जबलपुर। नईदुनिया रिपोर्टर

एमबीए करने के बाद ऋषि मिश्रा ने 4 साल तक शहर से बाहर एक कंपनी में जॉब किया। लगभग 14 घंटे हर दिन काम करने के बाद न तो मन में जॉब से संतुष्टि थी और न ही खुशी। एक दिन थक-हार कर ऋषि ने अपनी जॉब छोड़ी और खुद की कंपनी खोली। आज ऋषि न सिर्फ अच्छी कमाई कर रहे हैं बल्कि 10 दूसरे युवाओं को जॉब भी दे पा रहे हैं। सिर्फ ऋषि ही नहीं शहर में ऐसे युवाओं का प्रतिशत लगभग 40 फीसदी बढ़ चुका है जो जॉब को छोड़कर खुद का स्टार्टअप या कंपनी शुरू कर चुके हैं। आंकड़ों पर ध्यान दें तो तीन साल पहले शहर में स्टार्टअप की संख्या लगभग 250 थी जो अब बढ़कर 2500 के करीब पहुंच चुकी है।

स्किल का हो रहा उपयोग

अंकेश अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने पिछले साल अपना स्टार्टअप शुरू किया था। इससे पहले एक कंपनी में जॉब करते थे लेकिन जॉब के दौरान लगता था कि जो स्किल उनमें है उसका सही उपयोग नहीं हो पा रहा है। कुछ दिन तो समझौता कर लिया पर ज्यादा दिन नहीं कर पाया। एक बार स्टार्टअप शुरू किया था तो किसी वजह से फेल हो गया। फिर भी हिम्मत नहीं हारी और दोबारा प्रयास किया। पहले जो कमियां रह गईं थी उन्हें पूरा किया। अब एक साल में स्थितियां बहुत अच्छी हो गईं हैं। फूड सेक्टर के स्टार्टअप में मैं अपनी स्किल का सही उपयोग कर पा रहा हूं।

इन बातों के कारण बढ़ रहा के्रज

- शासन की योजनाओं का लाभ

- लोन वगैरह मिलने में आसानी

- सिर्फ जॉब या डिग्री लेने के लिए पढ़ाई नहीं करना

- पढ़ते हुए ही तय हो जाता है कि स्वरोजगार का रास्ता

- युवाओं की पढ़ाई को लेकर सोच बदली है

- कॉलेजों में स्टूडेंट्स को स्टार्टअप शुरू करने के लिए ट्रेनिंग दी जा रही है

- युवाओं में प्राइवेट जॉब करने का क्रेज कम हो रहा है।

ट्रिपलआईटीडीएम में बनी है सेल

युवाओं को स्टार्टअप से जोड़ने व प्रमोट करने के लिए ट्रिपलआईटीडीएम में स्टार्टअप इन्क्यूबेशन सेल खोली गई है। जहां संस्थान के स्टूडेंट्स को स्टार्टअप से संबंधित जानकारी दी जाती है। स्टार्टअप शुरू करने में जो-जो परेशानियां आ सकती हैं वो बातें भी यहां बताई जाती हैं। राष्ट्रीय पर अंतरराष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों द्वारा स्टार्टअप के प्रमोशन के गुर सिखाए जाते हैं।

फर्स्ट ईयर स्टूडेंट्स का है स्टार्टअप

पिछले 5 सालों में स्टूडेंट्स की पढ़ाई करने का सोच व तरीका बदल चुका है। अब वे परीक्षा पास होने के लिए पढ़ना नहीं चाहते न ही सिर्फ किताबी ज्ञान लेना चाहते हैं। हमारे इंस्टीट्यूट में फर्स्ट ईयर के स्टूडेंट्स भी स्टार्टअप शुरू कर रहे हैं। यूथ में स्टार्टअप को लेकर बहुत अवेयरनेस आई है। उनके पास ढेरों आइडिया है। जिन्हें वे अपने आसपास होने वाली घटनाओं, दैनिक जरूरतों की चीजों से ही लेते हैं। अब स्टूडेंट्स किसी भी परेशानी को टालता नहीं है बल्कि अपने इनोवेशन से उसका हल खोजने का सामर्थ्य रखता है और इन कामों में उसकी मदद शासन की योजनाएं बड़ी आसानी से कर रही हैं।

डॉ. पुनीत टंडन, स्टार्टअप सेल प्रभारी, ट्रिपलआईटीडीएम

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सोशल स्टार्टअप पर काम

मैं एक सोशल और एक मार्केटिंग का स्टार्टअप रन कर रहा हूं। सोशल में जरूरतमंद लोगों तक मदद पहुंचाते हैं। ऐसा बिल्कुल नहीं है कि जॉब नहीं मिल रही है तो ही स्टार्टअप बढ़ रहे हैं। अब तो युवा जॉब छोड़कर स्टार्टअप की ओर बढ़ रहे हैं। मेरे साथ लगभग 10 युवा जुड़े हैं जिन्हें जॉब मिल पा रहा हे।

रुद्राक्ष पाठक, युवा उद्यमी

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फूड सेक्टर मेरा फेवरेट

मैंने 2011 में पढ़ाई पूरी की और उसके बाद जॉब भी किया। लेकिन जॉब से संतुष्टि नहीं थी। ऐसा लगता था कि कुछ और करना है। तब जॉब छोड़ी और अपने फेवरेट फूड सेक्टर में स्टार्टअप रन कर रहा हूं। थोड़ी परेशानियां तो आती हैं लेकिन ऐसा नहीं है कि सफलता नहीं मिलती। बस कुछ करने की जिद होना चाहिए।

शिभाशीष चौधरी, युवा उद्यमी

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जब मन होता है तब होता है काम

प्राइवेट जॉब में 14-14 घंटे काम करना पड़ता था। अगर कभी मन न भी हो तो भी जॉब पर जाओ। लेकिन स्टार्टअप के बाद ऐसा नहीं है। जब मन होता है तब काम होता है बाकी टाइम दूसरे कामों के लिए भी निकल आता है। संतुष्ट हूं और खुश हूं। मेरा वाइल्ड लाइफ सेक्टर का स्टार्टअप है। जो मेरा पसंदीदा काम है।

अनुराग चतुर्वेदी,युवा उद्यमी