जबलपुर।

नवचयनित प्राध्यापक सम्मान नए शैक्षिक युग का स्वागत है। जो हमारी पीढ़ी को ज्ञान-विज्ञान से ओत-प्रोत नवाचार आधारित शिक्षा से देश का नाम ऊंचा करेंगे। पूरा विश्व भारत की ओर जिज्ञासु होकर देख रहा है। विश्व की शंकाओं का समाधान भारत के ही गुरु कर सकते हैं। मेरा पूरा विश्वास है कि नवीन प्राध्यापकगण आत्म दीप्तोभव की परंपरा का पालन करेंगे। यह बात शहीद स्मारक प्रेक्षागृह में आयोजित प्राध्यापक सम्मान समारोह में मुख्य वक्ता विद्याभारती के राष्ट्रीय मंत्री प्रकाश चन्द्र ने कही। विद्याभारती उच्च शिक्षा परिषद व विद्वत परिषद महाकोशल प्रांत द्वारा संयुक्त रूप से कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा नव चयनित प्रदेश की प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के महाधिवक्ता पुष्पेन्द्र कौरव रहे। अध्यक्षता डॉ.राजकुमार आचार्य ने की। विशिष्ट अतिथि उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त संचालक डॉ.केएल जैन, जेएनकेविवि के कुलपति डॉ.पीके बिसेन, नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा महाविद्यालय के कुलपति डॉ.पीडी जुयाल.डॉ.अखिलेश गुमास्ता, डॉ.अखिलेश जैन, डॉ.विपिन बिहारी ब्यौहार, डॉ.नरेन्द्र कोष्टी आदि उपस्थित रहे। इनके साथ ही शिक्षाविद डॉ.सुरेश्वर शर्मा, डॉ.एडीएन बाजेपयी, डॉ.पवन तिवारी, रेखा चुडास्मा, डॉ.आदित्य मिश्रा, डॉ.सुधीर अग्रवाल, डॉ.अतुल दुबे, डॉ.अमित झा, मानसिंह परिहार आदि विद्याभारती के समस्त पदाधिकारीगण उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान 300 विद्वतजनों की सहभागिता रही। कार्यक्रम में सरस्वती वंदना, मंच सम्मान व नव प्राध्यापकों को सम्मानित किया गया। इस दौरान राष्ट्रवीर राजा शंकर शाह व कुंवर रघुनाथ शाह पुस्तक का विमोचन किया गया। संचालन डॉ.आशीष मिश्रा व स्वागत संचालन राघवेन्द्र शुक्ला ने किया। अंत में आभार प्रदर्शन डॉ.अखिलेश गुमास्ता ने किया।