सभी शादियां वाट्सअप और फेसबुक से अलग-अलग नंबर से भेजे गए मैसेजों के कारण टूटी जो कार्तिक ने किए थे।

इसको लेकर युवती के भाई ने ग्वारीघाट थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने इस मामले में धारा 506, 507, 354 डी और आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत बिलासपुर निवासी कार्तिक दुबे के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया। इसी को लेकर कार्तिक ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर प्रकरण निरस्त करने की मांग की थी। याचिका में कहा गया कि युवती उसके साथ में पढ़ती है।

इसलिए उसकी युवती से मोबाइल पर बातचीत होती है। केवल इस आधार पर उसके खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया गया है। एकल पीठ से प्रकरण को निरस्त करने का अनुरोध किया गया। शासकीय अधिवक्ता अक्षय नामदेव ने कहा है कि प्रकरण दर्ज करने के बाद पुलिस ने युवक के मोबाइल नंबर की जो कॉल डिटेल निकाली उसकी रिपोर्ट से स्पष्ट है कि युवक ने पांच अलग-अलग नंबरों से फेसबुक और वाट्सअप पर आपत्तिजनक मैसेज भेजे। इसकी वजह से युवती की पांच जगह शादी टूट गई। सुनवाई के बाद एकल पीठ ने युवक की याचिका खारिज कर दी है।