गोसलपुर, नईदुनिया न्यूज। जैसे-जैसे तापमान ऊपर जा रहा है चारों तरफ जल संकट के स्वर तेजी से गूंज रहे हैं। अन्य कारणों के साथ पुराने जल स्त्रोतों की घोर उपेक्षा इसका बड़ा कारण है। सिहोरा तहसील के गोसलपुर क्षेत्र भी यही हाल है। यहां एन-एच 7 से लगी ऐतिहासिक बावड़ी जो महाकाली मैदान के सामने बनी है। इसे लोगों ने कचरा डाल-डाल कर पूर भर दिया है। यहां का प्राचीन सूर्य और शिवमंदिर भी जीर्ण-शीर्ण हो रहे हैं। इस जगह का उपयोग अब कचरा डालने के लिए किया जा रहा है। खुले मैदान में पड़ा पूरी बस्ती का यह कचरा तेज हवा के साथ उड़कर लोगों के घरों भरता है। वहीं इसकी सड़ांध लोगों के लिए बीमारी का कराण बनती जा रही है।

आधी से ज्यादा आबादी का होता था निस्तार-

कभी क्षेत्र की आधी से अधिक आबादी के निस्तार के काम आने वाली यह बावड़ी क्षेत्र के जल स्तर को बनाए रखने का महत्वपूर्ण काम भी करती थी। ग्रामीणों ने ही इसकी ऐसी दशा कर दी है कि अब इसमें पानी ही नहीं है। जब से लोगों को पंचायत द्वारा लगाए गए नलों से पानी की सप्लाई की जाने लगी तो पुराने और प्राकृतिक जल स्त्रातों की उपेक्षा की जाने लगी। इस बावड़ी में भी गांव के लोगों ने अपने घरों का कचरा डालना शुरू कर दिया। इस पर कोई रोक-टोक नहीं लगाई गई तो आज स्थिति यह है कि यह ऐतिहासिक बावड़ी कचरा और पत्थरों से भर चुकी है।

साफ होने पर मिल सकता है पानी-

क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि इस बावड़ी सफाई की जाए तो इसमें अभी पानी के स्त्रोत हैं। इसका पानी कम से निस्तार के लिए उपयोग किया जा सकता है।

जुझारी की बावड़ी की हुई थी सफाई-

बताया गया है कि गत वर्ष कलेक्टर महेशचंद चौधरी के आदेश पर जुझारी की बावड़ी सफाई एसडीएम ने पंचायत से कराई थी। आज इस बावड़ी में पर्याप्त मात्रा में साफ पानी है।

क्षेत्र में गहरा रहा जल संकट-

गोसलपुर क्षेत्र में पानी का संकट लगातार गहराता जा रहा है। एक तरफ क्षेत्र का भू-जल स्तर तेजी से घट रहा है वहीं हैण्ड पंप भी कम पानी देने लगे हैं। क्षेत्र की कई बस्तियों में पानी के लिए लोगों को रात जागरण तक करना पड़ रहा है। कई क्षेत्रों में पीने के पानी तक का संकट है। टेंकरों से पानी पहुंचाने की मांग की जा रही है।

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