जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने अपने एक अंतरिम आदेश में कहा कि शिक्षा के अधिकार (आरटीई) के तहत निर्बाध शिक्षा राज्य शासन का कर्तव्य है। लिहाजा, बैंक ऋ ण के कारण स्कूल बंद करने की कार्रवाई के खिलाफ जनहित याचिका विचारण योग्य है। उपमहाधिवक्ता पुष्पेन्द्र यादव को निर्देश दिया जाता है कि वह 30 जुलाई तक राज्य से निर्देश हासिल कर अवगत कराएं। इस बीच स्कूल के खिलाफ कठोर कार्रवाई न की जाए। साथ ही बैंक और स्कूल संचालन समिति दो सप्ताह के भीतर अपने-अपने कागजात प्रस्तुत करें।

शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश हेमंत गुप्ता व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की युगलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान जनहित याचिकाकर्ता बुरहानपुर निवासी मोहम्मद फारुख और विजय शर्मा की ओर से पक्ष रखा गया। दलील दी गई कि देवचंद सापकाले मैमोरियल स्कूल लालपुर, बुरहानपुर का संचालन शिक्षा समिति करती है। इस समिति ने बैंक ऑफ इंडिया ने लोन लिया था। लोन न चुका पाने के कारण बंधक रखा गया स्कूल बंद करने का आदेश पारित कर दिया गया। 3 जुलाई 2018 को पारित इस आदेश के खिलाफ अभिभावक हाईकोर्ट चले आए हैं।

पहली से 10 वीं तक के बच्चों के भविष्य का सवाल- जनहित याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि बैंक और स्कूल प्रबंधन समिति के बीच का विवाद अलग बात है, लेकिन इन दोनों के बीच पहली से दसवीं कक्षा तक के बच्चों का भविष्य उलझ कर रह गया है।