जबलपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली मांग को लेकर नेशनल मूवेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम (एनएमओपीएस) आंदोलन के बैनर तले केन्द्रीय और राज्य कर्मचारी रविवार को केन्द्र सरकार के खिलाफ जमकर गरजे। एनएमओपीएस के आह्वान पर पहले वाहन रैली निकाली गई और फिर सिविक सेंटर पार्क में एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन कर आमसभा की गई। प्रदेश भर से आए वक्ताओं ने कहा कि पुरानी पेंशन बहाली सिर्फ पैसे का मसला नहीं। बल्कि कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा मामला है।

मंच से ही केन्द्र और राज्य सरकार को यह चेतावनी भी दी कि यदि राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाल नहीं की गई तो 26 अक्टूबर को देश भर में सांसदों के घर बाहर उपवास करेंगे। फिर भी मांगें नहीं मानी तो 26 नवम्बर को संविधान दिवस पर दिल्ली कूच कर संसद का घेराव करने बाध्य होंगे।

फायदा कम नुकसान ज्यादा

एनएमओपीएस के प्रांताध्यक्ष परमांनद डेहरिया ने कहा कि नई पेंशन योजना से केन्द्रीय व राज्य कर्मचारियों को फायदा कम नुकसान ज्यादा हो रहा है। केन्द्र व राज्य सरकार एक तरफ जहां ढेरों योजनाएं चला रही है वहीं अपने ही अधिकारी-कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना से वंचित कर दिया गया है। नई पेंशन योजना के खिलाफ न सिर्फ सुरक्षा संस्थान बल्कि राज्य के शिक्षक, कर्मचारी भी खिलाफ हैं। क्योंकि इसमें कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित नहीं। इस अवसर पर डिफेंस यूनिट एनएमपीएस के प्रतिनिधि प्रेम सागर, संभागीय प्रभारी सारिका अग्रवाल, उमांशकर, जलज गुप्ता राष्ट्रीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ के प्रांताध्यक्ष नरेन्द्र तिवारी सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।

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राष्ट्रपति के नाम दिया ज्ञापन

एनएमओपीएस के जिला प्रभारी संतोष झारिया ने बताया कि पुरानी पेंशन बहाली की एक सूत्रीय मांग को राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री के नाम तहसीलदार ओमती को ज्ञापन सौंपा गया। जिसमें कर्मचारी हितों को देखते हुए जल्द पुरानी पेंशन बहाल करने की मांग की गई। इस अवसर पर आर्डनेंस फैक्टरी, सीओडी, जीसीएफ, व्हीकल, रेलवे व राज्य कर्मचारी पेंशन बहाली के बैनर, तख्ती लिए मौजूद रहे।

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नई पेंशन योजना का इसलिए हो रहा विरोध

पुरानी पेंशन योजना - नई पेंशन योजना

- पेंशन देने वेतन से कटौती नहीं होती - वेतन व डीए से 10 प्रतिशत की कटौती की जाती है

- पेंशन की राशि निश्चित, बढ़ती भी है - शेयर मार्केट के कारण अनिश्चित, बढ़ोत्तरी की गांरटी नहीं

- हर 6 माह के बाद डीए मिलता है - डीए को कोई प्रावधान नहीं

- गे्रज्युटी व फैमिली पेंशन की व्यवस्था - ग्रेज्युटी व फैमिली पेंशन की अस्थाई व्यवस्था

- मृत्यु होने तक मिलती है पेंशन - कर्मचारी की मृत्यु के बाद सरकारी खजाने में

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