अनुकृति श्रीवास्तव, जबलपुर। जबलपुर का भेड़ाघाट सुसाइड पाइंट है। कारण साफ है सुनसान एरिया। नर्मदा में कूद कर मौत को गले लगाने का आसान तरीका। इसको रोकने के लिए शासन-प्रशासन का कोई पुख्ता इंतजाम तो कर नहीं सका, बल्कि एक पुलिस आरक्षक ने ही सुसाइड को रोकने को अपना मिशन बना लिया। आरक्षक हरिओम सिंह बैस ने अब तक 35 की जान बचा चुके हैं। यहां फुटपाथ पर दुकान लगाने वाले 20-25 लोग भी उनके इस मिशन में हर समय साथ देने के लिए तैयार रहते हैं। सारा मामला कुछ क्षणों की सक्रियता का है। वे मिनटों में सुसाइड करने आने वालों की स्थिति भांपने में एक्सपर्ट हो चुके हैं। बगैर समय गंवाए कुछ ऐसे शब्द सुसाइड पर्सन के कान में फूंक देते हैं कि जान देने पर उतारू व्यक्ति फिर से जिंदगी जीने के लिए तैयार हो जाता है।

आत्महत्या करने जा रही लड़की से कहा रुको हम साथ में कूदेंगे, और वह रुक गई : भेड़ाघाट थाने के आरक्षक हरिओम के इस मुहिम की शुरू करने के बारे में बताया कि आज से लगभग साढ़े तीन साल पहले एक लड़की तेजी से धुआंधार की ओर दौड़ी चली जा रही थी। मैंने उसके पीछे दौड़ लगा दी। जैसे ही वह धुआंधार में कूदने के लिए आगे बढ़ी मैंने आवाज दी, और कहा रुको मुझे भी मरना है अपन साथ में कूदेंगे। बस, इतना सुनते ही वो रुक गई। उसकी काउंसलिंग की और परिवार वालों को सौंप दिया।

पुलिस की वर्दी देखकर धक्का भी दे देती हैं महिलाएं : पुलिस की वर्दी देखकर महिलाएं और हड़बड़ा जाती हैं। इसलिए उन्हें घबराने से रोकने के लिए दुकान लगाने वाली महिलाओं को इशारों से पहले उनके आसपास भेजा जाता है। जब वह महिलाओं से घिर जाती है और हमें यकीन हो जाता है कि अब वह कूद नहीं सकती। तब हम उसके पास जाते हैं। कई बार धक्का दिया और नोंचा भी कई बार ऐसा भी हुआ कि जब महिलाओं को बचाने या रोकने की कोशिश करो तो वो धक्का दे देती हैं।

खुद बचे डूबते-डूबते

हरिओम ने बताया कि एक बार रात को 12 बजे से दो लड़कियां ऑटो से उतरकर आईं थीं। उस समय बारिश का समय था और पानी बहुत ऊपर तक बल्कि खतरनाक स्तर तक था। इस हिस्सें में यहां लाइट नहीं रहती। अंधेरे में पानी में कूद कर उन्हें खोजा। लेकिन एक बह गई थी और एक लड़की को ही बचा पाया। उस दिन मैं भी बहते-बहते बचा। तब से पत्नी बहुत डर गई हैं। कहती है कभी हमारे बारे में भी तो सोचो। लेकिन जब कोई कूदता रहता है तो मेरे दिमाग में बस एक ही बात रहती है कि उसकी जान बचाना है।